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चेनानी-नाशरी : देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग

Chenani-Nashri Highway Tunnel: Beginning of a New Era in Road Connectivity
  • भूमिका
    सुरम्य घाटियों, बर्फ से ढके पहाड़ों, हरे-भरे मैदानों आदि के बीच बसा जम्मू एवं कश्मीर राज्य पर्यटकों के लिए सदा ही आकर्षण का केंद्र रहा है। जम्मू एवं श्रीनगर के मध्य सड़क यात्रा के दौरान पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से सम्मोहित हो जाते हैं। हालांकि इस यात्रा का एक दूसरा पक्ष यह है कि जम्मू एवं श्रीनगर राजमार्ग बहुत लंबा एवं घुमावदार सड़कों से युक्त है जिसके कारण पर्यटकों को सड़क मार्ग से यात्रा के दौरान कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है, साथ ही सर्दियों में भारी बर्फबारी की वजह से यह मार्ग अवरुद्ध हो जाता है जिसके कारण श्रीनगर का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। बहरहाल, अब चेनानी-नाशरी सुरंग के उद्घाटन से इस मार्ग पर यात्रा न केवल आरामदायक हो जाएगी, बल्कि यात्रा में लगने वाले समय की भी बचत होगी।
  • चेनानी-नाशरी सुरंग : राष्ट्र को समर्पित
    2 अप्रैल, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू एवं कश्मीर स्थित ‘चेनानी-नाशरी सुरंग’ (Chenani-Nashri Tunnel) को राष्ट्र को समर्पित किया। यह सुरंग 286 किमी. लंबे जम्मू एवं श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) के चौड़ीकरण की परियोजना का अंग है। इस सुरंग का निर्माण कार्य 23 मई, 2011 को प्रारंभ हुआ था। यह सुरंग 3720 करोड़ रु. की लागत से बनकर तैयार हुई है।
  • देश की सबसे लंबी सुरंग
    9.2 किमी. लंबी चेनानी-नाशरी सुरंग ‘देश की सबसे लंबी सड़क सुरंग’ (India’s Longest Road Tunnel) है, साथ ही यह एशिया की सबसे लंबी ‘द्वि-दिशात्मक राजमार्ग सुरंग’ (Bi-directional Highways Tunnel) भी है। यह सुरंग जम्मू एवं कश्मीर के ऊधमपुर जिले में स्थित चेनानी को रामबन जिले स्थित नाशरी से जोड़ती है। इस सुरंग के निर्माण से जम्मू एवं श्रीनगर के बीच की दूरी 41 किमी. से घटकर 10.9 किमी. रह जाएगी। जिससे जम्मू एवं श्रीनगर के बीच की यात्रा में लगने वाला समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन 27 लाख रुपये मूल्य तक के ईंधन की बचत का भी अनुमान व्यक्त किया गया है।
  • सुरंग की संरचना
    चेनानी-नाशरी सुरंग की संरचना कुछ इस प्रकार की है कि इसमें लगभग 9.2 किमी. लंबी एवं दो-लेन वाली मुख्य सुरंग तो शामिल है ही, साथ ही इस मुख्य सुरंग के समानांतर इतनी ही लंबाई की एक ‘निकास सुरंग’ (Escape Tunnel) का निर्माण भी किया गया है। दरअसल, जब 1200 मीटर की ऊंचाई पर हिमालय की निचली पर्वत शृंखला में इस सुरंग की नींव पड़ी, तो इंजीनियरों के सामने बिना पहाड़ को नुकसान पहुंचाए एक ऐसा रास्ता निकालने की चुनौती थी जो न सिर्फ दूरी कम करे बल्कि इससे गुजरने वाले यात्रियों के सफर को भी यादगार बना दे, परिणामस्वरूप 9.2 किमी. लंबी सुरंग के साथ-साथ उसके समानांतर एक छोटी सुरंग भी बनाने का निर्णय हुआ ताकि दुर्घटना आदि की स्थिति में छोटी सुरंग के जरिए बीच में फंसे किसी यात्री/वाहन को बाहर निकाला जा सके। बड़ी (मुख्य) सुरंग का व्यास 13 मीटर जबकि छोटी सुरंग का व्यास 6 मीटर है। दोनों सुरंगों को जोड़ने के लिए प्रत्येक 300 मीटर के अंतराल पर 29 रास्ते (Cross-passages) बनाए गए हैं। निकास सुरंग का प्रयोग केवल पैदल यात्रियों द्वारा ही किया जा सकेगा।
  • अन्य विशेषताएं
    यह सुरंग एक कुशल वायु-संचार प्रणाली (Ventilation System) से युक्त है। सुरंग में प्रत्येक 8 मीटर की दूरी पर ताजी हवा अंदर आने के लिए इनलेट (Inlet) बनाए गए हैं। हवा बाहर जाने के लिए भी प्रति 100 मीटर पर आउटलेट बनाए गए हैं।
    यह सुरंग एक ‘कुशल परिवहन तंत्र’ (Intelligent Traffic Mechanism) से लैस है और यह पूर्णतः स्वचालित (Fully Automatic) है, जिसके कारण इसके संचालन में मानवीय हस्तक्षेप आवश्यक नहीं है।
    सुरंग में अत्याधुनिक स्कैनर लगे हैं, ताकि ये सुरक्षा संबंधी किसी खतरे को भांप सकें।
    सुरंग में प्रति 150 मीटर पर एसओएस कॉल बॉक्स (SOS Call Box) लगे हैं, आपातकालीन स्थिति में यात्री इनका प्रयोग हॉट-लाइन की तरह कर सकेंगे।
    यह एक पर्यावरण-अनुकूल (Environment-Friendly) सुरंग है, इसके निर्माण के लिए पेड़ों को नहीं काटा गया है।
  • निष्कर्ष
    यह सुरंग केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ एवं ‘स्किल इंडिया’ पहलों का एक आदर्श उदाहरण है। स्किल इंडिया पहल के अनुसरण में जम्मू एवं कश्मीर के स्थानीय लोगों के कौशल विकास के पश्चात उन्हें इस सुरंग के निर्माण हेतु तैनात किया गया। इस परियोजना ने राज्य के 2000 से अधिक अकुशल एवं कुशल युवाओं को रोजगार प्रदान किया। इस परियोजना के निर्माण में संलग्न लगभग 94 प्रतिशत कार्यबल जम्मू एवं कश्मीर से ही था।
    जम्मू एवं ऊधमपुर से रामबन, बनिहाल एवं श्रीनगर तक जाने वाले यात्रियों को यह सुरंग सभी मौसम में एक सुरक्षित एवं आरामदायक मार्ग उपलब्ध कराएगी। अब वाहन चालकों को ट्रैफिक जाम से निजात के साथ घुमावदार पहाड़ी रास्ते से भी छुटकारा मिलेगा। उल्लेखनीय है कि अभी तक चेनानी से नाशरी तक का 41 किमी. लंबा रास्ता काफी टेढ़ा-मेढ़ा और जबर्दस्त चढ़ाई वाला था, जिस पर वाहन चलाने में काफी मुश्किल आती थी।
    इस सुरंग का संचालन प्रारंभ होने से कश्मीर घाटी में न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे तथा राज्य के विकास की गति भी तीव्र होगी।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा