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चतुर्थ द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2017-18

October 21st, 2017
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किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति वह उपकरण है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक तरलता तथा साख सृजन को नियंत्रित कर अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता को बनाए रखने तथा उच्च विकास दर के लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करता है। भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) वह प्राधिकृत संस्था है, जो अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता हेतु मौद्रिक नीति का प्रयोग करती है। वर्तमान में मौद्रिक नीति निर्माण का कार्य ‘मौद्रिक नीति समिति’ (Monetary Policy Committee : MPC) द्वारा किया जाता है। स्मरणीय है कि 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति’ का गठन ब्याज दर निर्धारण एवं नीति निर्माण को अधिक उपयोगी एवं पारदर्शी बनाने के लिए जून, 2016 में किया गया था।

  • 4 अक्टूबर, 2017 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली ‘मौद्रिक नीति समिति’ (Monetary Policy Committee : MPC) द्वारा ‘चतुर्थ द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य, 2017-18’ (Fourth Bi-Monthly Monetary Policy Statement, 2017-18) जारी किया गया।
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा जारी वर्तमान मौद्रिक नीति वक्तव्य, वित्तीय वर्ष 2017-18 की चतुर्थ तथा कुल सातवीं मौद्रिक नीति है।
  • मौद्रिक नीति समिति द्वारा जारी नीतिगत दरें निम्न हैं-
  • मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा घोषित चतुर्थ द्वैमासिक मौद्रिक नीति में ‘चलनिधि समायोजन सुविधा’ (LAF) के अंतर्गत नीतिगत दरों यथा-रेपो दर (Repo Rate), रिवर्स-रेपो दर (Re-Repo Rate), बैंक दर (Bank Rate) तथा एमएसएफ दर (MSF Rate) में कोई परिवर्तन न करते हुए इसे पूर्व स्तर पर ही बनाए रखा गया है।
  • आरक्षित अनुपातों सीआरआर (CRR) तथा एसएलआर (SLR) में भी कोई परिवर्तन न करते हुए पूर्व के स्तर 4 प्रतिशत एवं 20 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है।
  • अगस्त, 2017 के अनुमानों के अनुसार, दूसरी तिमाही के संबंध में मुख्य मुद्रास्फीति (Headline Moneyinflation) 3 प्रतिशत अनुमानित था जबकि वर्ष 2017-18 की दूसरी छमाही के लिए यह अनुमान 4-4.5 प्रतिशत था।
  • लेकिन ऐसी संभावना है कि मुद्रास्फीति अपने वर्तमान स्तर से बढ़कर वर्ष की दूसरी छमाही में 4.2-4.6 प्रतिशत के बीच रहेगी।
  • वर्ष 2017-18 के लिए वास्तविक जीवीए (GVA) वृद्धि का अनुमान समान रूप से संतुलित जोखिम के साथ संशोधित करते हुए 6.7 प्रतिशत अनुमानित है।
  • जबकि अगस्त, 2017 में जारी मौद्रिक नीति में यह 7.3 प्रतिशत अनुमानित था।
  • मौद्रिक नीति वक्तव्य के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक जीएसटी (GST) के कार्यान्वयन से अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और इससे विनिर्माण क्षेत्र की संभावनाओं के संबंध में अल्पकालिक अनिश्चितता बनी है।
  • हालांकि एमपीसी (MPC) का यह भी मानना था कि हाल के दिनों में किए गए विभिन्न प्रकार के ढांचागत सुधारों से आर्थिक संवृद्धि में मध्यम और दीर्घकालिक तेजी आएगी क्योंकि इनसे कारोबारी माहौल में सुधार आएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था अधिकाधिक रूप से औपचारिक बनेगी।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 29 सितंबर, 2017 की स्थिति के अनुसार, 399.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति के सदस्य डॉ. चेतन घाटे, डॉ. पामी दुआ, डॉ. माइकल देबब्रत पात्रा, डॉ. विरल वी. आचार्य और डॉ. उर्जित पटेल मौद्रिक नीति के फैसले के पक्ष में थे।
  • जबकि डॉ. रविंद्र एच. ढोलकिया ने नीतिगत दर में .25 प्रतिशत की कमी के लिए मतदान किया।
  • एमपीसी (MPC) की अगली बैठक 5-6 दिसंबर, 2017 के मध्य तय की गई है।

लेखक-शिव शंकर तिवारी


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