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घोघा-दाहेज रो-रो फेरी सेवा

November 6th, 2017
ro-ro-ferry-service
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  • रो-रो फेरी
  • रो-रो (Ro-Ro) का पूर्ण रूप है-रोल-ऑन/रोल-ऑफ (Roll-on/Roll-off)।
  • वस्तुतः रो-रो फेरी (Ro-Ro Ferry) ऐसे विशेष प्रकार के पोत या जहाज होते हैं जो मुख्यतः पहिएयुक्त कार्गो (Wheeled Cargo) जैसे कारों, ट्रकों, सेमी-ट्रेलर ट्रकों, ट्रेलरों और रेलरोड कारों आदि की ढुलाई के लिए प्रयुक्त होते हैं।
  • इन पहियेयुक्त कार्गो को उनके पहियों पर चलाते हुए अथवा किसी प्लेटफॉर्म वाहन के जरिए जहाजों पर चढ़ाया अथवा उतारा जाता है।
  • बंदरगाहों पर माल (Cargo) को कुशलतापूर्वक लादने एवं उतारने के लिए ये पोत रैंप (Ramps) से युक्त होते हैं।
  • उल्लेखनीय है कि रो-रो पोत, लो-लो (Lo-Lo : Lift on-Lift off) पोतों से एकदम अलग हैं, जिनमें किसी माल को लादने या उतारने के लिए क्रेन (Crane) का प्रयोग किया जाता है।
  • रो-रो पोतों में कार्गो के साथ-साथ यात्रियों के लिए भी पर्याप्त स्थान होता है।
  • स्पष्ट है कि रो-रो फेरी सेवाएं समुद्री मार्ग से कार्गो एवं यात्रियों के परिवहन को सुगम बनाती हैं।
  • रो-रो फेरी सेवा के लाभ
  • पारंपरिक पोतों की तुलना में रो-रो फेरी पोत कई प्रकार से अधिक उपयोगी साबित होते हैं : –
    (i) परिवहन समय एवं लागत में कमी
    (ii) ईंधन खपत में कमी
    (iii) सड़कों पर जाम एवं दुर्घटनाओं में कमी।
    (iv) वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी।
  • उद्घाटन
  • 22 अक्टूबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोघा एवं दाहेज के मध्य रो-रो फेरी सेवा के चरण-1 का उद्घाटन किया।
  • इस फेरी सेवा से गुजरात के भावनगर जिले स्थित घोघा और दक्षिण गुजरात के भरूच जिले स्थित दाहेज के मध्य यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
  • ज्ञातव्य है कि घोघा एवं दाहेज, दोनों नगर खम्भात की खाड़ी के दो अलग-अलग किनारों पर बसे हैं।
  • वर्तमान में सड़क मार्ग द्वारा इन दोनों नगरों के बीच की दूरी 340 किमी. है, जिसे तय करने में लगभग 7 घंटे 10 मिनट का समय लगता है।
  • लेकिन रो-रो फेरी सेवा प्रारंभ होने के बाद समुद्री मार्ग द्वारा यह दूरी घटकर मात्र 31 किमी. रह गई है जिसे तय करने में लगभग 1 घंटे का समय लगेगा।
  • विशेषताएं
  • रो-रो फेरी सेवा के उद्घाटन के पश्चात घोघा से दाहेज तक की प्रथम यात्रा (Maiden Voyage) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पोत में सवार थे।
  • इस सेवा के पहले चरण में केवल यात्रियों (Passengers) को घोघा और दाहेज के मध्य पोत द्वारा आवागमन का अवसर प्राप्त हो सकेगा।
  • पूर्णतः परिचालित होने के पश्चात इस फेरी सेवा से वाहनों का आवागमन भी संभव हो सकेगा।
  • गुजरात में रो-रो परियोजना घोघा एवं दाहेज टर्मिनलों के मध्य एक बार में अधिकतम 100 वाहनों (कार, बस, ट्रक इत्यादि) एवं 250 यात्रियों के परिवहन में समर्थ होगी।
  • इस फेरी सेवा परियोजना को ‘गुजरात मैरीटाइम बोर्ड’ (Gujrat Maritime Board) द्वारा विकसित एवं कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • एस्सार प्रोजेक्ट्स (Essar Projects) ने घोघा एवं दाहेज बंदरगाहों पर रो-रो टर्मिनलों को निर्मित एवं डिजाइन किया है।
  • सर्वप्रथम दो पोतों यथा ‘एम.वी जय सोफिया’ तथा ‘आइलैंड जेड’ (Island Jade) द्वारा रो-रो फेरी सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
  • इस परियोजना की कुल लागत 615 करोड़ रुपये है।
  • केंद्र सरकार ने सागरमाला पहल के तहत घोघा एवं दाहेज दोनों स्थानों पर निकर्षण (Dredging) कार्य के लिए 117 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
  • गुजरात में रो-रो फेरी सेवा की संभाव्यता
  • अपनी लंबी तटरेखा (Coastline) और दो खाड़ियों (खम्भात की खाड़ी एवं कच्छ की खाड़ी) द्वारा राज्य को तीन खंडों में विभाजित किए जाने के कारण गुजरात रो-रो फेरी सेवा के संचालान के लिए आदर्श स्थान है।
    उल्लेखनीय है कि गुजरात की तटरेखा लगभग 1600 किमी. लंबी है जो देश में सर्वाधिक है।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा


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