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कांगो इबोला मुक्त घोषित

July 27th, 2017
Congo ebola free declared
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इबोला वायरस रोग (Ebola Virus Disease), जिसे पहले ‘इबोला रक्तस्रावी बुखार’ (Ebola Haemorrhagic Fever) कहा जाता था, एक घातक बीमारी है। इस बीमारी का कारण फाइलोवायरस परिवार (Filovirus Family) का सदस्य इबोला वायरस है। वर्ष 1976 में पहली बार कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला नदी के किनारे स्थित यांबुकु (Yambuku) गांव में और सूडान में इबोला वायरस की पहचान की गई। इबोला नदी के नाम पर ही इस वायरस का नामकरण इबोला वायरस किया गया था। ऐसा माना जाता है कि फ्रूट बैट (Fruit Bats) इबोला वायरस के वाहक हैं। मई, 2017 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस रोग का प्रकोप होने के पश्चात हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस देश को इबोला मुक्त घोषित किया।

  • 2 जुलाई, 2017 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) को इबोला वायरस रोग (EVD) के प्रकोप से मुक्त घोषित किया गया।
  • यह घोषणा इबोला वायरस रोग से पीड़ित अंतिम व्यक्ति के दूसरे नकारात्मक परीक्षण के 42 दिन बाद की गई।
  • उल्लेखनीय है कि मई, 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के ‘बैस-यूले’ (Bas-Uele) प्रांत में इबोला वायरस रोग का प्रकोप घोषित किया गया था।
  • वर्ष 1976 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में वायरस की खोज के पश्चात यह 8वां इबोला वायरस रोग का प्रकोप है।
  • इसके पहले इस देश में वर्ष 1976-77, 1995, 2007, 2008-09, 2012 एवं 2014 में इबोला वायरस रोग प्रकोप हुआ था।
  • वर्ष 2014 में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के इक्वाएटर (Equateur) प्रांत में इबोला वायरस रोग का प्रकोप हुआ था जिसमें 49 लोगों की मृत्यु हुई।
  • वर्ष 2017 के इबोला वायरस रोग के प्रकोप से देश में 4 लोगों की मृत्यु हुई।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2013 में पश्चिम अफ्रीका (लाइबेरिया, गिनी एवं सिएरा लियोन) में इबोला वायरस रोग का प्रकोप हुआ था जिसमें 11,300 लोगों की मृत्यु हुई थी और अनुमानित 28,600 लोग संक्रमित हुए थे।
  • इबोला वायरस का संक्रमण संक्रमित पशुओं या संक्रमित मनुष्यों के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से होता है।
  • इबोला वायरस रोग के लक्षण भिन्न-भिन्न है जिसमें शुरुआती चरण में अचानक बुखार, तीव्र कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराबी सामान्य हैं।
  • विशिष्ट संक्रमण रोकथाम एवं नियंत्रण उपायों के माध्यम से लोग स्वयं को इबोला वायरस संक्रमण से बचा सकते हैं।
  • एक प्रायोगिक इबोला वैक्सीन ‘RVSV-ZEBOV’ को घातक इबोला ‘वायरस के खिलाफ अत्यधिक सुरक्षात्मक पाया गया है।
  • इस वैक्सीन का परीक्षण वर्ष 2015 में गिनी (Guinea) में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा किया गया था।

लेखक-नीरज ओझा


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