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ईरान में 12वें राष्ट्रपतीय चुनाव

July 10th, 2017
12th presidential election in Iran
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  • पृष्ठभूमि
    मध्य-पूर्व में स्थित ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति (यूरोप-एशिया के मध्य) के कारण प्राचीन समय से ही वैश्विक पटल पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्ष 1935 तक ‘फारस’ के नाम से प्रसिद्ध यह देश प्राचीन काल में महान साम्राज्यों की भूमि रहा है। वर्ष 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के पश्चात से इसे इस्लामिक गणराज्य घोषित किया गया जिसके शीर्ष नेता एक धार्मिक मौलाना होते हैं, जबकि देश का सबसे बड़ा अधिकारी एवं कार्यकारी प्रमुख राष्ट्रपति होता है जिसका निर्वाचन प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा किया जाता है। ईरान का राष्ट्रपति चुनाव न सिर्फ ईरानी समाज के लिए बल्कि विश्व जगत के लिए भी अनिश्चितता भरी दिलचस्पी का विषय रहता है। इस बार (वर्ष 2017 का) का चुनाव रुढ़िवादियों और सुधारवादियों के मध्य लड़ा गया। रुढ़िवादियों को पारंपरिक दृष्टिकोण का समर्थक माना जाता है जबकि सुधारवादी सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर आधुनिक दृष्टिकोण के समर्थक हैं। ईरान में संपन्न हुए 12वें राष्ट्रपति चुनाव ईरानी व्यवस्था के स्थायित्व पर मुहर लगाते हैं।
  • संबंधित तथ्य
  • 19 मई, 2017 को ईरान में 12वें राष्ट्रपति के निर्वाचन हेतु आम चुनाव कराए गए जिसमें 73.33 प्रतिशत मतदान हुआ।
  • 20 मई, 2017 को ईरान के आंतरिक मंत्रालय द्वारा घोषित किए गए चुनाव परिणाम में वर्तमान राष्ट्रपति एवं उदारवादी धार्मिक नेता डॉ. हसन रूहानी ने 57.14 प्रतिशत मत प्राप्त कर विजय प्राप्त की।
  • उन्हें देश भर में डाले गए कुल 41,366,085 मतों में से 23,636,652 मत प्राप्त हुए।
  • उन्होंने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी इब्राहिम रईसी (15,835,794 मत, 38.28%) को हराया।
  • ईरान के 12वें राष्ट्रपति चुनाव हेतु अप्रैल, 2017 में देश भर से कुल 1636 प्रत्याशियों ने अपना पंजीकरण करवाया था, जिसमें 137 महिलाएं शामिल थीं, परंतु ईरान की विद्वत परिषद अथवा शूरा परिषद (Guardian Council) द्वारा आवेदन पत्रों की जांच के पश्चात केवल 6 वैध उम्मीदवार ही चुनाव मैदान में रह गए।
  • योग्य घोषित 6 उम्मीदवारों में से दो उम्मीदवारों (मोहम्मद बागहीर गालिबांक एवं ईशाक जहानगिरि) ने अपना नाम वापस ले लिया।
  • राष्ट्रपति निर्वाचन से संबंधित संवैधानिक उपबंध
  • संविधान के अनुच्छेद 117 में प्रावधान है कि राष्ट्रपति चुनाव को जीतने के लिए उम्मीदवारों को कुल डाले गए मतों में से न्यूनतम 50 प्रतिशत + 1 मत प्राप्त करना अनिवार्य होता है।
  • यदि किसी भी प्रत्याशी को ये आवश्यक मत नहीं प्राप्त हो सके तो सबसे अधिक मत प्राप्त करने वाले दो उम्मीदवारों के बीच एक को चुनने हेतु पुनः मतदान कराने का प्रावधान है।
  • राष्ट्रपति के रूप में 4-4 वर्षों के अधिकतम दो कार्यकाल (8 वर्ष हेतु) के लिए कोई व्यक्ति राष्ट्रपति रह सकता है।
  • डॉ. हसन रूहानी
  • तेहरान विश्वविद्यालय से विधि स्नातक एवं ग्लास्गो विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड से विधि में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त डॉ. हसन रूहानी को देश भर के युवाओं एवं महिलाओं का जबर्दस्त समर्थन प्राप्त हुआ।
  • राष्ट्रपति रूहानी का प्रदर्शन (57.14% मत) और भी सराहनीय है क्योंकि ये चुनाव पूर्व राष्ट्रपति रफसंजानी की मृत्यु के पश्चात हुए हैं (वर्ष 2013 के चुनाव में इनका समर्थन प्राप्त था) जो कि उनकी बढ़ती हुई शक्ति का प्रतीक है।
  • अपने पहले कार्यकाल में रूहानी ने आरोपित आर्थिक प्रतिबंधों से ईरान की बर्बाद हुई अर्थव्यवस्था और बदतर हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सुधार करने में सफलता प्राप्त की है।
  • प्रमुख चुनौतियां
  • ईरान में एक पार्टी तंत्र है, विपक्षी दल नहीं है और संसद में रुढ़िवादी कट्टरपंथियों का वर्चस्व है। रुढ़िवादियों के मध्य रास्ता बनाना रूहानी जैसे सुधारवादी के लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य होगा।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की पश्चिम एशिया नीति भी एक चुनौती के रूप में उनके समक्ष उपस्थित है।
  • ईरान में बढ़ती बेरोजगारी तथा प्रतिबंधों के समाप्त होने के पश्चात भी अपेक्षित निवेश का न होना आदि।
  • भारतीय संदर्भ में परिणाम
  • भारत ने ईरान के राष्ट्रपति के तौर पर डॉ. हसन रूहानी के पुनः निर्वाचन का स्वागत किया है। भारत के लिए ईरान वाणिज्यिक और सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भी भारत को इसका सहयोग अपेक्षित है। डॉ. रूहानी के कार्यकाल में भारत-ईरान संबंध काफी प्रगाढ़ हुए हैं तथा उनका पुनः निर्वाचित होना भारत और ईरान को अपने संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।
  • निष्कर्ष
  • डॉ. रूहानी के पहले कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ईरान का पश्चिमी देशों के साथ परमाणु समझौता रहा जिसके तहत यूरोप और अमेरिका समेत संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया तथा विश्व पटल पर अलग-थलग पड़ रहे देश को मुख्य धारा में लाने में सफलता प्राप्त की है। इसका यह अर्थ नहीं है कि उनका दूसरा कार्यकाल कम चुनौतीपूर्ण होगा, परंतु यह उम्मीद की जा सकती है कि जिस प्रकार अपने पहले कार्यकाल में ईरान को गंभीर प्रतिबंधों से मुक्ति दिलाई है, उसी प्रकार अपने दूसरे कार्यकाल में वे व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सुधारों को क्रियान्वित करेंगे। वर्तमान समय में विश्व के समक्ष उपस्थिति चुनौतियों को देखते हुए, एक मजबूत, स्थिर, तटस्थ तथा विकास की ओर अग्रसर ईरान की आवश्यकता विश्व समुदाय को है।

लेखक-गौरभ श्रीवास्तव


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