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आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण असफल

October 25th, 2017
irnss-1h unsuccessful
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  • पृष्ठभूमि
    भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS : Indian Regional Navigation Satellite System) भारत द्वारा विकसित स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली है। इस प्रणाली को ‘नाविक’ (Navic) नाम दिया गया है। यह प्रणाली न केवल भारतीय प्रयोक्ताओं को बल्कि भारतीय सीमा के बाहर 1500 किमी. के दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों में सटीक स्थिति संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई है। अगस्त, 2017 में नाविक प्रणाली के 8वें उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच का प्रक्षेपण किया गया जो कि असफल रहा।
  • आईआरएनएसएस-1एच
  • 31 अगस्त, 2017 को भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी39 का 41वां प्रक्षेपण असफल रहा।
  • सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), शार, श्रीहरिकोटा के द्वितीय लांच पैड से प्रक्षेपित पीएसएलवी के इस प्रक्षेपण के माध्यम से भारत के 8वें नौवहन उपग्रह ‘आईआरएनएसएस-1एच’ (IRNSS-1H) को अंडाकार उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा (SUB-GTO : SUB-Geosynnchronous Transfer Orbit) में स्थापित किया जाना था।
  • प्रक्षेपण यान के ताप कवच (Heat Shield) के न खुलने के कारण उपग्रह ताप कवच के अंदर ही रह गया जिसके कारण यह प्रक्षेपण असफल हो गया।
  • रॉकेट के चौथे चरण में स्थित ताप कवच प्रक्षेपण के दौरान वातावरण के साथ घर्षण के कारण उत्पन्न अत्यधिक ताप से उपग्रह की रक्षा करता है।
  • आईआरएनएसएस-1एच
  • आईआरएनएसएस-1 एच भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली का 8वां उपग्रह था।
  • यह उपग्रह भू-मध्य रेखा पर 19.2 डिग्री झुकी हुई 284 किमी. की उपभू (Perigee) और 20650 किमी. की अपभू (Apogee) की उप-भूतुल्यकालिक अंतरण कक्षा में स्थापित किया जाना था।
प्रमुख तथ्य : आईआरएनएसएस-1एच
कक्षा _ 55 डिग्री पूर्व देशांतर पर 29 डिग्री झुकाव वाली भूतुल्यकालिक
उत्थापन द्रव्यमान _ 1425 किग्रा.
शुष्क द्रव्यमान _ 598 किग्रा.
भौतिक विस्तार _ 1.58 मीटर × 1.50 मी. × 1.50 मी.
विद्युत _ 1660 वॉट विद्युत उत्पन्न करने वाले दो सोलर पैनल, 90 एम्पियर/घंटा क्षमता वाली एक लीथियम आयन बैटरी
प्रणोदन _ 440 न्यूटन तरल एपोजी मोटर, बारह 22 न्यूटन थ्रस्टर
नियंत्रण प्रणाली _ जीरो मोमेंटम सिस्टम, रिएक्शन व्हील्स, मैग्नेटिक टॉर्कर्स आदि
समयावधि _ 10 वर्ष
  • आईआरएनएसएस-1 एच का प्रक्षेपण आईआरएनएसएस-1ए के बैक-अप (Back-up) के लिए किया गया था।
  • पीएसएलवी-सी39
  • आईआरएनएसएस-1एच के प्रक्षेपण हेतु ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के एक्सएल (XL) संस्करण पीएसएलवी-सी 39 का उपयोग किया गया था।
  • पीएसएलवी-सी39 की ऊंचाई 44.4 मी. और उत्थापन द्रव्यमान (Lift off Mass) 321 टन था।
  • यह ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान की 41वीं उड़ान थी।
  • वर्ष 1993 में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण की पहली उड़ान के विफल होने के पश्चात यह दूसरा अवसर है जब इस यान का प्रक्षेपण असफल हुआ।
  • पीएसएलवी के माध्यम से भारत के चंद्रयान-1, मंगलयान, एस्ट्रोसैट, रिसैट-1 और जीसैट-12 का सफल प्रक्षेपण किया गया था।
  • फरवरी, 2017 में पीएसएलवी के माध्यम से एकल मिशन के तहत 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया था।
  • नाविक : भारतीय क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली
  • भारतीय क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली को ‘नाविक’ (NAVIC : Navigation with Indian Constellation) नाम दिया गया है।
  • इस प्रणाली के तहत सात उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया है जिनमें शामिल हैं आईआरएनएसएस-1ए, 1बी, 1सी, 1डी, 1ई, 1एफ एवं 1जी।
  • यह प्रणाली दो प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराएगी, पहली मानक स्थिति निर्धारण सेवा (SPS) जो कि सभी प्रयोक्ताओं को उपलब्ध होगी और दूसरी प्रतिबंधित सेवा (RS) जो कि केवल प्राधिकृत उपभोक्ताओं को उपलब्ध होगी।
  • नाविक प्रणाली के उपयोग
  • स्थलीय, हवाई एवं महासागरीय दिशा-निर्देशन
  • आपदा प्रबंधन
  • वाहन टैकिंग एवं बेड़ा प्रबंधन
  • मोबाइल फोन के साथ एकीकरण
  • परिशुद्ध कालगणना
  • मानचित्रण और भूगणतीय आंकड़ा अर्जन
  • पैदल यात्रियों और पर्यटकों के लिए स्थलीय दिशा-निर्देशन सहायता
  • चालकों के लिए दृश्य व श्रव्य दिशा-निर्देशन की सुविधा
  • निष्कर्ष
    भले ही 31 अगस्त, 2017 का ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान का प्रक्षेपण असफल हो गया हो किंतु इस तथ्य को नजर-अंदाज नहीं किया जा सकता कि पीएसएलवी विश्व के सबसे भरोसेमंद उपग्रह प्रक्षेपण यानों में से एक है। इसरो ने पीएसएलवी के माध्यम से जून, 2017 तक 48 भारतीय और 209 विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जा चुका है।

लेखक-नीरज ओझा


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