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असगर्डिया-1 उपग्रह

December 29th, 2017
Asgardia-1 satellite

12 अक्टूबर, 2016 को रूसी वैज्ञानिक एवं व्यवसायी डॉ. इगोर अशर्बेली (Dr.Igor Ashurbeyli) ने अंतरिक्ष आधारित आभासी राष्ट्र ‘असगर्डिया’ (Asgardia) के प्रारंभ की घोषणा की। इस देश का नामकरण प्राचीन नॉर्स (Norse) पौराणिक कथाओं में वर्णित आसमान स्थित शहर ‘असगर्ड’ (Asgard) के नाम पर किया गया है। असगर्डिया का लक्ष्य अंतरिक्ष का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना, अंतरिक्ष खतरों से पृथ्वी ग्रह की रक्षा करना और अंतरिक्ष में असैन्यीकृत एवं निःशुल्क वैज्ञानिक ज्ञान के आधार का निर्माण करना है। असगर्डिया का संविधान स्वीकार किया जा चुका है। इसकी क्रिप्टोकरेंसी ‘सोलर’ (Solar) यूरोपीय संघ बौद्धिक संपदा कार्यालय में पंजीकृत है। असगर्डिया में सरकार के गठन की प्रक्रिया जारी है। हाल ही में इस आभासी देश के पहले उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया।

  • 12 नवंबर, 2017 को अंतरिक्ष राष्ट्र असगर्डिया (Asgardia) के पहले उपग्रह ‘असगर्डिया-1’ का अंतरिक्ष में प्रक्षेपण वेलॉप्स उड़ान केंद्र (Wallops Flight Facility), वर्जीनिया, संयुक्त राज्य अमेरिका से किया गया।
  • असगर्डिया-1 उपग्रह ‘ऑर्बिटल एटीके साइग्नस अंतरिक्षयान’ (Orbital Atk Cygnus Spacecraft) के भीतर स्थित था जिसे एंटारेस (Antares) रॉकेट द्वारा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) के लिए प्रक्षेपित किया गया।
  • 6 दिसंबर, 2017 को साइग्नस द्वारा असगर्डिया-1 उपग्रह को निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित किया गया।
  • असगर्डिया-1 उपग्रह नैनो उपग्रहों की श्रेणी का क्यूबसैट (Cubesat) है।
  • उपग्रह का भार 2.8 किग्रा. है और इसमें 4 सोलर एरे तथा 8 बैटरियां लगी हैं।
  • उपग्रह में 0.5 टेराबाइट डाटा संग्रहीत है जिसमें असगर्डिया के वैधानिक दस्तावेज, राष्ट्रीय प्रतीकों और संविधान स्वीकार करने वाले सभी नागरिकों के आधारभूत आंकड़े शामिल हैं।
  • असगर्डिया-1 उपग्रह का निर्माण नियरस्पेस (Nearspace) द्वारा किया गया और अमेरिका के टेक्सास स्थित नैनोरैक्स एलएलसी (Nanoracks LLC) द्वारा प्रक्षेपण के लिए उपग्रह को एकीकृत एवं तैयार किया गया।
  • अनुमान है कि असगर्डिया-1 उपग्रह एक वर्ष से अधिक समय तक कार्यशील रहेगा।
  • उल्लेखनीय है कि क्यूबसैट 5 से 18 महीने तक कार्यशील रहते हैं।
  • ह्यूस्टन (Houston) स्थित ‘मिशन कंट्रोल सेंट्रल’ से असगर्डिया-1 उपग्रह का नियंत्रण किया जाएगा।

लेखक-नीरज ओझा

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