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INS कलवरी का सफल परीक्षण

The successful testing of the ins Kalvari

भारत की सीमाओं की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। भारत की तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण पर बल दिया जा रहा है। इसके लिए विश्व के कई देशों से रक्षा समझौते किए गए हैं। तीनों सेनाओं के लिए अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों, पनडुब्बियों के स्वदेशी संस्करण के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा रक्षा औजारों की खरीद के साथ-साथ तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से स्वदेशी संस्करण विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रोजेक्ट-75 शुरू किया गया है। प्रोजेक्ट-75 के तहत छः स्कॉर्पियन पनडुब्बियों का विकास किया जाना है। इस प्रोजेक्ट को पूर्ण करने का उत्तरदायित्व माझगांव डॉक लिमिटेड शिपबिर्ल्ड्स मुंबई को दिया गया है। माझगांव डॉक लिमिटेड द्वारा इससे पूर्व कई जंगी पोतों एवं पनडुब्बियों का विकास किया जा चुका है। कलवरी पनडुब्बी प्रोजेक्ट-75 के अंतर्गत विकसित प्रथम स्कॉर्पियन पनडुब्बी है जिसका सफल परीक्षण संपन्न हुआ है। आईएनएस कलवरी वर्ष 2017 तक नौसेना को प्राप्त हो जाएगी। इससे भारतीय जल क्षेत्र में सुरक्षात्मक अभियानों की सफलता में वृद्धि हेागी।

  • 1 मई, 2016 को स्कॉर्पियन श्रेणी की स्वदेश निर्मित प्रथम पनडुब्बी ‘कलवरी’ का समुद्री परीक्षण किया गया।
  • इस पनडुब्बी का निर्माण माझगांव डॉक शिपबिर्ल्ड्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा किया गया है।
  • कलवरी पनडुब्बी का प्रथम समुद्री परीक्षण 1000 घंटे तक चला। इस दौरान इसके संचालन शक्ति का परीक्षण किया गया।
  • कलवरी के इस परीक्षण के तहत संचालन शक्ति, सहायक उपकरणों एवं प्रणालियों, नेविगेशन सहायता, संचार उपकरण और स्टीयरिंग गियर के कई प्रारंभिक परीक्षण किए गए।
  • कलवरी प्रोजेक्ट-75 के तहत विकसित की जाने वाली छः स्कॉर्पियन पनडुब्बियों की शृंखला की प्रथम पनडुब्बी है।
  • यह पनडुब्बी निर्देशित हथियारों से छुपकर हमला करने की क्षमता से युक्त है।
  • इसके द्वारा जल के सतह पर अथवा पानी के नीचे एंटीशिप मिसाइलों व टारपीडो से हमला किया जा सकता है।
  • कलवरी सभी तरह के मौसमों में संचालित की जा सकती है।
  • यह पनडुब्बी कई प्रकार के मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। इनमें, पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतह रोधी युद्ध, सूचना संग्रहण, क्षेत्र निगरानी आदि शामिल हैं।
  • कलवरी स्कॉर्पियन पनडुब्बी एक विशेष प्रकार के इस्पात (स्टील) द्वारा निर्मित है जो उच्च तनाव सहने की क्षमता व उच्च तन्यता की विशेषता से युक्त है।
  • स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियों का विकास भारत सरकार एवं फ्रांस सरकार के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।
  • प्रोजेक्ट-75 के तहत विकसित स्कॉर्पियन पनडुब्बियों की कुल लागत लगभग 3.5 बिलियन डॉलर है।
  • फ्रांस की डीसीएनएस व भारत के माझगांव, डॉक लिमिटेड के मध्य तकनीकी हस्तांतरण के आधार पर माझगांव डॉक लिमिटेड द्वारा इन पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • ज्ञातव्य है कि भारत के पास प्रथम भारतीय पनडुब्बी कलवरी वर्ष 1967 से 1996 तक सेवा में कार्यरत थी।
  • कलवरी पनडुब्बी को अपनी विशेषताओं के कारण ‘टाइगर सार्क’ कहा जाता है।

लेखक-आश नारायण मिश्रा