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शिक्षा में लैंगिक असमानता का ई-एटलस

E-Atlas of sexual inequality in education

शिक्षा कौशल व्यवसाय, मानसिक, नैतिक और सौंदर्यविषयक उत्कर्ष पर केंद्रित है। इस प्रकार शिक्षा में असमानता यूनेस्को के गतिविधि संचालन की दृष्टि से एक अहम मुद्दा है और इसी मुद्दे को रेखांकित करता है, यूनेस्को द्वारा जारी नवीनतम ई-एटलस (e-Atlas)। ई-एटलस शृंखला ‘यूनेस्को सांख्यिकी संस्थान’ (UNESCO Institute for Statistics) द्वारा प्रकाशित की जाती है। यह शिक्षा के साथ ही विज्ञान, तकनीक, संस्कृति एवं संचार हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है। ई-एटलस में प्रस्तुत आंकड़े वार्षिक UIS शिक्षा सर्वेक्षण के परिणामों पर आधारित हैं, जिसमें 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों को शामिल किया गया है। UIS शिक्षा डेटाबेस प्रत्येक वर्ष जनवरी, मई और अक्टूबर में अद्यतन किया जाता है। यह शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानक वर्गीकरण पर आधारित है।

  • शिक्षा में लैंगिक असमानता का ई-एटलस यूनेस्को द्वारा 2 मार्च को जारी किया गया।
  • ई-एटलस में प्रस्तुत आंकड़े स्वतः (Autometically) अपडेट हैं।
  • इसमें UIS के नवीनतम आंकड़ों के द्वारा प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक लैंगिक अंतराल को प्रकट किया गया है।
  • विश्व में 6-15 वर्ष के बीच के प्रत्येक आठ बच्चों में से एक बुनियादी शिक्षा से वंचित है।
  • 63 मिलियन से अधिक लड़कियां विद्यालय से बाहर (Out of School) हैं और आंकड़े दर्शाते हैं कि ये संख्या बढ़ रही है।
  • आंकड़ों के अनुसार, 6-11 आयुवय की लगभग 16 मिलियन लड़कियों को कभी भी प्राथमिक विद्यालय में लिखने या पढ़ने का अवसर नहीं प्राप्त होगा (यदि वर्तमान प्रवृत्तियां जारी रहीं)।
  • लड़कों के संदर्भ में यह आंकड़ा 8 मिलियन का है।
  • लिंग असमानता अरब राज्य (Arab States), उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण व पश्चिम एशिया में सबसे अधिक है।
  • UIS आंकड़ों के अनुसार, उप-सहारा अफ्रीका में 5 मिलियन लड़कों की तुलना में 9.5 मिलियन लड़कियां कभी किसी कक्षा (Classroom) में प्रविष्ट नहीं होंगी।
    इस क्षेत्र में 6-11 आयुवय के कुल 30 मिलियन से अधिक बच्चे विद्यालय से बाहर हैं।
  • लैंगिक अंतराल दक्षिण-पश्चिम एशिया में व्यापक है। यहां विद्यालय से बाहर कुल लड़कियों में से 80 प्रतिशत लड़कियां, 16 प्रतिशत (विद्यालय से बाहर कुल लड़कों का) की तुलना में कभी भी औपचारिक शिक्षा में प्रविष्ट नहीं होंगी।
  • यह स्थिति दक्षिण-पश्चिम एशिया में 4 मिलियन लड़कियों और 1 मिलियन लड़कों को प्रभावित करती है।
  • ई-एटलस में प्रयुक्त पद ‘विद्यालय जीवन प्रत्याशा’ (School Life Expectancy) स्कूली शिक्षा की औसत अवधि (वर्ष) को इंगित करता है।
  • SLE में लैंगिक अंतराल को कम करने में सबसे अधिक प्रगति दक्षिण-पश्चिम एशिया ने किया है।
  • यहां लड़कियों की शिक्षा अवधि (Duration of Education) 11 वर्ष है जो वर्ष 1990 में केवल 6 वर्ष थी।
  • जबकि लड़कों के लिए SLE 12 वर्ष है।
  • उप-सहारा अफ्रीका और अरब राज्यों में लड़कियों के लिए SLE क्रमशः 9 एवं 12 वर्ष है।
  • दोनों ही क्षेत्रों में लड़कों का SLE क्रमशः 10 एवं 13 वर्ष है।
  • पूर्वी-एशिया और पैसिफिक क्षेत्र में वर्ष 1990 और 2013 के बीच लड़कियों के SLE में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नतीजतन, अब प्राथमिक शिक्षा में दाखिला लेने वाली एक लड़की, लड़कों की ही भांति 13 वर्ष विद्यालय में व्यतीत कर सकती हैं।
  • लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में लड़कियों ने शिक्षा के औसत 14 साल के साथ लड़कों (शिक्षा के औसत 13 साल) को पीछे छोड़ दिया है।
  • वैश्विक स्तर पर स्कूल से बाहर प्राथमिक शिक्षावय बच्चों की कुल संख्या का 52 प्रतिशत लड़कियां हैं। वर्ष 2000 के संदर्भ में यह आंकड़ा 58 प्रतिशत का है।
  • अफगानिस्तान में प्रत्येक 100 लड़कों की तुलना में केवल 70 लड़कियां ही प्राथमिक विद्यालय में नामांकित हैं।
  • प्राथमिक विद्यालय में नामांकन की असमानता वाले अन्य देश हैं-चाड (77 लड़कियां, 100 लड़कों पर), यमन (84 लड़कियां), पाकिस्तान (85 लड़कियां), नाइजर (86 लड़कियां) और जिबूती (87 लड़कियां)।
  • माध्यमिक स्तर पर, प्रत्येक पांचवें देश में किशोरवय लड़कियों का नामांकन दर लड़कों की तुलना में अधिक है।
  • जबकि किशोरवय लड़कों के अधिक नामांकन दर वाले देशों की संख्या 32 प्रतिशत है।
  • उप-सहारा अफ्रीका में माध्यमिक शिक्षा में दाखिला लेने वाली लड़कियों की संख्या 86 (प्रत्येक 100 लड़कों पर) है।
  • माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक समानता हासिल करने वाले देश हैं-अल्जीरिया, एंटीगुआ व बारबुडा, बेलीज, कंबोडिया, अल-साल्वाडोर, लेबनान और स्वाजीलैंड।
  • परंतु यही देश प्राथमिक स्तर पर यह उपलब्धि नहीं प्राप्त कर सके हैं।
  • वर्ष 2013 में, प्राथमिक शिक्षा में नामांकित 18 मिलियन लड़कों की तुलना में केवल 15 मिलियन लड़कियों ने ग्रेड (कक्षा) का दुहराव किया है।
  • इसी अवधि में 19 मिलियन लड़कों की तुलना में केवल 16 मिलियन लड़कियों ने प्राथमिक स्कूल से प्रस्थान (Dropped Out) किया।
  • इस प्रकार, लड़कियों के लिए प्राथमिक स्कूल तक पहुंच कठिन है परंतु जिन्होंने ऐसा कर लिया उनकी प्रगति लड़कों की तुलना में बेहतर है।
  • मोरक्को में प्राथमिक विद्यालय की अंतिम कक्षा में नामांकित 85 प्रतिशत लड़कियां सफलतापूर्वक माध्यमिक विद्यालय में पहुंची।
  • इस संदर्भ में मोजाम्बिक में 64 प्रतिशत, होंडुरास में 73 प्रतिशत, पाकिस्तान में 80 प्रतिशत एवं जॉर्जिया में 100 प्रतिशत लड़कियों ने प्राथमिक विद्यालय से माध्यमिक विद्यालय की ओर संक्रमण (Transition) किया।
  • प्राथमिक शिक्षा में महिला अध्यापकों का प्रतिशत (शीर्ष देश)-सेशेल्स 88 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका 79 प्रतिशत, लेसोथो 76 प्रतिशत, मॉरीशस 75 प्रतिशत और स्वाजीलैंड 70 प्रतिशत।
  • महिला अध्यापक (निम्न प्रतिशत वाले देश)-दक्षिण सूडान (12%), लाइबेरिया (14%), चाड (15%), टोगो (16%), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (20%), बेनिन (23%) और जिबूती (26%)।
  • नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, स्कूल से बाहर प्राथमिक विद्यालय आयुवय विद्यार्थियों की वैश्विक संख्या बढ़ रही है और वर्तमान में यह संख्या 59 मिलियन तक पहुंच गई है।
  • जिसमें 31 मिलियन लड़कियां हैं।
  • वर्ष 2013 में प्राथमिक विद्यालय आयुवय (6-11 वर्ष) प्रत्येक 10 में से 1 लड़की और प्रत्येक 12 में से एक लड़का विद्यालय से बाहर थे।
  • वर्ष 2013 में उपलब्ध 133 देशों के आंकड़ों के तीन-चौथाई में पुरुष स्नातकों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक थी।
  • विश्व में महिला शोधकर्ताओं की संख्या 28 प्रतिशत है।
  • लैटिन अमेरिकन और कैरेबियन क्षेत्र में महिला शोधकर्ताओं की हिस्सेदारी सर्वाधिक (44%) जबकि एशिया में 23 प्रतिशत है।
  • महिला शोधकर्ताओं की संख्या अर्जेंटीना, अज़रबैजान, बोलीविया, जॉर्जिया, कजाकिस्तान, लाटविया, लिथुआनिया, म्यांमार, न्यूजीलैंड, पैराग्वे, फिलीपींस, थाईलैंड और वेनेजुएला में पुरुष शोधकर्ताओं की संख्या से अधिक है।
  • वैश्विक स्तर पर 757 मिलियन वयस्क और 115 मिलियन युवा एक साधारण वाक्य (Simple Sentence) को पढ़ने या लिखने में असमर्थ हैं। इनमें भी दो-तिहाई महिलाएं हैं।
  • उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण तथा पश्चिम एशिया में साक्षरता दर सर्वाधिक है।
  • अरब राज्यों (Arab States) में वर्ष 1990 से 2013 के दौरान वयस्क साक्षरता दर 55 प्रतिशत से बढ़कर 78 प्रतिशत हो गई है जबकि इसी अवधि में युवा साक्षरता दर बढ़ कर 74 प्रतिशत से 91 प्रतिशत हो गई है।
  • यहां महिलाओं की वयस्क साक्षरता दर 70 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की 86 प्रतिशत।
  • 1990-2013 के दौरान ही दक्षिण और पश्चिम एशिया में वयस्क साक्षरता दर बढ़ कर 47 प्रतिशत से 68 प्रतिशत हो गई है। युवा साक्षरता दर 60 प्रतिशत से बढ़ कर 84 हो गई है।
  • इस क्षेत्र में 77 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 58 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं।
भारत के संदर्भ में ई-एटलस में प्रस्तुत आंकड़े
विद्यालय से बाहर बच्चे (प्राथमिक विद्यालय आयुवय) 19.1 मिलियन, रैंक – 167 देशों में तीसरी
विद्यालय से बाहर लड़कियां (प्राथमिक विद्यालय आयुवय) 13.4 मिलियन, रैंक – 158 देशों में तीसरी
प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक विद्यालय जीवन प्रत्याशा (पुरुष) 9.3 वर्ष, रैंक – 160 देशों में 121वीं
प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक विद्यालय जीवन प्रत्याशा (महिला) 7.3 वर्ष, रैंक – 160 देशों में 127वीं
प्राथमिक शिक्षा में समायोजित शुद्ध नामांकन दर (महिला) 76.6 प्रतिशत, रैंक – 158 देशों में 116वीं
प्राथमिक से लोअर सेकेंडरी सामान्य शिक्षा तक प्रभावी संक्रमण दर, लैंगिक समता सूचकांक 1, रैंक – 150 देशों में 123वीं
प्राथमिक शिक्षा में महिला अध्यापकों का प्रतिशत 35.6, रैंक – 192 देशों में 163वीं
उच्चतर शिक्षा में महिला अध्यापकों का प्रतिशत 37, रैंक – 147 देशों में 55वीं
सकल नामांकन अनुपात, प्राथमिक (महिला) 86.3 प्रतिशत, रैंक 191 देशों में 155वीं
वयस्क साक्षरता दर (महिला 15+ वर्ष) 33.7 प्रतिशत, रैंक 126 देशों में 111वीं

लेखक-पंकज पांडेय