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विशाखापत्तनम में जल के भीतर बंदरगाह रक्षा तकनीक का शुभारंभ

Underwater Defense Technology launched in Visakhapatnam port

यह निर्विवाद तथ्य है कि सभी राष्ट्रों की स्वतंत्रता एवं समृद्धि तथा विश्व की शांति एवं अखंडता समुद्रों एवं महासागरों की सुरक्षा एवं अखंडता पर निर्भर करती है। अविभाज्य समुद्रों की धारणा आज एक आर्थिक, सामाजिक व सामरिक जरूरत है। भारत के लिए हिंद महासागर में अपने भू-राजनीतिक, सामरिक और आर्थिक हितों को संरक्षित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। समुद्र से आर्थिक लाभ उठाना काफी हद तक हमारी उन क्षमताओं पर निर्भर करता है जिसके सहारे हम सामुद्रिक चुनौतियों से पार पा सकते हैं। समुद्र आधारित आतंकवाद की चुनौती क्षेत्रीय और वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए मुश्किलें पैदा करती रही हैं। आधुनिक दौर की चुनौतियों की व्यापकता व जटिलता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री स्थिरता दुनिया के सभी राष्ट्रों के लिए जरूरी है। विश्व भर के महासागरों के इर्द-गिर्द उभरती सामुद्रिक सुरक्षा चुनौतियों ने नौसेनाओं की जिम्मेदारियों को बहुत अधिक बढ़ा दिया है। भारतीय नौसेना इन चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र का विकास किया जा रहा है। भारतीय नौसेना के सुरक्षा तंत्र को स्वदेशी तकनीकी सुदृढ़ता भी प्रदान की जा रही है। इसी परिप्रेक्ष्य में नौसेना द्वारा ‘विशाखापत्तनम में जल के अंदर सामुद्रिक सुरक्षा तकनीक’ स्थापित की गई है।

  • 10 मई, 2016 को भारतीय नौसेना द्वारा विशाखापत्तनम डाकयार्ड में निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए हार्बर रक्षा प्रणाली का शुभारंभ किया गया।
  • हार्बर रक्षा प्रणाली का उद्घाटन नौसेना के वाइस एडमिरल एच.सी.एस. विष्ट द्वारा किया गया।
  • इस हार्बर रक्षा प्रणाली के अंतर्गत ‘एकीकृत जलमग्न हार्बर रक्षा और निगरानी प्रणाली’ (Intregrated Underwater Harbour Defence and Surveillance System-IUHDSS) एवं ‘माइन वारफेयर डाटा सेंटर’ (Mine Warfare Data Centre-MWDC) स्थापित किए गए हैं।
  • इस हार्बर रक्षा प्रणाली से नौसेना की निगरानी क्षमता में वृद्धि होगी तथा सुरक्षा खतरों से निपटने में सहायता मिलेगी।
  • ये दोनों रक्षा प्रणालियां आंध्र प्रदेश नौसेना ऑफिस-इन-चार्ज कोमोडोर संजीव इस्सर के अधीन कार्यरत रहेंगी।
  • एकीकृत जलमग्न हार्बर रक्षा एवं निगरानी प्रणाली (आईयूएचडीएसएस) एक मल्टीसेंसर प्रणाली है जो विशाखापत्तनम बंदरगाह के किसी भी खतरे को भांपकर उसका पता लगाने, चेतावनी जारी करने एवं रक्षा उपकरणों को सचेत करने में समर्थ है।
  • माइन वारफेयर डाटा सेंटर (एमडब्ल्यूडीसी) नौसेना के जहाजों से डाटा एकत्रित, विश्लेषित एवं वर्गीकृत करेगी।
  • यह हार्बर रक्षा प्रणाली पूर्वी समुद्री सीमा के सभी हार्बर एवं पूर्वी पोत की जलमग्न रक्षा प्रणाली का नोडल केंद्र होगा।
  • ‘स्टेट ऑफ आर्ट’ (State of Art) उपकरणों, तकनीकों अथवा वैज्ञानिक क्षेत्र के विकास की उच्चतम स्तर को प्रदर्शित करने वाला शब्द समूह है।
  • ज्ञातव्य है कि भारत में सर्वप्रथम हार्बर सुरक्षा तकनीक कोच्चि डॉकयार्ड में स्थापित की गई थी। इस तकनीक का विकास इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा किया गया है।

लेखक-आश नारायण मिश्रा