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रेड फ्लैग अभ्यास में भारतीय वायु सेना की भागीदारी

IAF's participation in Red Flag exercises

वर्तमान में विश्व के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है। आतंकी संगठनों इस्लामिक स्टेट व बोको हराम का निरंतर प्रसार होता जा रहा है। इन आतंकवादी संगठनों के अमानवीय गतिविधियों से पूरा विश्व समुदाय चिंतित है। इस संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए सभी देशों को आपसी सहयोग व समझ बढ़ाने का आह्वान किया है। इन आतंकवादी संगठनों पर कई यूरोपीय देशों ने मिलकर हवाई हमले किए हैं। अरब के देशों ने भी संयुक्त होकर आई एस के विरुद्ध लड़ने का आह्वान किया है। ऐसे में इन सेनाओं के मध्य आपसी समझ व ताल-मेल का होना आवश्यक है। इसलिए कई देशों के मध्य संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं। भारत की तीनों सेनाओं द्वारा भी प्रति वर्ष विभिन्न देशों के साथ संयुक्त अभ्यास होते रहते हैं। इससे भारतीय सेनाओं की दक्षता व कौशल में निरंतर प्रगति हो रही है और भारतीय सेनाएं उच्च स्तर प्राप्त करती जा रही हैं। इसी कड़ी में भारतीय वायु सेना ने अमेरिका के रेड फ्लैग सैन्य अभ्यास में भागीदारी की है। रेड फ्लैग अभ्यास अमेरिकी वायु सेना का सैन्य अभ्यास है जो अलास्का में आयोजित किया जाता है।

  • रेड फ्लैग अलास्का 16-1, एक उन्नत हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास है।
  • इस युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास का आयोजन संयुक्त राज्य अमेरिका के अलास्का स्थित एल्सन एयरफोर्स बेस में 28 अप्रैल से 13 मई, 2016 के मध्य किया गया।
  • इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायु सेना (IAF), संयुक्त राज्य वायु सेना (USAF) व संयुक्त राज्य नौसेना (USN) के लड़ाकू एवं सहायक भूमिका वाली टीमों ने हिस्सा लिया।
  • रेड फ्लैग अलास्का 16-1, अभ्यास में भारतीय वायु सेना के दल का नेतृत्व कैप्टन एच. अस्सुदानी ने किया।
  • इस युद्धाभ्यास में शामिल वायु सेना की टीमों को दो भागों में बांटा गया था- रेड फोर्स व ब्लू फोर्स।
  • रेड फोर्स को रक्षक बल की भूमिका और ब्लू फोर्स को आक्रमणकारी भूमिका निभानी थीं।
  • भारतीय वायु सेना को यूएसएएफ के अन्य सेना के साथ ब्लू फोर्स में शामिल किया गया था।
  • इस युद्धाभ्यास में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान एसयू-30 एमकेआई एवं जगुआर डरिन II (Jaguar Darin II) ने भाग लिया।
  • पिछले एक दशक से अधिक समय से भारतीय वायु सेना सक्रिय रूप से अलग-अलग देशों की ओर से आयोजित हवाई परिचालन प्रशिक्षण अभ्यास में हिस्सा लेती आ रही है। इससे भारतीय वायु सेना की क्षमताओं का मूल्यांकन होता रहता है।
  • इस अभ्यास के भारतीय सेना के निदेशक सौमित्र तमस्कर थे।

लेखक-आश नारायण मिश्र