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राफेल विमान समझौते को मंजूरी

December 27th, 2016
Rafael aircraft agreement approved
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23 सितंबर, 2016 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्री ‘मनोहर परर्िकर’ तथा फ्रांस के रक्षा मंत्री ‘ज्यां यीव्स ली द्रियान’ ने 7.87 बिलियन यूरो (59000 करोड़ रु.) में 36 राफेल विमानों की खरीद संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किया। इसके पूर्व नवंबर, 1996 में भारत ने रूस से 50 निर्मित सुखोई-30MKI विमानों की खरीद का समझौता किया था।
भारतीय वायु सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अप्रैल, 2015 में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा, उड़ने लायक तैयार राफेल विमानों को फ्रांस से सीधे खरीदने की घोषणा के 17 माह बाद कड़े मोल-भाव पर यह समझौता हस्ताक्षरित किया गया।

  • राफेल विमानों का निर्माण फ्रांसीसी विमान निर्माता कंपनी ‘डेसाल्ट एविएसन’ व हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
  • इस समझौते में भारत द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत ऑफसेट प्रावधान/नीति पर फ्रांस सहमत हो गया है, जिससे भारत में 3 अरब यूरो का रोजगार भी सृजित होगा।
ऑफसेट नीति

भारत में यह नीति पहली बार रक्षा खरीद प्रक्रिया वर्ष 2000 में अपनाई गई थी, जिसके अंतर्गत विदेशी कंपनियों को अपने करार का एक निर्धारित हिस्सा भारत में निवेश करना होता है अर्थात विदेशी कंपनियों को विमान सौदे का एक हिस्सा भारतीय कंपनियों के सहयोग से भारत में ही निर्मित करना है।

  • राफेल दोहरे इंजनों वाला बेहद शक्तिशाली, बहुपयोगी लड़ाकू विमान है।
  • यह सभी युद्धक अभियानों को अंजाम देने जिसमें हवाई सुरक्षा, दुश्मन के विमानों को रोकने व नष्ट करने, जमीनी सहायता, घातक हवाई हमला करने, खुफिया निगरानी तथा जलयान रोधी हवाई हमले व नाभिकीय निवारण में सक्षम है।
  • विशेषतः नाभिकीय हथियारों की आपूर्ति के लिहाज से ‘राफेल विमानों’ को मिराज-2000 के स्थान पर तैनात किया जाएगा।
  • एक राफेल विमान की कीमत औसतन 1600 करोड़ रु. है।
  • राफेल विमान की विशेषताएं
  • अधिकतम गति 1180 मील/घंटा या 2130/ किमी./घंटा।
  • दो, स्नेक्या M88-2 इंजन व स्टेल्थ तकनीक से निर्मित।
  • 1 मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई हासिल करने में सक्षम।
  • 24000 किग्रा. भार के साथ उड़ान भरने में सक्षम।
  • मीटिअर रडार द्वारा निर्देशित बियांड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, जिसकी रेंज 150 किमी. होगी।
  • नाभिकीय बम ले जाने में सक्षम।
  • उल्लेखनीय है कि भारत अपनी सामरिक जरूरतों के लिहाज से राफेल विमानों में पर्याप्त परिवर्तन भी कर रहा है जो भारतीय मानसून व भू-भाग के अनुकूल होगा।
  • पांचवीं पीढ़ी का यह लड़ाकू विमान चौथी पीढ़ी के एकल इंजन वाले लड़ाकू विमान F-16 से बेहतर है।

लेखक-विक्रम प्रताप सिंह


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