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रक्षा प्रदर्शनी, 2016

Defexpo 2016

स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011-15 के दौरान भारत विश्व का शीर्ष शस्त्र आयातक देश रहा है। इस दौरान विश्व के कुल शस्त्र आयातों में इसका हिस्सा 14 प्रतिशत है। स्पष्ट है भारत अपनी राष्ट्रीय आय का एक बड़ा हिस्सा शस्त्रों के आयात पर व्यय करता है। इस दृष्टि से शस्त्रों के उत्पादन में भारत का आत्मनिर्भर होना आवश्यक प्रतीत होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 28-31 मार्च, 2016 को दक्षिण गोवा के क्यूपेम तालुका के नाक्यूरी क्विटोल में ‘रक्षा प्रदर्शनी, 2016′ (Defence Expo, 2016) का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ की भावना के साथ रक्षा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।

  • थल सेना, नौसेना एवं आंतरिक सुरक्षा प्रणाली आदि विषयों पर प्रत्येक दो वर्ष में रक्षा प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है।
  • यह पहला वर्ष है जब रक्षा प्रदर्शनी का आयोजन दिल्ली से बाहर किया गया।
  • चार दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का आयोजन रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के रक्षा प्रदर्शनी संगठन द्वारा किया गया।
  • प्रदर्शनी का उद्घाटन 28 मार्च, 2016 को रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने किया।
  • इस वर्ष रक्षा प्रदर्शनी में 47 देशों ने हिस्सा लिया जबकि वर्ष 2014 की रक्षा प्रदर्शनी में 30 देशों ने हिस्सा लिया था।
  • रक्षा प्रदर्शनी, 2014 की 624 कंपनियों के मुकाबले रक्षा प्रदर्शनी, 2016 में देशी एवं विदेशी दोनों तरह की 1055 कंपनियों ने हिस्सा लिया।
  • रक्षा प्रदर्शनी, 2016 के उद्घाटन समारोह में ही रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने नई ‘रक्षा खरीद नीति’ (DPP) की घोषणा की।
  • नई रक्षा खरीद नीति में रक्षा सौदों में पारदर्शिता एवं तेजी लाने तथा मेक इन इंडिया पर विशेष जोर दिया गया।
  • नई रक्षा खरीद नीति से भारत की रक्षा उपकरणों के आयातों पर निर्भरता कम होगी तथा इन उपकरणों की खरीद देश में ही की जा सकेगी।
  • प्रदर्शनी में रक्षा मंत्री ने पुणे स्थित ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) के ‘अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान’ (अभियांत्रिकी) के प्रयासों से विकसित और डिजाइन किए गए सोनार डोम को हरी झंडी दिखाई।
  • सोनार डोम समुद्र के भीतर शत्रुओं की निगरानी का कार्य करेगा। सभी पनडुब्बीरोधी युद्धक जहाज इसके दायरे में आएंगे।
  • रक्षा प्रदर्शनी, 2016 में डीआरडीओ के मंडप का डिजाइन विषय ‘भविष्यवाद का उदय’ था।
  • डीआरडीओ का भविष्यवाद भारत को विश्व स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के आधार के तौर पर स्थापित करके समृद्ध बनाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रणालियों एवं समाधान के साथ लैस करके अपनी रक्षा सेवाओं में निर्णायक बढ़त प्रदान करने की अपनी दृष्टि पर जोर देता है।
  • इस बार रक्षा प्रदर्शनी में डीआरडीओ द्वारा अपने बेहतरीन उत्पादों का सजीव प्रदर्शन किया गया।
  • इन उत्पादों में एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम, हल्का लड़ाकू विमान तेजस, अर्जुन एमबीटीएम I & II, पहिएदार बख्तरबंद प्लेटफार्म, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर प्रणाली, रडार बीएलटी-72 ब्रिजिंग प्रणाली आदि शामिल थे।
  • चार दिवसीय रक्षा प्रदर्शनी में सेमिनारों का आयोजन भी किया गया। जिसका मुख्य विषय वैश्विक रक्षा आपूर्ति शृंखला, नौ पोत निर्माण तकनीक में विकास, रक्षा क्षेत्र के लिए मेक इन इंडिया, भारत-कोरिया रक्षा सहयोग, भारतीय सेना का आधुनिकीकरण आदि थे।
  • 31 मार्च, 2016 को रक्षा प्रदर्शनी को आम जनता के लिए खोला गया।
  • रक्षा प्रदर्शनी, 2016 ‘मेक इन इंडिया’ की रेखांकित थीम के साथ देश में अपने किस्म की विशालतम प्रदर्शनी रही।

लेखक-अतुल मणि त्रिपाठी