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पृथ्वी-II का सफल प्रक्षेपण

Prithvi-II the successful launch of

भारत के दिवंगत शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपनी आत्मकथा ‘अग्नि की उड़ान’ में लिखा है ‘‘जब भारत ने वर्ष 1974 में पहला परमाणु परीक्षण किया था तब हमने अपने आपको दुनिया के उन छः देशों में शामिल कर लिया था, जो परमाणु हथियार क्षमता से लैस थे। जब हमने एस.एल.वी.-III छोड़ा, तो भारत उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता हासिल कर लेने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। तो फिर हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले दुनिया के पहले या दूसरे देश कब बनेंगे?’’ इस रक्षा वैज्ञानिक की यह इच्छा 22 मई, 1989 को पूर्ण हुई जब ‘अग्नि’ मिसाइल का सफल तकनीकी प्रदर्शन प्रक्षेपण किया गया। इसी के साथ भारत असैनिक अंतरिक्ष कार्यक्रम से व्युत्पन्न रणनीतिक मिसाइल परीक्षण करने वाला पहला देश बन गया। किंतु इसके पहले ही 25 फरवरी 1988 को ‘पृथ्वी’ मिसाइल का परीक्षण किया गया जो भारत की स्वदेश में विकसित पहली बैलिस्टिक मिसाइल थी। पृथ्वी मिसाइल के तीन संस्करण हैं-पृथ्वी-I जो भारतीय थल सेना के लिए है जबकि पृथ्वी-II एवं पृथ्वी-III äमशः भारतीय वायु सेना एवं भारतीय नौसेना के लिए हैं। हाल ही में पृथ्वी-II मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया गया।

  • 18 मई, 2016 को स्वदेश में विकसित नाभिकीय सक्षम पृथ्वी-II मिसाइल का सामरिक बल कमान द्वारा सफल परीक्षण किया गया।
  • भारतीय सेना द्वारा पृथ्वी-II का प्रायोगिक परीक्षण ओडिशा में चांदीपुर परीक्षण रेंज से किया गया।
  • सतह-से-सतह तक मार करने में सक्षम पृथ्वी-II मिसाइल का परीक्षण ‘एकीकृत परीक्षण रेंज’ (ITR) के प्रक्षेपण परिसर-3 से सुबह 9.40 बजे किया गया।
  • पृथ्वी-II के लगातार दो परीक्षण करने की योजना थी किंतु पहले सफल परीक्षण के बाद दूसरे परीक्षण के विचार को तकनीकी समस्याओं के कारण त्याग दिया गया।
  • ध्यातव्य है कि 12 अक्टूबर, 2009 को पृथ्वी-II मिसाइल के लगातार दो सफल परीक्षण किए गए थे।
  • पृथ्वी-II का विगत परीक्षण 16 फरवरी, 2016 को किया गया था।
  • 350 किमी. मारक क्षमता वाली पृथ्वी-II मिसाइल 500 किग्रा. से 1000 किग्रा. परंपरागत या नाभिकीय युद्धशीर्ष ले जाने में सक्षम है।
  • पृथ्वी-II मिसाइल की लंबाई 8.56 मीटर, व्यास 1.1 मीटर और वजन 4600 किग्रा. है।
  • यह मिसाइल एकलचरणीय दो इंजनों से संचालित होती है जिसमें तरल प्रणोदन का उपयोग किया जाता है।
  • पृथ्वी-II मिसाइल ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) द्वारा भारत के प्रतिष्ठित ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के तहत विकसित पहली मिसाइल है।
  • वर्ष 2003 में पृथ्वी-II मिसाइल को भारत के सशस्त्र बलों में शामिल किया गया।

लेखक-नीरज ओझा