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परंपरागत चिकित्सा प्रणालियों के उन्नयन हेतु समझौता

Traditional medicine systems to upgrade agreement

प्राचीन संस्कृति आधारित चिकित्सा की प्रणालियां सदियों से स्वास्थ्य एवं जीवन रक्षा में सहायक साबित हुई हैं और 21वीं सदी में भी काफी विश्वसनीय साबित हो रही हैं। भारत को आयुष (आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की अतुलनीय विरासत प्राप्त है, जिनमें रोगों की रोकथाम तथा उपचार के लिए ज्ञान का अथाह भंडार है। वर्तमान एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति सर्वाधिक उपयोग में लाई जाने वाली चिकित्सा पद्धति है। परंतु एलोपैथिक दवाओं की बढ़ती कीमत व जीवन शैली में बदलाव के नकारात्मक प्रभाव और रसायन आधारित दवाओं के प्रतिकूल प्रभाव से लोग इस पद्धति से विमुख हो रहे हैं। इससे भारत एवं अधिकांश देशों में इससे इतर वैकल्पिक पद्धति से उपचार कराने का चलन बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा देश की स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष को पूरक के तौर पर स्थापित किए जाने का प्रयास चल रहा है। इसके साथ ही इसके व्यापारिक पहलू पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा पद्धति एवं जड़ी-बूटियों व प्राकृतिक औषधियों की मांग निरंतर बढ़ रही है। भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धति व प्राकृतिक औषधियों में समृद्ध देश है। इस दृष्टिकोण से सरकार का प्रयास राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से एलोपैथिक पद्धति से चिकित्सा उपलब्ध कराने वाले केंद्रों के साथ आयुष पद्धति को सह-स्थापित करने की है। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर आयुष पद्धति व प्राकृतिक औषधियों को वैश्विक ब्रांड बनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ ऐतिहासिक परियोजना सहयोग समझौता पर भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षर किया गया है।

  • 13 मई, 2016 को आयुष मंत्रालय, भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने परंपरागत और पूरक चिकित्सा में गुणवत्ता, सुरक्षा और सेवा प्रावधान की प्रभाविता को बढ़ावा देने में सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना सहयोग समझौता (PCA) पर हस्ताक्षर किए।
  • इसका उद्देश्य ‘परंपरागत और पूरक चिकित्सा रणनीति : 2014-2023’ के विकास और कार्यान्वयन में विश्व स्वास्थ्य संगठन की मदद करना है।
  • इस समझौते को ‘‘विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष, भारत 2016-2020 के परंपरागत और पूरक चिकित्सा के क्षेत्र में गुणवत्ता, सुरक्षा और सेवा प्रावधान की प्रभाविता को बढ़ावा देने के बारे में सहयोग’’ नामक शीर्षक दिया गया है।
  • वर्ष 2016-2020 अवधि के लिए पीसीए पहली बार योग में प्रशिक्षण के लिए तथा आयुर्वेद, यूनानी और पंचकर्म में प्रैक्टिस के लिए डब्ल्यूएचओ बेंचमार्क दस्तावेज प्रदान करेगा।
  • इस समझौते से परंपरागत चिकित्सा में चिकित्सा के विकास और शासन में भारत के समृद्ध अनुभव को मान्यता मिली है।
  • यह समझौता आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपाद येसो नाइक और डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. मार्गरेट चान की उपस्थिति में जिनेवा में हस्ताक्षरित किया गया।
  • ज्ञातव्य है कि वर्ष 1995 में निर्मित ‘भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी विभाग’ (ISMH) का नाम बदलकर वर्ष 2003 में आयुष विभाग कर दिया गया।
  • आयुष चिकित्सा पद्धति के महत्त्व को देखते हुए 9 नवंबर, 2014 को आयुष मंत्रालय का गठन किया गया।
  • आयुष में आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी शामिल है।
  • आयुष मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य मौजूदा अनुसंधान संस्थानों को मजबूत बनाने और एक समयबद्ध कार्यक्रम अनुसंधान सुनिश्चित करने के लिए रोगों की पहचान एवं प्रभावी उपचार है।
  • इसके साथ भारत में उपलब्ध औषधीय पौधों की पहचान व विकास कार्य किया जाएगा।

लेखक-आश नारायण मिश्रा