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नेमो-एम उपग्रह

NEMO-AM satellites

राष्ट्रीय विकास के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोग में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का उद्देश्य है। अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के लिए यंत्र बनाने, संगठित और निर्माण करने के लिए इसरो का अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। यह संस्थान इसरो के उपग्रह संचार, नौसंचालन, सुदूर संवेदन के उपयोग संबंधी कार्यक्रमों को क्रियान्वित करने के लिए उत्तरदायी है। ‘अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र’ (SAC) द्वारा सामाजिक हित से जुड़े अंतरिक्ष अनुप्रयोगों का संचालन किया जाता है जिनमें मौसम संबंधी पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, शिक्षा एवं प्राकृतिक संसाधनों की खोज जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इसी कड़ी में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा भारत एवं वैश्विक स्तर पर गंभीर होती जा रही वायु प्रदूषण की समस्या के निदान के लिए एक नैनो सैटेलाइट’ नेमो-एम’ का विकास किया जा रहा है। ‘नेमो-एम’ (NEMO-AM) (Nanosatellite for Earth Monitoring and Observation-Aerosol Monitering) उपग्रह भू-प्रेक्षण एवं वायुमंडल में उत्सर्जित कणों तथा एयरोसोल की निगरानी के लिए विकसित किया जा रहा है। इस नैनो उपग्रह का विकास कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय के स्पेटन फ्लाइट लैबोरेटरी तथा इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के सहयोग-समझौते के तहत किया जा रहा है।

  • नेमो-एम उपग्रह का विकास यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो इंस्टीट्यूट फॉर एयरो स्पेस स्टडीज के स्पेस फ्लाइट लैबोरेटरी (SFL) एवं इसरो के मध्य सहयोग-समझौते के तहत किया जा रहा है।
  • नेमो-एम उपग्रह जीएनबी तकनीक (Generic Nanosatellite Bus) के तहत विकसित किया जाने वाला पहला उपग्रह है।
  • जीएनबी तकनीक का विकास स्पेस फ्लाइट लेबोरेटरी (SFL) द्वारा किया गया है। एसएफएल नैनोसैटेलाइट के तकनीकी विकास से संबंधित अग्रणी संस्थान है।
  • नेमो-एम नई पीढ़ी का सूक्ष्म उपग्रह है जो वायु में उपस्थित एयरोसोल के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • नेमो-एम कम वजन का त्रि-ध्रुवीय उपग्रह है। यह अपने साथ एक बहुकोणीय द्वि-ध्रुवीय इमेजिंग सेंसर (Multi-Angle Dual Polari-sation Imaging Sensor-MADPIS) लेकर जाएगा जो ध्रुवीय रेडिएशन मापने का उपकरण है।
  • नेमो-एम उपग्रह सूर्य-समकालिक कक्षा में 500 किमी. की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।
  • यह उपग्रह अपने लक्ष्य पर सात भिन्न दृष्टिकोणों से नजर रखने में सक्षम है।
  • नेमो-एम उपग्रह का आयतन 70×60×30cm.3 है तथा इसका वजन 15 किग्रा. है।
  • नेमो-एम उपग्रह की विद्युत उत्पादन क्षमता 50 W है।
  • इस उपग्रह में 5-बैंड एंटीना लगा हैं जिसकी अपलिंक क्षमता 4 KbPS एवं डाटा डाउनलिंक क्षमता 2 MbPS है।
  • इसमें लगे कंप्यूटर की ऑन बोर्ड डाटा स्टोरेज क्षमता 1 GB है।
  • नेमो-एम उपग्रह प्रति दिन 80,000 वर्ग किमी. क्षेत्र को कवर कर सकता है।
  • इस उपग्रह में लगा प्रकाशीय उपकरण तीन बैंड (480-55 nm, 650-690 nm, 860-880nm) पर कार्य करेगा।
  • नेमो-एम उपग्रह का संचालन इसरो के ISTRAC (ISRO Telemetry, Tracking and Command Network) की शाखा MSCC (Multi-Mission Spacecraft Control Center) बंगलुरू द्वारा किया जाएगा।
  • नेमो-एम उपग्रह वायुमंडल में उत्सर्जित ठोस कण एवं एयरोसोल की निगरानी करेगा।
  • एयरोसोल एवं उत्सर्जित ठोस कण वाहनों एवं कारखानों की चिमनियों से उत्सर्जित होकर वायुमंडल में प्रवेश कर वायु प्रदूषण का कारण बनते हैं।
  • एयरोसोल एवं ठोस कण 10 माइक्रोमीटर तक के होते हैं जो फेफड़ों को क्षति पहुंचाते हैं।

लेखक-आश नारायण मिश्रा