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नाभिकीय सक्षम के-4 प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण

Successfully tests nuclear-capable missile k -4

भारत द्वारा परमाणु प्रतिरोधक क्षमता हासिल करने के लिए परमाणु शक्ति संतुलन-त्रय का विकास किया जा रहा है जिसमें स्थल, वायु एवं जल के अंदर से प्रक्षेपित किए जाने वाले प्रक्षेपास्त्र शामिल हैं। भारत ने स्थल एवं वायु से प्रक्षेपित किए जाने वाले प्रक्षेपास्त्रों की मजबूत शृंखला विकसित कर ली है जबकि जल के अंदर से प्रक्षेपित प्रक्षेपास्त्रों के विकास की दिशा में अग्रसर है। जल के अंदर पनडुब्बी से प्रक्षेपित प्रक्षेपास्त्रों के विकास के लिए ‘के-मिसाइल परिवार’ नामक परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना का कोड नाम मिसाइल मैन एवं दिवंगत भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। के-परिवार की मिसाइलों को स्वदेशी परमाणु सक्षम पनडुब्बी अरिहंत पर स्थापित किया जाएगा। इस परिवार की प्रथम मिसाइल ‘सागरिका’ है जिसका कोड नाम ‘के-15’ है। सागरिका के कई सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। सागरिका परमाणु सक्षम मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 750 किमी. है। जल के अंदर से प्रक्षेपित किए जाने वाले प्रक्षेपास्त्रों की मारक क्षमता के विस्तार के लिए के-4 मिसाइल का विकास किया गया है। के-4 की मारक क्षमता 3500 किमी. तक है। इसकी मारक क्षमता को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी अधिक है। इसलिए डीआरडीओ द्वारा गोपनीय रूप से इसका विकास एवं परीक्षण किया गया है।

  • के-4 एक परमाणु सक्षम पनडुब्बी प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइल (Submarine-Launched Balistic Missile-SLBM) है।
  • इसका विकास ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) द्वारा ब्लैक परियोजना (Black Project) के तहत गोपनीय रूप से किया गया है।
  • 31 मार्च, 2016 को बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम तटीय सीमा से 45 नाटिकल मील की दूरी पर अरिहंत पनडुब्बी से के-4 का सफल परीक्षण किया गया।
  • के-4 मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किमी. है।
  • के-4, 17 टन वजनी मिसाइल है तथा अपने साथ 2000 किग्रा. से अधिक परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है।
  • के-परिवार की मिसाइलों को अरिहंत पनडुब्बी पर तैनात किया जाएगा।
  • अरिहंत परमाणु सक्षम पनडुब्बी है। इस पर एक बार में 12 सागरिका (के-15) अथवा चार के-4 मिसाइलों को तैनात किया जा सकता है।

लेखक-आश नारायण मिश्रा

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