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अग्नि-I का सफल परीक्षण

Agni-1 successfully test-fired

वर्ष 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से एक ऐसे प्रक्षेपास्त्र के निर्माण की बात कही थी जिसकी मारक क्षमता चीन की मुख्य भूमि तक हो। अप्रैल, 2012 में 5000 किमी. से अधिक दूरी तक मारक क्षमता वाले प्रक्षेपास्त्र ‘अग्नि-V’ के सफल परीक्षण के उपरांत भूतपूर्व प्रधानमंत्री की इच्छा पूर्ण हुई। अग्नि-V प्रक्षेपास्त्र की सफलता की कहानी की शुरुआत होती है मई, 1989 में जब ‘अग्नि’ प्रक्षेपास्त्र का ‘तकनीकी प्रदर्शन’ (Technology Demonstration) के रूप में प्रथम परीक्षण किया गया जिसे सैन्य आयुध के रूप में शामिल किया जाना प्रस्तावित नहीं था। 20 मीटर लंबे द्विचरणीय (प्रथम चरण में ठोस प्रणोदक एवं द्वितीय चरण में द्रव प्रणोदक) प्रक्षेपास्त्र ‘अग्नि’ के दो अन्य परीक्षण मई, 1992 एवं फरवरी, 1994 के पश्चात स्थगित कर दिया गया।
वर्ष 1998 में भारत के पोखरण परमाणु परीक्षण के पश्चात पाकिस्तान द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की पृष्ठभूमि में ‘अग्नि’ कार्यक्रम को पुनः प्रारंभ किया गया। इसके तहत अग्नि के उन्नत संस्करण ‘अग्नि-II’ का सफल परीक्षण अप्रैल, 1999 में किया गया। उल्लेखनीय है कि अग्नि-II के पूर्व लघु दूरी के पृथ्वी-I (फरवरी, 1988) एवं पृथ्वी-II (जनवरी, 1996) प्रक्षेपास्त्र का परीक्षण किया जा चुका था।
वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत के पास उपलब्ध प्रक्षेपास्त्रों पृथ्वी-II (250 किमी. रेंज) एवं अग्नि-II (2500 किमी. रेंज) के मध्य विद्यमान अंतराल को भरने के लिए ‘समन्वित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के तहत ‘अग्नि-I’ के विकास की आवश्यकता महसूस की गई। इसी आवश्यकता का स्वाभाविक परिणाम था जनवरी, 2002 में अग्नि-I का सफल परीक्षण। हाल ही में थल सेना के सामरिक बल कमान ने अग्नि-I का सफल परीक्षण किया।

  • 14 मार्च, 2016 को परमाणु युद्धशीर्ष ले जाने में सक्षम मध्यवर्ती रेंज के बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र ‘अग्नि-I’ का परीक्षण अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप), ओडिशा में किया गया।
  • यह परीक्षण सुबह 9:15 बजे ‘एकीकृत परीक्षण रेंज’ (ITR) के प्रक्षेपण परिसर-4 से किया गया।
  • इस परीक्षण में अग्नि-I प्रक्षेपास्त्र ने 9 मिनट 36 सेकंड में 700 किमी. की दूरी तय की।
  • अग्नि-I प्रक्षेपास्त्र का यह सफल परीक्षण थल सेना की ‘सामरिक बल कमान’ (SFC : Strategic Forces Command) के प्रायोगिक परीक्षण के तहत किया गया।
  • 15 मीटर लंबा, 12 टन वजनी अग्नि-I प्रक्षेपास्त्र 1000 किग्रा. युद्धशीर्ष (परंपरागत या परमाणु) ले जाने में सक्षम है।
  • 700 किमी. मारक क्षमता वाला अग्नि-I सतह-से-सतह प्रहार करने वाला प्रक्षेपास्त्र है जिसके युद्धशीर्ष का भार कम करके मारक क्षमता को 1250 किमी. तक बढ़ाया जा सकता है।
  • अग्नि-I प्रक्षेपास्त्र एकल चरणीय ठोस प्रणोदक द्वारा संचालित है और परिष्कृत दिशा-निर्देशन प्रणाली से सुसज्जित है जो लक्ष्य पर सटीक निशाने के साथ प्रहार कर सकता है।
  • अग्नि-I प्रक्षेपास्त्र को भारतीय थल सेना में पहले ही शामिल किया जा चुका है।
  • इस परीक्षण के पूर्व अग्नि-I का परीक्षण 27 नवंबर, 2015 को किया गया था।

लेखक-नीरज ओझा