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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना

Prime Minister Skills Development Plan

आज का भारत युवाओं का देश है। देश की 62 प्रतिशत से अधिक आबादी कार्यशील आयु समूह (15-59 वर्ष) की तथा 54 प्रतिशत से अधिक आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है। देश के विकास में इस युवा शक्ति का अहम योगदान है या यों कहें कि इसके बिना प्रगति संभव नहीं। यदि हम इस जनसांख्यिकीय विशिष्टता का लाभ लेना चाहते हैं तो इस युवा पूंजी को सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा। इतिहास गवाह है कि किसी भी सभ्यता ने उस समय सबसे अधिक भौतिक प्रगति की जिस समय उसकी जनसंख्या का बड़ा हिस्सा युवा था किंतु हमारे देश के सामने प्रमुख समस्या यह है कि देश में केवल 2.3 प्रतिशत (NSS 66वें दौर 2009-10 के अनुसार) श्रमशक्ति को ही किसी तरह का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त है जबकि यू.के. में यह आंकड़ा 68 फीसदी, जर्मनी में 75 फीसदी,, यूएसए में 52 फीसदी, जापान में 80 फीसदी, तथा दक्षिण कोरिया में 96 फीसदी है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC-2014) के अनुसार, वर्ष 2022 तक देश में 11.92 करोड़ कुशल श्रमशक्ति की आवश्यकता होगी। प्रशिक्षित श्रमशक्ति की इस कमी को पूरा करने के लिए हमें कौशल विकास के क्षेत्र में सही ढंग से कार्य करना होगा ताकि जनसांख्यिकीय विशिष्टता का फायदा उठाया जा सके।
एन.डी.ए. सरकार के गठन के बाद से ही प्रधानमंत्री स्किल, स्केल और स्पीड पर काम करने की बात कर रहे हैं। देश को अगर 8 फीसदी से अधिक की सतत् विकास दर प्राप्त करनी है तो इन तीनों सूत्रों पर सही तरीके से काम करना होगा। इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण है स्किल या कौशल। हमारे युवाओं में इसी कौशल को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1500 करोड़ रुपये लागत वाली ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना’ को 20 मार्च, 2015 को मंजूरी दे दी है। इस योजना से संबंधित प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं-

  • यह योजना ‘राष्ट्रीय कौशल विकास निगम’ (National Skill Development Corporation-NSDC) के माध्यम से तथा नवगठित ‘कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय’ (Ministry of Skill Development and Entrepreneurship) द्वारा कार्यान्वित की जाएगी।
  • प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने की प्रमुख योजना है जिसके तहत परिष्कृत पाठ्यक्रम, बेहतर प्रशिक्षण और प्रशिक्षित प्रशिक्षक पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • इस योजना के तहत देश के 24 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • प्रशिक्षण देते समय श्रम बाजार में नव-प्रवेशी और 10वीं और 12वीं कक्षा की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों को प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • यह कौशल प्रशिक्षण औद्योगिक मानकों तथा राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (NSQF) के आधार पर प्रदान किया जाएगा।
  • इस योजना के तहत प्रशिक्षु का मूल्यांकन किसी बाहरी संस्थान द्वारा किया जाएगा।
  • योजना में प्रत्येक प्रशिक्षु को औसतन 8000 रुपये का आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान देश में 5 करोड़ गैर-कृषि रोजगार के अवसर सृजित किया जाना प्रस्तावित है।
  • कुल 1500 करोड़ रुपये लागत वाली इस योजना में 1120 करोड़ रुपये 14 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने पर खर्च किए जाएंगे।
  • लगभग 220 करोड़ रुपये पहले सीखने वाले युवाओं की पहचान पर विशेष बल देने के लिए खर्च किए जाएंगे।
  • जबकि 67 करोड़ रुपये लोगों को कौशल प्रशिक्षण के विषय में जागरूक करने के लिए खर्च किए जाएंगे।
  • योजना के तहत 67 करोड़ रुपये परामर्श सहायता के लिए आवंटित किए जाएंगे। परामर्श सहायता कार्यक्रम के तहत उन प्रशिक्षुओं की मदद की जाएगी जिन्होंने अपना कौशल प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और नौकरी की तलाश में हैं।
  • लोगों में कौशल प्रशिक्षण के विषय में जागरूकता फैलाने के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों एवं समुदाय आधारित संगठनों के सहयोग से स्थानीय स्तर पर‘कौशल मेला’का आयोजन किया जाएगा।
  • उत्तर-पूर्व क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 150 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
  • कौशल विकास योजना को सरकार द्वारा अभी हाल ही में शुरू प्रमुख योजनाओं जैसे- मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया, नेशनल सोलर मिशन आदि के मांग के आधार पर लक्षित किया जाएगा।
  • इस योजना को NSDC के प्रशिक्षण भागीदारों की सहायता से अखिल भारतीय स्तर पर लागू किया जाएगा।
  • ध्यातव्य हो कि वर्तमान में NSDC के लगभग 187 प्रशिक्षण भागीदार हैं जिनके पास 2300 से अधिक प्रशिक्षण केंद्र हैं।
  • इसके अतिरिक्त केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थाओं द्वारा भी कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • इस योजना को प्रभावपूर्ण बनाने के लिए प्रशिक्षण के दौर से गुजर रहे सभी प्रशिक्षुओं को आकलन के समय फीड बैक देना आवश्यक है।
  • योजना के तहत प्रशिक्षण संस्थाओं के प्रशिक्षण स्थलों के एक निश्चित मानक एवं पाठ्यक्रमों को सत्यापित करने एवं उनका रिकॉर्ड रखने हेतु‘कौशल विकास प्रबंधन प्रणाली’¬[(Skill Development Management System-(SDMS) ]का गठन किया जाएगा।