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नई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना स्वीकृत

New Gold monetization plan approved

स्वर्ण न केवल आभूषणों के निर्माण में प्रयुक्त होता है बल्कि इसे निवेश की दृष्टि से भी बहुत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। भारत में स्वर्ण उत्पादन यहां इसकी मांग की तुलना में बहुत कम होता है। अतः सोने की अधिकांश मात्रा विश्व के प्रमुख स्वर्ण उत्पादक देशों से आयात की जाती है। वर्तमान समय में भारत विश्व में स्वर्ण की मांग वाला दूसरे नंबर का शीर्ष देश है। देश की कुल वार्षिक स्वर्ण मांग का 95 प्रतिशत भाग विदेशों से आयात किया जाता है। सोना और कच्चा तेल (पेट्रोलियम) दो ऐसे पदार्थ हैं जिनके आयात के लिए भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा चुकानी पड़ती है। पेट्रोलियम का आयात तो हमारी प्रतिदिन की ऊर्जा आवश्यकताओं की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है लेकिन स्वर्ण के साथ ऐसी स्थिति नहीं है। अर्थात प्रतिदिन के उपयोग के दृष्टिकोण से सोना देश के आर्थिक विचारकों की दृष्टि में एक गैर-जरूरी मद के रूप में देखा जाता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान केंद्र सरकार ने भी स्वर्ण के आयात पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं और इसी क्रम में केंद्रीय-बजट 2015-16 में प्रस्तावित ‘नई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना’ को अब स्वीकृति मिल चुकी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 9 सितंबर, 2015 को इस योजना पर मंजूरी की मुहर लग जाने से भारत में स्वर्ण मुद्रीकरण के प्रयासों को निश्चय ही बल मिलेगा।

  • स्वर्ण मुद्रीकरण योजना : कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य
  • स्वर्ण जमा योजनाओं की पूर्व स्थितियों में सुधार करके इन्हें और अधिक प्रभावशाली बनाना।
  • नई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के तहत देश के नागरिकों और संस्थानों के पास रखे सोने को जमा कराके इसका उपयोग उत्पादक उद्देश्यों हेतु करना।
  • इस योजना का उपयोग ऐसे दीर्घकालिक उद्देश्यों हेतु करना जिनके तहत सोने के आयात पर देश की निर्भरता कम हो और घरेलू मांग देश में ही उपलब्ध सोने से पूरी की जा सके।
  • स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप एकत्रित स्वर्ण के उपयोग से रिजर्व बैंक के स्वर्ण भंडार में वृद्धि कराना जिससे कि सरकार की उधार लागत कम हो सके।
  • इस योजना के तहत जमा किए गए स्वर्ण का उपयोग रत्नों एवं आभूषणों के व्यवसाय वाले क्षेत्रों की सहायता हेतु करना।
  • नई स्वर्ण मुद्रीकरण योजना में संशोधित स्वर्ण जमा योजना को शामिल किया गया है। जिसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-
  • स्वर्ण जमा करने के इच्छुक व्यक्ति को सोने की न्यूनतम मात्रा 30 ग्राम के साथ इस योजना में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी।
  • यह योजना केवल निवासी भारतीयों, जिनमें व्यक्ति, एकल या संयुक्त (मृतक या जीवित), न्यासों कंपनियों को शामिल किया गया है, पर लागू होगी।
  • इस योजना के तहत स्वर्ण जमा हेतु ग्राहक किसी भी समय बैंकों के केवाईसी नियमों के आधार पर स्वर्ण बचत खाता खोल सकता है।
  • इस योजना में स्वर्ण जमा रखने की निर्धारित अवधि प्रारंभिक रूप से 1 से 3 वर्ष की होगी जिसे बाद में एक-एक वर्ष करके बढ़ाया जा सकता है।
  • इस योजना में छोटी अवधि के लिए स्वर्ण जमा पर ब्याज दर बैंक द्वारा तय की जाएगी जबकि दीर्घकालीन जमा के संबंध में ब्याज दर सरकार तय करेगी।
  • छोटी अवधि की जमा के लिए ग्राहक के पास वापस लेने का विकल्प सदैव खुला रहेगा अर्थात ग्राहक अपना सोना (या इसकी वर्तमान कीमतों के आधार पर नकद राशि) तथा ब्याज लेकर अपना खाता बंद कर सकता है।
  • दीर्घकालीन अवधि के लिए जमा किए गए स्वर्ण को बीच में ही वापस लेने की छूट नहीं होगी बल्कि इसके स्थान पर वापसी केवल नकद में की जाएगी जो सोने के उस समय के राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय मूल्य के आधार पर तय की जाएगी।

लेखक-राजेश त्रिपाठी