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जीसैट-16 का सफल प्रक्षेपण

February 3rd, 2015
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विश्व की पहली व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण कंपनी के रूप में एरियनस्पेस की स्थापना वर्ष 1980 में हुई थी। इसका मुख्यालय फ्रांस में पेरिस के निकट स्थित है। यह कंपनी विश्व भर के व्यावसायिक उपग्रह संचालकों तथा सरकारी एजेंसियों को प्रमोचन सेवाएं अपने तीन प्रमोचन यानों यथा-एरियन-5, सोयुज तथा वेगा (Vega) के माध्यम से उपलब्ध कराती है। एरियन-5 भारी, सोयुज मध्यम तथा वेगा हल्के उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए प्रयोग किया जाता है। स्थापना के बाद से एरियनस्पेस ने विश्व भर के 90 ग्राहकों के साथ करार किया है और अब तक एरियन शृंखला के रॉकेटों के 221, सोयुज के 36 तथा वेगा के 3 प्रक्षेपण संपन्न हो चुके हैं। वर्तमान में जितने भी व्यावसायिक उपग्रह अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, उनमें से आधे से अधिक एरियनस्पेस द्वारा ही प्रक्षेपित किए गए हैं। वर्ष 2014 में एरियनस्पेस ने कुल 11 मिशन संचालित कर उनसे रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया। इस दौरान कंपनी के विभिन्न रॉकेटों द्वारा 23 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया। जिन 23 उपग्रहों का प्रक्षेपण एरियनस्पेस ने वर्ष 2014 में किया, उनमें भारतीय उपग्रह जीसैट-16 भी शामिल है। जीसैट-16 ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (ISRO) का 18वां ऐसा उपग्रह है जिसे एरियनस्पेस ने प्रक्षेपित किया है। उल्लेखनीय है कि इसरो विगत 33 वर्षों से अपने उपग्रहों के प्रक्षेपण हेतु एरियनस्पेस की सेवाएं ले रही है। प्रायोगिक उपग्रह एप्पल (APPLE) इसरो का पहला उपग्रह था जिसे एरियनस्पेस ने एरियन-1 रॉकेट के जरिए वर्ष 1981 में प्रक्षेपित किया था।
ज्ञातव्य है कि जून, 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दो संचार उपग्रहों यथा जीसैट-15 तथा जीसैट-16 के विकास और प्रक्षेपण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई थी। जीसैट-15 एवं जीसैट-16 के प्रक्षेपण हेतु कुल अनुमोदित खर्च क्रमशः 859.50 करोड़ रु. तथा 865.50 करोड़ रु. था। जीसैट-15 का प्रक्षेपण अक्टूबर, 2015 में प्रस्तावित है जबकि जीसैट-16 का प्रक्षेपण 7 दिसंबर, 2014 को किया गया।
भारत के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट- 16 को 7 दिसंबर, 2014 को फ्रेंच गुयाना स्थित कौरू प्रक्षेपण केंद्र से एरियन-5 वीए-221 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया। प्रक्षेपण के 32 मिनट तथा 20.4 सेकंड के पश्चात एरियन-5 रॉकेट ने जीसैट-16 को निर्धारित ‘भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा’ (GTO : Geosynchronous Transfer Orbit) में स्थापित कर दिया। यह एरियन-5 रॉकेट का 77वां प्रक्षेपण था। उल्लेखनीय है कि जीसैट-16 का प्रक्षेपण मूल रूप से 5 दिसंबर, 2014 को किया जाना था लेकिन फ्रेंच गुयाना में खराब मौसम के कारण उड़ान से कुछ घंटे पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया।
7 दिसंबर, 2014 को जीसैट-16 के भू-स्थिर अंतरण कक्षा में स्थापित हो जाने के बाद इसरो की कर्नाटक के हासन स्थित ‘मुख्य नियंत्रण सुविधा’ (MCF : Master Control Facility) ने इसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद 8 दिसंबर से उपग्रह की ‘कक्षा के उन्नयन’ (Orbit Raising) की प्रक्रिया आरंभ हुई। 8 दिसंबर को उपग्रह की कक्षा के उन्नयन के प्रथम चरण के तहत जीसैट-16 के ‘लैम’ (LAM : Liquid Apogee Motor) इंजन को 6081 सेकंड तक दागा गया। इस प्रक्रिया में लैम इंजन ने 877.6 किग्रा. प्रणोदक खर्च किया। अगले दिन 9 दिसंबर को उपग्रह की कक्षा के उन्नयन के दूसरे चरण के तहत लैम इंजन 2203 सेकंड तक दागा गया। 10 दिसंबर को कक्षोन्नयन का तीसरा चरण भी संपन्न हो गया और इस चरण में लैम इंजन को 289.44 सेकंड तक दागा गया। इस प्रकार कक्षोन्नयन के तीन चरणों के सकुशल संपन्न हो जाने के बाद जीसैट-16 उपग्रह 12 दिसंबर को 36000 किमी. की ऊंचाई वाली ‘भू-स्थिर कक्षा’ (Geostationary Orbit) में स्थापित हो गया। जीसैट-16 को भू-स्थिर कक्षा में 55 डिग्री पूर्वी देशांतर (55 deg East Longitude) में जीसैट-8, IRNSS-1A एवं IRNSS 1B उपग्रहों के साथ स्थापित किया गया है। इसके बाद उपग्रह के सौर पैनलों, एंटीना आदि की तैनाती भी की गई। उल्लेखनीय है कि जीसैट-16 अपने साथ कुल 48 संचार ट्रांसपोंडरों (Transponders) को लेकर गया है। यह इसरो द्वारा अब तक विकसित किसी संचार उपग्रह द्वारा ले जाए गए ट्रांसपोंडरों की सर्वाधिक संख्या है। इन 48 ट्रांसपोंडरों में से 12 Ku-बैंड के 24 C-बैंड के तथा 12 ऊपरी विस्तारित (Upper extended) C-बैंड के हैं। ज्ञातव्य है कि प्रक्षेपण के उपरांत जब संचार उपग्रहों का परिचालन प्रारंभ हो जाता है तब उनमें लगे ट्रांसपोंडरों को प्रयोक्ताओं को लीज (Lease) पर दिया जाता है। भारत का अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) इन्सैट/जीसैट शृंखला के उपग्रहों द्वारा ले जाए गए ट्रांसपोंडरों को अपनी व्यावसायिक इकाई ‘एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (ANTRIX Corporation Limited) के माध्यम से लीज पर देता है। इन ट्रांसपोंडरों को लीज पर देने से अंतरिक्ष विभाग को राजस्व की प्राप्ति होती है। ये राजस्व डीटीएच (DTH : Direct-To-Home) सेवाओं, टीवी अपलिंक सेवाओं, डीएसएनजी (DSNG : Digital Satellite News Gathering) सेवाओं तथा वीसैट (VSAT : Very Small Aperture Terminal) सेवाओं आदि के सेवा प्रदाताओं द्वारा प्राप्त होता है। वर्तमान में संचालित इन्सैट/जीसैट शृंखला के उपग्रहों में लगे 188 ट्रांसपोंडर भारतीय प्रयोक्ताओं की जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त हैं। क्षमता की कमी के चलते इसरो ने मुख्यतः निजी टेलिविजन प्रसारणकर्ताओं की मांग पूरी करने हेतु विदेशी उपग्रहों से 95 ट्रांसपोंडर लीज पर भी लिए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि निजी क्षेत्र के प्रयोक्ता अक्सर ट्रांसपोंडर क्षमता के अपर्याप्त होने की शिकायत करते रहें हैं जिससे उनकी आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रहीं थीं। हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा की गई जांच में भी यह तथ्य उभरकर सामने आया है कि भारत का अंतरिक्ष विभाग घरेलू उपग्रहों के माध्यम से आवश्यक ट्रांसपोंडर क्षमता उपलब्ध कराने में नाकाम रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि वह योजना के अनुरूप संचार उपग्रहों का प्रक्षेपण करने में असमर्थ रहा। उल्लेखनीय है कि 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान भारतीय अंतरिक्ष विभाग को 9 उपग्रहों के माध्यम से 218 Ku-बैंड के ट्रांसपोंडरों को अंतरिक्ष में स्थापित करना था, लेकिन वह लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। बहरहाल, अब जीसैट-16 का परिचालन प्रारंभ हो जाने से घरेलू उपग्रहों के माध्यम से स्थापित क्रियाशील ट्रांसपोंडरों की कुल संख्या 236 तक पहुंच गई है जिससे विदेशी ट्रांसपोंडरों पर निर्भरता खत्म करने में कुछ हद तक मदद प्राप्त हो सकेगी।
जहां तक जीसैट-16 का प्रश्न है, तो यह भारतीय संचार उपग्रहों में जीसैट शृंखला का 11वां उपग्रह है। यह एक बहु-बैंड (Multi-band) दूरसंचार उपग्रह है, जिसके दायरे में पूरा भारतीय उपमहाद्वीप होगा। 3181.6 किग्रा. वजनी इस उपग्रह को 12 वर्ष की अवधि के लिए अंतरिक्ष में स्थापित किया गया है। जीसैट-16 इन्सैट-3ई उपग्रह की जगह लेगा। ज्ञातव्य है कि इसरो ने 1 अप्रैल, 2014 को संचार उपग्रह इन्सैट-3 ई का उपयोग बंद कर दिया था। इन्सैट-3 ई ने 10 वर्ष 6 महीने का अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा कर 29 मार्च, 2014 से कार्य करना बंद कर दिया था। जीसैट-16 देश में वर्तमान दूरसंचार, टेलिविजन, वीसैट तथा अन्य उपग्रह आधारित सेवाओं को सहयोग प्रदान करेगा।
जीसैट-16 के साथ सद्यः प्रक्षेपण में एरियनस्पेस ने ‘डायरेक्टीवी-14’ (DIRECTV-14) नामक एक अन्य संचार उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित किया। डायरेक्टीवी-14 अमेरिकी कंपनी डायरेक्टीवी का उपग्रह है, जिसका प्रयोग अमेरिका में डायरेक्ट-टू-होम टेलिविजन प्रसारण के लिए किया जाएगा। 6300 क्रिग्रा. वजनी डायरेक्टीवी-14 को एसएसएल (SSL : Space Systems/Loral) ने डिजाइन एवं निर्मित किया है। संचालक डायरेक्टीवी के लिए एरियनस्पेस द्वारा प्रक्षेपित किया गया यह सातवां उपग्रह है, साथ ही यह एसएसएल द्वारा निर्मित 46वां ऐसा उपग्रह है जिसे एरियनस्पेस ने प्रक्षेपित किया है। उल्लेखनीय है कि एरियनस्पेस ने सर्वप्रथम वर्ष 1993 में डायरेक्टीवी कंपनी के डायरेक्टीवी-1 उपग्रह को प्रक्षेपित किया था। डायरेक्टीवी-14 उपग्रह की परिचालन अवधि 15 वर्ष है।


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