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उदय योजना, 2015 की स्वीकृति

Uday Plan, the 2015 Approved

उच्च एटी एंड सी (AT&C) हानियां, उच्चस्तरीय बुनियादी ढांचे की कमी, बिजली वितरण कंपनियों की कमजोर वित्तीय स्थिति आदि भारत में बिजली वितरण की प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं। बिजली वितरण कंपनियों की कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण हैं-(1) राज्य सरकारों द्वारा कृषि क्षेत्र को मुफ्त या सब्सिडी युक्त बिजली प्रदान करना, (2) किसानों के बकाया बिजली बिलों को माफ करना, (3) बिजली की कम कीमतें, (4) वितरण प्रणाली में पर्याप्त निवेश का अभाव, (5) बिजली चोरी, (6) उपयुक्त मीटरिंग प्रणाली का अभाव आदि। इन्हीं कारणों से वित्तीय दबाव की शिकार बिजली वितरण कंपनियां 24 घंटे बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं हैं जिससे देश की आर्थिक प्रगति एवं विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही, बिजली कटौतियों से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विपरीत असर पड़ता है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय दबाव से ग्रस्त वितरण कंपनियों द्वारा बैंक कर्ज में किए जाने वाले डिफॉल्ट से बैंकिंग क्षेत्र एवं भारतीय अर्थव्यवस्था को गंभीर हानि होने की आशंका है।
देश के सभी गांवों का विद्युतीकरण, 24 घंटे बिजली की अबाधित आपूर्ति और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता सुदृढ़ वित्तीय स्थिति वाली बिजली वितरण कंपनियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने हेतु ‘उदय’ (UDAY) योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस योजना का लक्ष्य राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के परिचालन एवं वित्तीय क्षमता में सुधार करना है। उल्लेखनीय है कि उदय योजना केवल राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों पर लागू होगी। उदय योजना के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-

  • 5 नवंबर, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना’ (UDAY-उदय) को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • उदय योजना केंद्रीय बिजली मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत एक नई योजना है।
  • उल्लेखनीय है कि उदय योजना का लक्ष्य बिजली वितरण कंपनियों का वित्तीय सुधार करना और उनका पुनरुद्धार करना है।
  • इस योजना से सभी लोगों को 24 घंटे किफायती एवं सुविधाजनक बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
  • गौरतलब है कि बिजली वितरण कंपनियों का बकाया कर्ज वर्ष 2011-12 के लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2014-15 में 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • उदय योजना के तहत बिजली वितरण कंपनियों को आगामी दो-तीन वर्षों में नुकसान से उबारने हेतु निम्नलिखित चार पहलें अपनाई जाएंगी-
    1. बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता में सुधार करना;
    2. बिजली की लागत को कम करना;
    3. वितरण कंपनियों के ब्याज लागत को कम करना एवं
    4. राज्य वित्त के साथ समन्वय के माध्यम से बिजली वितरण कंपनियों पर वित्तीय अनुशासन लागू करना।
  • उदय योजना की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं-
  • उदय योजना के तहत 30 सितंबर, 2015 की स्थिति के अनुसार, बिजली वितरण कंपनियों का 75 प्रतिशत ऋण राज्यों द्वारा दो वर्षों में अधिग्रहीत किया जाएगा।
  • ऋण का यह अधिग्रहण वर्ष 2015-16 में 50 प्रतिशत और वर्ष 2016-17 में 25 प्रतिशत होगा।
  • उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015-16 और 2016-17 वित्तीय वर्ष में संबंधित राज्यों की राजकोषीय घाटे की गणना में उदय योजना के तहत राज्यों द्वारा अधिग्रहीत ऋण शामिल नहीं किया जाएगा।
  • राज्यों द्वारा उचित सीमा तक वितरण कंपनियों को ऋण प्रदान करने वाले बैंकों/वित्तीय संस्थाओं हेतु एसडीएल बॉण्डों समेत गैर-एसएलआर जारी किया जाएगा।
  • वितरण कंपनियों के जिन ऋणों का अधिग्रहण राज्य द्वारा अधिग्रहण नहीं किया जाएगा, उन्हें वित्तीय संस्थान/बैंक द्वारा ऋण अथवा बॉण्ड में परिवर्तित कर दिया जाएगा।
  • इस ऋण/बॉण्ड पर बैंक/वित्तीय संस्थान द्वारा अपने आधार के साथ 0.1 प्रतिशत (Base Rate Plus 0.1%) से अधिक ब्याज दर नहीं लगाया जाएगा।
  • उपर्युक्त ऋण वैकल्पिक रूप से वितरण कंपनियों द्वारा बाजार में प्रचलित दरों पर ‘स्टेट गारंटीड डिस्कॉम बॉण्डस’ के रूप पूर्ण या आंशिक रूप से जारी किए जा सकते हैं।
  • ये बाजार प्रचलित दरें बैंक आधार दर के साथ 0.1 प्रतिशत के बराबर या उससे कम होंगी।
  • उल्लेखनीय है कि राज्यों द्वारा वितरण कंपनियों को भविष्य में होने वाली हानि को श्रेणीबद्ध ढंग से अधिग्रहण किया जाएगा।
  • यह अधिग्रहण इस प्रकार होगा-वर्ष 2017-18 में 2016-17 की हानि का 5 प्रतिशत, वर्ष 2018-19 में 2017-18 की हानि का 10 प्रतिशत और वर्ष 2019-20 में वर्ष 2018-19 की हानि का 25 प्रतिशत।
  • केंद्रीय बिजली मंत्रालय से विचार विमर्श के पश्चात एक निश्चित अवधि के भीतर राज्य वितरण कंपनियां 1 अप्रैल, 2012 के बाद से बकाया ‘नवीकरणीय खरीद बाध्यता’ (RPO) का अनुपालन करेंगी।
  • गौरतलब है कि उदय योजना को स्वीकार करने वाले और परिचालन लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन करने वाले राज्यों को विविध योजनाओं के माध्यम से अतिरिक्त/प्राथमिक वित्तीयन प्रदान किया जाएगा।
  • इन योजनाओं में शामिल हैं-दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY), समेकित बिजली विकास योजना (IPDS), विद्युत क्षेत्र विकास कोष (PSDF) अथवा बिजली मंत्रालय और नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की इसी तरह की अन्य योजनाएं।
  • उल्लेखनीय है कि उदय योजना सभी राज्यों के लिए वैकल्पिक है।

लेखक-नीरज ओझा