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सांसद आदर्श ग्राम योजना

महात्मा गांधी की ग्रामीण विकास की संकल्पना स्वराज को सुराज में बदलने के लिए आदर्श ग्रामों के विकास पर केंद्रित है। महात्मा गांधी ने कहा है, ‘‘ग्राम स्वराज के बारे में मेरी राय यह है कि गांव अपने आप में पूर्ण गणराज्य हो, अपनी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के लिए अपने पड़ोसी गांवों पर निर्भर न हो, परंतु कई अन्य ऐसी जरूरतों की पूर्ति के लिए उन गांवों पर निर्भर हो, जिनके लिए निर्भर होना आवश्यक हो’’। उन्होंने यह भी कहा था कि प्रत्येक देशभक्त के समक्ष यह चुनौती होगी कि भारत के गांवों का ऐसा पुनर्निर्माण किस प्रकार किया जाए कि कोई भी व्यक्ति उनमें भी उतनी आसानी से रह सके, जैसे कि शहरों में रहा जाता है। प्रधानमंत्री ने इस चुनौती को स्वीकारते हुए 11 अक्टूबर, 2014 को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर सांसद आदर्श ग्राम योजना का शुभारंभ किया है। अन्य योजनाओं से अलग इस योजना में लाभार्थियों को प्राप्तकर्ता और सरकार को प्रदाता नहीं माना गया है। इस योजना का उद्देश्य गांवों को अपने विकल्पों का चुनाव करने के योग्य बनाना और उन्हें इन विकल्पों के चयन का अवसर देना है।

  • प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर, 2014 को ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना’ (SAGY) का शुभारंभ किया।
  • इस अवसर पर योजना के लिए दिशा-निर्देश (Guideline) भी जारी किए गए।
  • प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संभाषण में इस योजना को प्रारंभ करने की घोषणा की थी।
  • योजना के तहत 31 मार्च, 2019 तक प्रत्येक सांसद को तीन आदर्श ग्राम का विकास करना है।
  • वर्ष 2019 तक विकास के लिए चयनित तीन गांवों में से एक गांव के विकास का लक्ष्य प्रत्येक सांसद को वर्ष 2016 तक ही हासिल कर लेना है।
  • वर्ष 2019 तक लोक सभा के 543 एवं राज्य सभा के 250 सांसदों (238 निर्वाचित+12 मनोनीत) द्वारा तीन-तीन ग्रामों के हिसाब से देश में कुल 2379 ग्रामों के विकास का लक्ष्य है।
  • 31 मार्च, 2019 से 31 मार्च, 2024 तक के 5 वर्षों के बीच प्रत्येक सांसद को 5-5 आदर्श ग्राम चयनित करने और विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है। चयन हेतु इकाई ‘ग्राम पंचायत’ होगी।
  • चयनित ग्रामों की जनसंख्या-
  • मैदानी क्षेत्रों में 3000 से 5000 के मध्य एवं
  • पहाड़ी, जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में 1000 से 3000 के मध्य होनी चाहिए।

नोटजिन जिलों में इस आकार के ग्राम उपलब्ध न हों वहां ऐसे ग्रामों का चयन किया जा सकता है जिनकी आबादी वांछित आबादी के लगभग समान हो।

  • लोक सभा संसद सदस्य को अपने निर्वाचन क्षेत्र से ग्राम पंचायत का चयन करना होगा।
  • राज्य सभा सांसद को उस राज्य जहां से वह निर्वाचित है, के अपनी पसंद के जिले के ग्रामीण क्षेत्र से ग्राम पंचायत का चयन करना होगा।
  • नामित संसद सदस्य देश के किसी जिले के ग्रामीण क्षेत्र की ग्राम पंचायत का चयन करेंगे।
  • शहरी निर्वाचन क्षेत्र के ऐसे संसद सदस्य जिनके निर्वाचन क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र नहीं है, अपने आस-पास के ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र की किसी ग्राम पंचायत का चयन करेंगे।
  • कोई भी सांसद अपने या अपनी पत्नी के गांव का चयन नहीं कर सकता है।
  • प्रत्येक चयनित ग्राम पंचायत के लिए एक ग्रामीण विकास योजना तैयार की जाएगी, जिसमें प्रत्येक गरीब परिवार को गरीबी से उबारने में मदद करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • प्रधानमंत्री ने उदाहरण के रूप में 3 आदर्श गांवों का उल्लेख किया-
  1. गुजरात का पुंसारी गांव (इसे ‘देश का नं. 1 गांव’ भी कहा जाता है)
  2. तेलंगाना का गंगा देवी पल्ली गांव
  3. महाराष्ट्र का हिवाड़े बाजार गांव।
  • सांसद आदर्श ग्राम योजना के लिए जारी दिशा-निर्देश के संलग्नक-I में योजना के अंतर्गत योजना के कार्य-कलापों का विस्तृत विवरण दर्ज है जो संक्षिप्त प्रारूप में इस प्रकार है-

व्यक्तिगत विकास

  •     स्वस्थतापूर्ण व्यवहार और आदतें
  •    शारीरिक व्यायाम एवं खेल
  •    नशे से मुक्ति

मानव विकास

  •     स्वास्थ्य एवं पोषण
  •    सभी के लिए शिक्षा

सामाजिक विकास

  •       स्वच्छ गांव
  •       अपराध-मुक्त समाज

आर्थिक विकास

  •    पशुपालन, बागवानी को बढ़ावा
  •    ग्रामीण औद्योगिकीकरण
  •    कौशल विकास
  •    महिलाओं का वित्तीय समावेशन
  •    मनरेगा के तहत रोजगार

पर्यावरण विकास

  •    वृक्षारोपण एवं सामाजिक वानिकी
  •    वाटरशेड प्रबंधन
  •    प्रदूषण कम करना
  •    वर्षा-जल संचयन

बुनियादी सुविधाएं

  •    पक्के मकान
  •    पेयजल सुविधा
  •    सड़क संपर्कता
  •    ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत
  •    सार्वजनिक संस्थानों-आंगनबाड़ी, विद्यालयों, ग्राम पंचायत आदि के लिए पक्की संरचना
  •    ग्रामीण बाजार, बैंक, डाकघर, ब्रॉड बैंड, टेलीकॉम कनेक्टिविटी

सामाजिक सुरक्षा

  •    वृद्ध, विकलांग, विधवा पेंशन
  •    बीमा योजना
  •    खाद्य सुरक्षा

सुशासन

  •    ग्राम पंचायत की सुदृढ़ता
  •    सामाजिक लेखा सेवा
  •    सूचनाओं का प्रकटीकरण
  •    शिकायतों का निपटान
  •    समयबद्ध सेवा प्रदायगी
  •    ग्राम सभा, महिला सभा, बाल सभा आयोजन।
  • सांसद आदर्श ग्राम योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और संबंधित कार्यक्रमों के विभिन्न स्तरों के कार्यकर्ताओं की होगी।
  • संसद सदस्य आदर्श ग्राम हेतु ग्राम पंचायत के चयन के साथ-साथ समन्वयक की भूमिका निभाते हैं।
  • ग्रामीण विकास मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर सांसद आदर्श ग्राम योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • दो राष्ट्रीय समितियां कार्यान्वयन का निरीक्षण करेंगी-
  •      एक समिति के अध्यक्ष ग्रामीण विकास मंत्री होंगे,
  •       दूसरी समिति के अध्यक्ष ग्रामीण विकास सचिव होंगे।
  • राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अधिकार-प्राप्त समिति गठित की जाएगी।
  • जिला कलेक्टर सांसद आदर्श ग्राम योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल अधिकारी होगा।
  • इस योजना की इस आधार पर आलोचना की जा रही है कि भारत में लगभग 6 लाख गांव हैं और इस योजना से 8 वर्षों में अधिकतम 6500 आदर्श गांव ही निर्मित हो सकेंगे, लेकिन प्रधानमंत्री का कहना है कि सांसदों के साथ-साथ राज्य सरकारें विधायक आदर्श ग्राम योजना लागू करके अधिक से अधिक गांवों को आदर्श ग्राम बना सकती हैं। इसके अतिरिक्त आदर्श ग्राम बनने की प्रतियोगिता इस दिशा में बड़ी प्रेरक साबित हो सकती है।
  • आदर्श ग्राम योजना के लिए अलग से कोई निधि आवंटित नहीं की गई है। जारी योजनाओं से ही इसका वित्तीयन किया जाएगा।