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वियतनाम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

भारतीय विदेश नीति में पूर्व की ओर देखो नीति (Look East Policy) का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसी नीति का एक भाग है– वियतनाम के साथ मजबूत सामरिक, सांस्कृतिक एवं वैदेशिक संबंध। दोनों ही राष्ट्र गुट निरपेक्ष आंदोलन और गंगा-मेकांग सहयोग के भागीदार सदस्य हैं। एक तरफ भारत ने विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization-WTO) में वियतनाम के प्रवेश का समर्थन किया था तो वियतनाम ने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता हेतु भारत का समर्थन किया है। चीन की विस्तारवादी नीति ने दोनों देशों को करीब लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ज्ञातव्य है कि चीन ने वर्ष 1962 में भारत पर और 1979 में वियतनाम पर आक्रमण किया था। वर्तमान में भी भारतीय भू-भाग और वियतनामी समुद्री क्षेत्र पर चीन निरंतर अपना दावा पेश करता है। सामरिक दृष्टि से मजबूत भारत के लिए वियतनाम एक अच्छा क्षेत्रीय साझेदार है। बढ़ते हुए भारत-वियतनाम संबंध का एक उदाहरण है वियतनाम के प्रधानमंत्री न्गुएन तान डंग (Nguyen Tan Dung) की भारत यात्रा जो 27-28 अक्टूबर, 2014 को संपन्न हुई। इस यात्रा से संबंधित महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां इस प्रकार रहीं

  • वियतनाम के प्रधानमंत्री ने इस यात्रा के दौरान प्रसिद्ध बौद्ध स्थल बोधगया का दौरा किया। इसके साथ बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से भी मुलाकात की।
  • वियतनाम के प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान कुल सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए-
  1. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना पर भारत और वियतनाम के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  2. वियतनाम के ‘विश्व विरासत स्थल’ (World Heritage Site) ‘माई सन’ (My Son) मंदिरों के समूह के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार के लिए भारत और वियतनाम के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  3. दूरसंचार विश्वविद्यालय, रक्षा मंत्रालय, वियतनाम में अंग्रेजी भाषा एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए भारत और वियतनाम के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  4. वर्ष 2015-17 के लिए भारत गणराज्य के संस्कृति मंत्रालय और वियतनाम समाजवादी गणराज्य के संस्कृति, खेल एवं पर्यटन मंत्रालय के मध्य सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम पर समझौता।
  5. श्रव्य-दृश्य कार्यक्रमों के आदान-प्रदान के लिए भारत के प्रसार भारती और वियतनाम के ‘वॉइस ऑफ वियतनाम’ (Voice of Vietnam) के मध्य प्रसारण पर सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन।
  6. भारत के ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ‘ओवीएल’ (OVL) और वियतनाम के ‘पेट्रो वियतनाम’ के मध्य करारों की शीर्ष।
  7. भारत के ओएनजीसी (ONGC) और वियतनाम के ‘पेट्रो वियतनाम’ के मध्य समझौता-ज्ञापन।

उपर्युक्त समझौतों के अलावा दोनों देशों ने भारत-वियतनाम द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2020 तक 15 बिलियन डॉलर के स्तर तक ले जाने की वचनबद्धता व्यक्त की। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत-वियतनाम द्विपक्षीय व्यापार 7 बिलियन डॉलर का है।

  • वियतनाम के प्रधानमंत्री ने वियतनाम को रक्षा सामग्रियों की खरीद के लिए प्रदान किए गए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (Line of Credit) सबंधी करार को शीघ्रता से लागू करने का आह्वान किया।
  • 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ संबंधी करार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की वियतनाम यात्रा के दौरान किया गया था।
  • वियतनाम के प्रधानमंत्री ज़ुग डंग के साथ एक बड़ा ‘कारोबारी शिष्टमंडल’(Business Delegation) आया था जिसने सीआईआई (CII), फिक्की (FICCI) एवं एसोचैम (ASSOCHAM) सहित भारत के शीर्ष वाणिज्य एवं उद्योग चेंबर के साथ अलग से बैठकें कीं।
  • संयुक्त वक्तव्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने वियतनाम में ‘बैंक ऑफ इंडिया’(Bank of India) की शाखा खोलने के लिए ‘स्टेट बैंक ऑफ वियतनाम’ (State Bank of Vietnam) द्वारा अनुमोदन प्रदान किए जाने का स्वागत किया है।
  • संयुक्त वक्तव्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे की उम्मीदवारी के लिए समर्थन प्रदान करने की पुष्टि की।
  • संयुक्त वक्तव्य में दोनों प्रधानमंत्रियों ने एशिया में तथा एशिया के बाहर भी शांति, स्थिरता, समृद्धि एवं विकास के लिए साथ मिलकर काम करने की अपनी-अपनी इच्छा एवं दृढ़ निश्चय को फिर से दोहराया।