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राष्ट्रपति द्वारा सेबी अध्यादेश को पुनः मंजूरी

भारतीय पूंजी बाजार में अवैध रूप से चलाई जा रही सामूहिक निवेश योजनाओं तथा पोंजी (Ponzi) योजनाओं ने निवेशकों के हितों को लगातार प्रभावित किया है। पोंजी योजना, पिरामिड योजना, मल्टीलेवल मार्केटिंग अथवा नेटवर्क मार्केटिंग व्यवस्था ऐसी योजनाएं हैं जिनमें निवेशकों को उच्च रिटर्न (25 से 100 प्रतिशत तक) का लालच देकर निवेश के लिए आकर्षित किया जाता है। पोंजी योजनाएं देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैलकर छोटे-छोटे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी कर रही हैं। ये योजनाएं निवेशकों के लाखों तथा करोड़ों रुपये लेकर भाग जाती हैं। भारतीय चिट फंड अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थापित चिट फंड व्यवस्था उधार लेने और बचत करने का परंपरागत तरीका है, लेकिन पूंजी बाजार नियामक कानून के अभाव में यह भी पोंजी योजनाओं का रूप ले रहा है। पिछले वर्ष अत्यंत चर्चित रहा शारदा ग्रुप घोटाला पोंजी योजना का एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण था। अभी हाल ही में निवेशकों के हितों को प्रभावित करने में सहारा समूह की उल्लेखनीय भूमिका सामने आई है। सूक्ष्म वित्त उद्यमों में भी चिट फंड व्यवस्था का लगातार विरोध हो रहा है। ऐसे समय में निवेशकों के हितों की सुरक्षा, प्रतिभूति बाजार के विकास को बढ़ावा देने तथा अवैध पूंजी बाजार कारोबार पर रोक लगाने के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपनी पूंजी बाजार नियामक भूमिका को बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। सेबी के पूंजी बाजार नियामक भूमिका में वृद्धि के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956,(Securities Contracts Regulation Act, 1956), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 तथा निक्षेपागार अधिनियम, 1996′ (Depositories Act, 1996) में संशोधनों को मंजूरी प्रदान की गई। इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 18 जुलाई, 2013 को इसे पहली बार अध्यादेश के रूप में मंजूरी दी थी। इसके बाद इसी अध्यादेश को पुनः 16 सितंबर, 2013 को मंजूरी प्रदान की गई थी। संसद के शीतकालीन सत्र में प्रतिभूति कानून (संशोधन) विधेयक, 2013′ [Securities Laws (Amendment) Bill, 2013 ]पेश किया गया परंतु पारित नहीं हो सका, इसके पहले इस विधेयक को मानसून सत्र में भी पारित नहीं कराया जा सका था। इस कारण पुनः तीसरी बार अध्यादेश का सहारा लेना पड़ा।

  • 28 मार्च, 2014 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय पूंजी बाजार नियामक के रूप में सेबी को और अधिक शक्तियां देने वाले प्रतिभूति कानून (संशोधन) अध्यादेश 2014 को पुनः मंजूरी प्रदान की है।
  • पिछली बार जारी किए गए अध्यादेश की अवधि 15 जनवरी, 2014 को समाप्त हो गई थी।
  • उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-123 के अंतर्गत राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने की शक्ति है, जिसका प्रभाव व भूमिका ‘अधिनियम’ के बराबर होती है।
  • अध्यादेश का प्रयोग तभी किया जाता है जब इससे संबंधित विधेयक को संसद की मंजूरी दिलाने के लिए पर्याप्त समय न हो और कानून बनाना अनिवार्य हो।
  • इस अध्यादेश की मंजूरी के बाद सेबी अध्यक्ष को पोंजी स्कीमों पर कार्रवाई हेतु जांच करने या किसी अन्य अधिकारी को तलाश और जांच के लिए नियुक्त करने का अधिकार होगा।
  • साथ ही, सेबी 100 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक की धनराशि जुटाने वाली किसी भी योजना का नियमन कर सकता है।
  • नियमों का अनुपालन नहीं करने की स्थिति में समन भेजने, संपत्ति को जब्त करने का भी अधिकार सेबी के पास होगा।
  • अध्यादेश में सेबी संबंधी मामलों के तेजी से निपटान के लिए विशेष अदालतों का गठन करने का प्रावधान है।
  • अध्यादेश में सेबी को प्रतिभूति लेन-देन अथवा सौदों की जांच के संबंध में व्यक्तियों अथवा इकाईयों से सूचना मांगने का अधिकार दिया गया है। इसमें टेलीफोन कॉल का ब्यौरा भी शामिल है।
  • प्रतिभूति कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2014 में यह प्रावधान किया गया है कि सेबी अध्यक्ष को तलाशी और जब्ती का आदेश देते समय इसका लिखित रूप से कारण देना होगा, जबकि पिछले दो अध्यादेशों में ऐसा प्रावधान नहीं किया गया था।
  • सेबी के पास सामूहिक निवेश करने वाली योजनाओं का पंजीकरण अनिवार्य होगा तथा इनके खिलाफ शिकायत दर्ज होने पर सेबी द्वारा संबंधित अधिकारी को समन जारी किया जाएगा।
  • इस प्रकार अध्यादेश से प्राप्त यह अधिकार सेबी को अवैध तौर पर चलाई जाने वाली सामूहिक निवेश योजनाओं और पोंजी योजनाओं के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद करेगा।

सेबी

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI : Securities and Exchange Board of India) का गठन भारत सरकार द्वारा वर्ष 1988 में किया गया और इसे सेबी अधिनियम, 1992 के तहत 12 अप्रैल, 1992 को वैधानिक अधिकार प्रदान किए गए थे। यह भारत में प्रतिभूति और वित्त का नियामक बोर्ड है, जिसका मुख्यालय मुंबई (महाराष्ट्र) में है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में स्थित हैं।