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राष्ट्रपति की नॉर्वे व फिनलैंड यात्रा

नवीन बहुपक्षीय विश्व में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की परिभाषा एवं महत्त्व दोनों में व्यापक बदलाव आया है। अब अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में सामरिकता का महत्त्व गौण होता जा रहा है। इसके विपरीत व्यापारिक, शैक्षणिक व सांस्कृतिक संबंधों का महत्त्व बढ़ रहा है। भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने स्कैंडिनेवियाई देशों नॉर्वे और फिनलैंड की यात्रा हाल ही में संपन्न की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौते हुए। इस यात्रा का क्रमवार विवरण इस प्रकार है-

  • 12 से 17 अक्टूबर, 2014 के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नॉर्वे एवं फिनलैंड की यात्रा संपन्न की।
  • अपनी यात्रा के प्रथम चरण में इन्होंने 12-14 अक्टूबर के मध्य नॉर्वे की यात्रा संपन्न की। 13 अक्टूबर को राष्ट्रपति महोदय नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे तथा यहां के राष्ट्रीय स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
  • इसी दौरान राष्ट्रपति नॉर्वे की राष्ट्रीय संसद स्टॉर्टिंग (Storting) का भ्रमण किया।
  • उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नॉर्वे की यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय राष्ट्रपति हैं।
  • अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति महोदय ने नॉर्वे के राष्ट्र प्रमुख हेराल्ड पंचम एवं प्रधानमंत्री एर्ना सोल्बर्ग के साथ भी मुलाकात की।
  • नॉर्वे की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। राष्ट्रपति ने आतंकवादियों के वर्गीकरण जैसे कि‘अच्छे आतंकवादी’और ‘बुरे आतंकवादी’ से ऊपर उठकर सोचने की बात कही।
  • नॉर्वे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हाइड्रोकार्बन का निर्यातक है और इसके पास विश्व के विशालतम ‘हाइड्रोकार्बन’भंडार हैं, अतः यह भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं हेतु महत्त्वपूर्ण साझेदार साबित हो सकता है।
  • इस यात्रा में भारत और नॉर्वे के मध्य कुल 15 समझौते संपन्न हुए जो इस प्रकार हैं-
  1. राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा की आवश्यकता से छूट।
  2. भारत के संस्कृति मंत्रालय तथा नॉर्वे के मंच संग्रहालय (Munch Museum) के बीच समझौता-ज्ञापन।
  3. भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद (Research Council of Norway) के मध्य ‘पृथ्वी तंत्र विज्ञान’ (Earth System Science) के क्षेत्र में समझौता-ज्ञापन।
  4. आईआईटी कानपुर और एनटीएनयू (NTNU) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  5. आईआईएसईआर तिरुवनंतपुरम और एसआईएनटीईएफ (SINTEF) के मध्य सामग्री एवं रसायनशास्त्र के क्षेत्र में समझौता-ज्ञापन।
  6. ओस्लो विश्वविद्यालय और हैदराबाद विश्वविद्यालय के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  7. डीआरडीओ (DRDO) और नॉर्वेजियाई रक्षा अनुसंधान प्रतिष्ठान के मध्य ‘मंशा वक्तव्य’ (Statement of Intent)।
  8. आईआईएसईआर तिरुवनंतपुरम और ऊर्जा प्रौद्योगिकी संस्थान के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  9. ओस्लो विश्वविद्यालय और आईआईटी कानपुर के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  10. वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research-CSIR) और एसआईएनटीइएफ (SINTEF) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  11. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian Council for Medical Research-ICMR) और नॉर्वे की अनुसंधान परिषद के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  12. आईआईटी कानपुर और एनआईएलयू (NILU) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  13. हैदराबाद विश्वविद्यालय तथा बर्गेन विश्वविद्यालय के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  14. हैदराबाद विश्वविद्यालय और एनटीएनयू (NTNU) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  15. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय और एग्डर विश्वविद्यालय (University of Agder) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  • राष्ट्रपति ने नॉर्वे की इस यात्रा के दौरान भारत के प्रथम आर्कटिक शोध संस्थान ‘हिमाद्री’के वैज्ञानिकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वार्ता की।
  • अपनी यात्रा के दूसरे चरण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 14 अक्टूबर, 2014 को फिनलैंड पहुंचे।
  • राष्ट्रपति की फिनलैंड की यात्रा के दौरान कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए जो इस प्रकार हैं-
  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तथा फिनलैंड उच्च शिक्षा संस्थान परिसंघ के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  2. केम्पोलिस ओय (Chempolis Oy) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड के मध्य साझेदारी-करार।
  3. जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार तथा जीओआई टेक्स, फिनिश फंडिंग एजेंसी के मध्य जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार एवं सहयोग के लिए समझौता-ज्ञापन।
  4. भारतीय परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड (Atomic Energy Regulatory Board of India) तथा फिनलैंड के ‘रेडिएशन एवं परमाणु सुरक्षा प्राधिकरण’ (Radiation and Nuclear Safety Authority of Finland) के मध्य सहयोग के लिए व्यवस्था।
  5. भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय तथा फिनलैंड के रोजगार एवं आर्थिक मंत्रालय के मध्य नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग पर समझौता-ज्ञापन।
  6. भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Science Education and Research-IISER), भोपाल तथा सीएलईईएन लिमिटेड (CLEEN Ltd.) के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  7. भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल और तुर्कू विश्वविद्यालय (University of Turku) फिनलैंड के मध्य वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सहयोग पर करार।
  8. भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल तथा लप्पीनरांता प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Lappeenranta University of Technology) के मध्य विज्ञान एवं शिक्षा में सहयोग पर करार।
  9. भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), तिरुवनंतपुरम तथा तुर्कू विश्वविद्यालय फिनलैंड के मध्य वैज्ञानिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सहयोग पर करार।
  10. हैदराबाद विश्वविद्यालय तथा पूर्वी फिनलैंड विश्वविद्यालय, फिनलैंड जोएंसू के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  11. भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), तिरुवनंतपुरम तथा अबो अकादमी विश्वविद्यालय, फिनलैंड के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  12. भारत के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक तथा तुर्कू विश्वविद्यालय फिनलैंड के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  13. हैदराबाद विश्वविद्यालय और हेलसिंकी विश्वविद्यालय के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  • उपर्युक्त 13 समझौतों के अलावा तीन वाणिज्यिक करार भी संपन्न हुए।
  1. लैब सिस्टम डायग्नोस्टिक ओय, कैवोगेन ओय एवं तुर्वफ्रू विश्वविद्यालय फिनलैंड तथा भारत के ट्रांसनेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  2. भारत के ट्रिवीट्रोन हेल्थकेयर लिमिटेड तथा फिनलैंड के तुर्कू विश्वविद्य़ालय के मध्य समझौता ज्ञापन।
  3. नार्डिक इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल एजुकेशन तथा ट्रिवीट्रोन हेल्थकेयर लिमिटेड के मध्य समझौता-ज्ञापन।
  • फिनलैंड की यात्रा के दौरान 15 अक्टूबर, 2014 को राष्ट्रपति को ‘मेडल ऑफ ऑनर ऑफ हेलसिंकी’ से सम्मानित किया गया।
  • 16 अक्टूबर को राष्ट्रपति ने फिनलैंड की संसद ‘एजुस्कुंटा’ (Eduskunta) को संबोधित किया।
  • फिनलैंड की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने ‘रोवानीमी’में सांताक्लाज के आधिकारिक कार्यस्थल का दौरा किया और उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात भी की।

आर्कटिक काउंसिल (Arctic Council)

आर्कटिक काउंसिल एक अंतर्सरकारी संगठन है। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र के निवासियों की समस्याओं का समाधान ढूंढना है। वर्तमान में इसके आठ सदस्य हैं-आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, कनाडा, अमेरिका एवं रूस। भारत सहित 12 अन्य देशों को आर्कटिक काउंसिल में ‘स्थायी पर्यवेक्षक राज्य’ (Permanent Observer States) का दर्जा मिला हुआ है।