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मौलाना आजाद सेहत योजना

अल्पसंख्यकों से संबंधित समग्र नीतियों और योजनाओं के निर्माण में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय (Ministry of Minority Affairs) की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस मंत्रालय की स्थापना 29 जनवरी, 2006 को की गई थी। इसका प्रमुख कार्य अल्पसंख्यकों की उन्नति तथा विकास का मूल्यांकन करना तथा उनके संवैधानिक तथा कानूनी रक्षोपायों की निगरानी करना है। ध्यातव्य है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 की धारा 2(सी) के तहत मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया गया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा 4 मार्च, 2014 को अल्पसंख्यकों हेतु मौलाना आजाद सेहत योजना तथा नालंदा परियोजना का शुभारंभ किया गया।

  • भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित बच्चों के स्वास्थ्य के लिए 4 मार्च, 2014 को मौलाना आजाद सेहत योजना का शुभारंभ किया।
  • मौलाना आजाद सेहत योजना का शुभारंभ, अल्पसंख्यकों की उच्च शिक्षा से संबंधित ‘नालंदा परियोजना’ के शुभारंभ के साथ ही हुआ।
  • वित्त मंत्री ने 2013-14 के बजट भाषण में ‘मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन’(MAEF) द्वारा वित्तपोषित संस्थानों में चिकित्सीय सुविधाएं प्रदान करने की घोषणा की थी।
  • इस उद्देश्य के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
  • मौलाना आजाद सेहत योजना के तहत मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन द्वारा आर्थिक रूप से सहायता प्राप्त संस्थान के प्रत्येक छात्र को ‘सेहत कार्ड’ जारी किए जाएंगे।
  • एक वर्ष में दो बार संस्थान द्वारा सुरक्षात्मक (Preventive) स्वास्थ्य जांच कैम्प, सरकारी या निजी अस्पतालों या नर्सिंग होम के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
  • सुरक्षात्मक स्वास्थ्य जांच के सभी निष्कर्षों को छात्र के सेहत कार्ड में दर्ज किया जाएगा।
  • एक औषधालय या स्वास्थ्य देखभाल केंद्र, मौलाना आजाद शिक्षा फाउंडेशन द्वारा आर्थिक रूप से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में स्थापित किया जाएगा।
  • असाधारण और पात्र मामलों में अधिसूचित अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब छात्रों को गंभीर बीमारियों जैसे गुर्दा, हृदय, यकृत, कैंसर और मस्तिष्क या घुटने की सर्जरी और रीढ़ की सर्जरी सहित अन्य गंभीर बीमारियों के मामले में सरकारी/मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

नालंदा परियोजना

  • अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार ने 4 मार्च, 2014 को ‘नालंदा परियोजना’ का शुभारंभ किया।
  • नालंदा परियोजना अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार का एक अभिनव ‘संकाय विकास कार्यक्रम’(Faculty Development Program) है।
  • यह देश में अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों/अल्पसंख्यक प्रबंधित महाविद्यालयों (एमएमडीसी) में जागरूकता, अभिमुखीकरण तथा विकास के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) से संबंधित कार्यक्रम है।
  • यह परियोजना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ (उ.प्र.) में प्रचार सहित विकास से जुड़ी योजनाओं का अनुसंधान/अध्ययन, मॉनीटरिंग और मूल्यांकन योजना के अंतर्गत शुरू की गई है।
  • अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय देश का एक प्रमुख अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय होने के साथ ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का एक प्रमुख नोडल स्टाफ कॉलेज भी है।
  • संकाय विकास कार्यक्रम का प्रमुख लक्ष्य संकाय उत्कृष्टता प्राप्त करना और संकाय सदस्यों को नए तरीकों को सीखने में मदद करना है।
  • संकाय विकास कार्यक्रम में शिक्षा, सहयोग, संसाधन और सहायता शामिल है।