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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा

हिमालय की गोद में बसे दक्षिण एशियाई स्थलबद्ध देश नेपाल का उल्लेख भारत के वैदिक काल की रचनाओं में मिलता है। महात्मा बुद्ध ने नेपाल के लुंबिनी में जन्म लेकर नेपाल की धरती को धन्य किया था। बाद में अशोक महान ने भी यहां पर अपने स्तंभ ब्राह्मी लिपि में स्थापित करवाए। नेपाल के अस्सी प्रतिशत से अधिक नागरिक हिंदू धर्मावलंबी हैं। यहां का समाज व यहां की संस्कृति भारत से मिलती-जुलती है, यहां के पर्वों, उपासना पद्धतियों में वैष्णव, शैव, बौद्ध, शाक्त सभी धर्मों का प्रभाव देखा जाता है। नेपाल के साथ भारत की इसी सांस्कृतिक, सामाजिक व धार्मिक साझी विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए भारत के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 से 4 अगस्त, 2014 को नेपाल की द्विपक्षीय यात्रा की।

  •  भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3-4 अगस्त, 2014 को की गई नेपाल की द्विपक्षीय यात्रा पिछले 17 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई पहली द्विपक्षीय यात्रा है।
  •  प्रधानमंत्री की नेपाल यात्रा पर संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी हुआ। इस वक्तव्य में कुल 35 बिंदु हैं।
  •  उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यह यात्रा 26 मई, 2014 को हुए शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए नेपाली प्रधानमंत्री सुशील कोईराला के निमंत्रण पर की।
  •  भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह यात्रा दोनों देशों के मध्य प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं धार्मिक विरासत को परिलक्षित करती है।
  •  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नेपाल की यात्रा पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार’ (National Security Advisor-NSA) अजीत डोवाल, विदेश सचिव सुजाता सिंह व अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं मीडिया पर्सन शामिल थे।
  •  भारतीय प्रधानमंत्री ने नेपाली संविधान सभा के अध्यक्ष ‘सुभाषचंद्र नेम्बांग’ से मुलाकात की तथा संविधान सभा व विधायी संसद को संबोधित किया।
  •  यह दूसरा अवसर था जब नेपाल की संविधान सभा को किसी विदेशी नेता ने संबोधित किया, इसके पहले वर्ष 1990 में जर्मन चांसलर हेल्मुट कोल ने नेपाली संविधान सभा में अपना भाषण दिया था।
  •  यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी ने नेपाल के विदेश मंत्री महेंद्र बहादुर पांडेय, कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ तथा नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव से मुलाकात की।
  •  दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने ‘भारत-नेपाल संयुक्त आयोग’ के पुनः सक्रिय होने तथा इसकी 25-27 जुलाई, 2014 को काठमांडू में तीसरी बैठक होने पर संतुष्टि जताई।
  •  उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेपाल यात्रा के ठीक पहले 25-27 जुलाई, 2014 को 23 वर्षों के बाद भारत-नेपाल संयुक्त आयोग(India-Nepal Joint Commission) की बैठक संपन्न हुई जिसकी अध्यक्षता दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने की। भारत की ओर से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नेतृत्व किया।
  •  ज्ञातव्य है कि भारत-नेपाल संबंधों के सभी पहलुओं का निरीक्षण करने के लिए वर्ष 1987 में एक संयुक्त आयोग का गठन हुआ था।
  •  दोनों देशों ने भारत व नेपाल के मध्य वर्ष 1950 की शांति एवं मित्रता संधि की समीक्षा, समायोजन एवं अद्यतनीकरण पर सहमति व्यक्त करते हुए ‘संयुक्त आयोग’ के निर्णय का स्वागत किया जिसमें वर्ष 1950 की संधि को संशोधित करने के लिए दोनों देशों के विदेश सचिवों को निर्देश दिए गए हैं।
  •  इस बीच दोनों देशों ने मुख्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जैसे-व्यापार, निवेश, जल विद्युत, कृषि, कृषि-प्रक्रमण, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति एवं खेल।
  •  इसके अतिरिक्त दोनों देशों ने भारत-नेपाल सीमा के विचाराधीन मुद्दों का समाधान करने की आवश्यकता जताते हुए सीमा पर निर्माण कार्यों, पुनरुद्धार व सीमा पर लगे खंभों की मरम्मत करने तथा अन्य तकनीकी कार्यों का उत्तरदायित्व संभालने के लिए गठित ‘बाउंड्री वर्किंग ग्रुप’ (Boundary Working Group-BWG) का स्वागत किया।
  •  दोनों देशों के मध्य स्वतंत्र, बहुआयामी व गैर सरकारी परिप्रेक्ष्य में संबंधों का भविष्य तलाश करने के लिए ‘इमिनेंट पर्संस ग्रुप ऑन नेपाल इंडिया रिलेशंस’ (EPG-NIR) का गठन किया गया।
  •  भारत ने नेपाल की ऊर्जा परियोजनाओं एवं अवसंरचात्मक विकास कार्यों के निष्पादन के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि सस्ते ऋण के रूप में उपलब्ध कराई।
  •  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा के दूसरे दिन एक और ऐतिहासिक पड़ाव तय किया। उन्होंने 4 अगस्त को ‘सावन के सोमवार’ के दिन 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक पशुपतिनाथ मंदिर में आराध्य देवता ‘शिव’ का दर्शन किया तथा उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर प्राधिकरण को 2500 किलोग्राम चंदन की लकड़ी उपहार स्वरूप दी।
  •  इसके अलावा पशुपतिनाथ मंदिर धर्मशाला के लिए भी अनुदान दिए।
  •  दोनों देशों ने ‘ऊपरी करनाली जल विद्युत परियोजना’ (900 मेगावॉट) पर GMR (भारत में अधोसंरचना विकास की प्रमुख कंपनी) तथा नेपाली निवेश बोर्ड के मध्य परियोजना विकास समझौता पर 45 दिनों के भीतर सहमति बनाने का निर्णय लिया।
  •  नेपाल ने भारत से जनकपुर, भैरहवा और नेपालगंज में तीन अतिरिक्त एयर इंट्री (Entry) प्वाइंट तथा सीमा सीधे पार करने के लिए मार्गों की अनुमति देने का अनुरोध किया जिससे क्षेत्रीय एयरपोर्ट पोखरा-भैरहवा-लखनऊ के बीच सीधी उड़ानें संभव हो सकें।
  •  भारत ने ‘भारत-नेपाल मैत्री शिक्षा कार्यक्रम’ के तहत नेपाली छात्रों को भारत के चुनिंदा विश्वविद्यालयों में लघु अवधि पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव भी दिया।
  •  भारत ने नेपाल के महेंद्र नगर जिले में महाकाली नदी पर बन रहे बहुपथीय यात्री पुल के निर्माण में सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की।
  •  इसके अलावा लुंबिनी को ‘बुद्ध सर्किट’ के तौर पर विकसित किए जाने की घोषणा की गई।
  •  भारत ने नेपाल के अनुरोध पर ‘कोसी पंप कैनाल’ एवं ‘कोसी पश्चिमी कैनाल सिस्टम’ के पुनर्वास तथा लिफ्ट सिस्टम  के साथ पश्चिमी गंडक कैनाल सिस्टम के पुनर्वास का कार्य करने पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की।
  •  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के सिंधुपलचौक जिले में हुए भूस्खलन में मृत लोगों के प्रति शोक प्रकट किया तथा गोरखा सैनिकों की भारतीय सेना में भागीदारी के लिए प्रशंसा की।
  •  उल्लेखनीय है कि भारत व नेपाल के मध्य वर्तमान में लगभग 4.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। भारत में लगभग 60 लाख नेपाली नागरिक कार्य कर रहे हैं। नेपाल के विभिन्न जिलों में चल रही 450 लघु विकास परियोजनाओं में भारत सहायता कर रहा है।
  •  नेपाल ने व्यापार-घाटे का मुद्दा उठाया तथा नेपाली उत्पादों पर ‘काउटंर वेलिंग ड्यूटी’ (CVD) को हटाने का अनुरोध भारत से किया। इसके अतिरिक्त वनस्पति तेल, कॉपर, एक्रेलिक यार्न तथा जिंक ऑक्साइड पर से मात्रात्मक प्रतिबंध हटाने की भी मांग की। भारत ने नेपाल में जल विद्युत के विकास से व्यापार घाटे की समस्या को दूर करने का आश्वासन दिया।
  •  भारत व नेपाल की सीमा खुली सीमा है। नेपाली व भारतीय नागरिक बिना वीजा व पासपोर्ट के सीमा के आर-पार आ जा सकते हैं।
  •   भूटान के बाद नेपाल की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पड़ोसी देशों के साथ बरती जा रही नीतियों से यह लगता है कि आने वाले समय में सार्क मजबूती से आगे बढ़ेगा तथा भारत अपने राष्ट्रीय हित को साधने में सफल रहेगा।