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पॉस्को इस्पात परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी

पॉस्को (पोहांग लौह एवं इस्पात कंपनी) एक बहुराष्ट्रीय इस्पात निर्माता कंपनी है। इसका मुख्यालय पोहांग, दक्षिण कोरिया में अवस्थित है। वर्तमान में पॉस्को की दो एकीकृत इस्पात इकाइयां दक्षिण कोरिया के पोहांग और ग्वाग्यांग में संचालित हैं। पॉस्को ने वैश्विक उदारीकरण की नीति का लाभ उठाते हुए अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए विश्व के कई देशों से समझौते किए हैं। इन संपन्न समझौतों के आधार पर पॉस्को विश्व की अग्रणी इस्पात निर्माता कंपनियों की सूची में चौथे स्थान पर पहुंच चुकी है। जून, 2005 में पॉस्को ने अपने व्यापार को विस्तार देने के लिए भारतीय राज्य ओडिशा से एक समझौता-ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षरित किया था। इस समझौते के तहत पॉस्को ने 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश से 12 मिलियन टन प्रति वर्ष की इस्पात उत्पादन क्षमता वाले एक इस्पात संयंत्र के निर्माण की योजना कार्यान्वित की थी। इस संयंत्र से उत्पादन वर्ष 2010 में प्रारंभ होना था। परंतु पर्यावरण संबंधी मंजूरी व भूमि अधिग्रहण संबंधी दिक्कतों के कारण पिछले 8 वर्षों से इस इस्पात संयंत्र का परिचालन प्रारंभ नहीं किया जा सका था। हालांकि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस परियोजना को वर्ष 2007 में प्रारंभिक स्वीकृति तथा वर्ष 2011 में अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी गयी थी। परंतु राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (National Green Tribunal) ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं के चलते इस पर मार्च, 2012 में रोक लगा दी थी। न्यायाधिकरण ने पर्यावरणीय मंजूरी पर पुनर्विचार करने के लिए सरकार को निर्देश दिया था। इस पर विचार करने के पश्चात केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जनवरी, 2014 में इस परियोजना को नए सिरे से स्वीकृति प्रदान कर दी है।

  • 9 जनवरी, 2014 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) एम. वीरप्पा मोइली ने पॉस्को इस्पात परियोजना को नए सिरे से अनुमति प्रदान कर दी।
  • उल्लेखनीय है कि इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हाई के 15-18 जनवरी, 2014 के मध्य संपन्न हुए भारत के आधिकारिक दौरे के एक सप्ताह पूर्व प्रदान की गयी।
  • मंत्रालय द्वारा पॉस्को इस्पात परियोजना को स्वीकृति कतिपय शर्तों के अधीन दी गई है जिसके अंतर्गत पॉस्को को केवल जगतसिंहपुर में स्थापित किए जाने वाले इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए ही अनुमति प्रदान की गई है।
  • कोरियाई कंपनी को खनन संयंत्र तथा पारादीप में एक कैप्टिव पोर्ट (Captive Port) स्थापित करने हेतु अभी मंजूरी नहीं दी गई है।
  • साथ ही यह पर्यावरणीय मंजूरी इस शर्त पर दी गयी है कि पॉस्को को अपने कुल निवेश का 5 प्रतिशत ‘उपक्रम सामाजिक प्रतिबद्धताओं’ (Enterprise Social Commitments) को पूरा करने पर खर्च करना होगा।
  • इससे परियोजना की कुल लागत में 600 मिलियन डॉलर से 12.6 बिलियन डॉलर की वृद्धि होने का अनुमान है।
  • उल्लेखनीय है कि यह भारत में सबसे बड़े एकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वाली परियोजना है।
  • उल्लेखनीय है कि यह परियोजना 4004 एकड़ भूमि पर स्थापित की जानी है।
  • परियोजना के प्रथम चरण का प्रारंभ करने के लिए पॉस्को को 2700 एकड़ क्षेत्र की आवश्यकता होगी जिसमें से ओडिशा सरकार द्वारा उसे 1700 एकड़ भूमि उपलब्ध करा दी गयी है।