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पश्चिमी घाट पारि-संवेदी क्षेत्र हेतु प्रारूप अधिसूचना जारी

पश्चिमी घाट, भारत के पश्चिमी तट पर स्थित महत्त्वपूर्ण भौगोलिक स्थलरूप हैं जो छः राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में कन्याकुमारी के उत्तर से लेकर ताप्ती नदी तक लगभग 1500 किमी. की लंबाई में विस्तृत हैं। पश्चिमी घाट को वैश्विक जैव-विविधता का खजाना माना जाता है। पश्चिमी घाट को विश्व के प्रमुख जैवविविधता वाले स्थलों हॉट स्पॉटकी श्रेणी में भी रखा गया है। वर्ष 2013 में यूनेस्को ने पश्चिमी घाट को अपनी विश्व विरासत की प्राकृतिक स्थलों की सूची में शामिल कर लिया था। वर्ष 2010 में केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा प्रो. माधव गाडगिल की अध्यक्षता में पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया था। गाडगिल पैनल ने समूचे पश्चिमी घाट को पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र या पारि-संवेदी क्षेत्र (ESA : Ecological Sensitive Area) घोषित करने और उसका प्रबंधन करने हेतु पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी प्राधिकरण (Western Ghats Ecology Authority) के गठन की अनुशंसा की थी। इस रिपोर्ट का प्रभावित राज्यों, विशेषकर केरल द्वारा प्रबल विरोध किया गया। रिपोर्ट की अव्यावहारिकता को लेकर आलोचना होने के बाद मंत्रालय द्वारा गाडगिल रिपोर्ट की समीक्षा हेतु योजना आयोग के सदस्य के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यसमूह का गठन किया गया। कार्यसमूह द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में पश्चिमी घाट क्षेत्र के लगभग 37 प्रतिशत भाग (प्राकृतिक भू-दृश्य का लगभग 90 प्रतिशत भाग) को पारि-संवेदी क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा की गई थी। इसके अंतर्गत लगभग 59,940 वर्ग किमी. का क्षेत्र है जो छः राज्यों में विस्तृत है। 2013 में इस रिपोर्ट को लागू करने की घोषणा के बाद इसका केरल राज्य में प्रबल विरोध हुआ तथा मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण में भी पहुंचा। केरल के कतिपय क्षेत्रों को प्रस्तावित ईएसए के दायरे से बाहर करने और ईएसए के विषय में अन्य संबंधित पक्षों के सुझाव/आपत्तियां प्राप्त करने हेतु एक प्रारूप (Draft) अधिसूचना हाल ही में जारी की गई।

  • 10 मार्च, 2014 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 3(3) के अंतर्गत जारी प्रारूप अधिसूचना में पश्चिमी घाट के 56,825 वर्ग किमी. क्षेत्र को पारि-संवेदी क्षेत्र अधिसूचित किया गया है।
  • प्रारूप अधिसूचना जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर संबंधित राज्य/पक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
  • प्रारूप अधिसूचना में प्रस्तावित क्षेत्र छह राज्यों यथा कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा, गुजरात और केरल में विस्तृत है।
  • प्रारूप अधिसूचना के अनुसार पारि-संवेदी क्षेत्र में खनन, तापीय विद्युत संयंत्र, नई निर्माण और विस्तार परियोजनाएं तथा ‘लाल’ (अत्यधिक प्रदूषित) प्रवर्ग के उद्योग प्रतिबंधित होंगे।
  • प्रारूप अधिसूचना में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा उपर्युक्त छह राज्यों के सहयोग से एक पश्चिमी घाट विनिश्चय सहायता और निगरानी केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • प्रस्तावित केंद्र पश्चिमी घाट की पारिस्थितिकी पर नजर रखेगा।
  • उल्लेखनीय है कि प्रारूप अधिसूचना में उल्लिखित ईएसए का क्षेत्रफल कस्तूरीरंगन समिति की मूल रिपोर्ट में अनुशंसित क्षेत्रफल से कम है।
  • केरल राज्य के 123 गांवों के आवास, बागान और खेती के क्षेत्र कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट में ईएसए के दायरे में आ रहे थे।
  • केरल राज्य द्वारा कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट का प्रबल विरोध करने के कारण केरल राज्य में समिति द्वारा सीमांकित 13,108 वर्ग किमी. के स्थान पर प्रारूप अधिसूचना में 9,993.7 वर्ग किमी. क्षेत्र को ही शामिल किया गया है।