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दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना

निवेश और व्यापार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विकसित की जा रही दिल्ली-मुंबई औद्यौगिक गलियारा परियोजनाभारत की सबसे बड़ी अवसंरचनात्मक परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना को भारत एवं जापान सरकार के संयुक्त प्रयासों से विकसित किया जा रहा है। यह गलियारा देश की राजधानी दिल्ली को व्यावसायिक राजधानी मुंबई से जोड़ेगा तथा इसकी कुल लंबाई 1,483 किमी. होगी। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए भारत और जापान सरकार के बीच दिसंबर, 2006 में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। अगस्त, 2007 में जापानी प्रधानमंत्री शिंजो एबे की भारत यात्रा के दौरान इस परियोजना पर अंतिम सहमति बनी। अंततः भारत सरकार ने दिल्ली और मुंबई के बीच मल्टी-मॉडल हाई एक्सल लोड डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर(Multi-model High Axle Load Dedicated Freight Corridor) नाम से औद्योगिक गलियारा स्थापित करने की घोषणा की।

  • 2 मार्च, 2014 को उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के प्रथम चरण की शुरुआत ग्रेटर नोएडा में की गई।
  • साथ ही, 3 मार्च, 2014 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा भी इस परियोजना के प्रथम चरण की शुरुआत मुंबई में की गई।
  • यह औद्योगिक गलियारा उत्तर-प्रदेश के दादरी से प्रारंभ होकर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पर समाप्त होगा।
  • यह गलियारा देश के 6 राज्यों से होकर गुजरेगा। इसका 77 प्रतिशत भाग राजस्थान (39 प्रतिशत) और गुजरात (38 प्रतिशत) से तथा शेष 23 प्रतिशत भाग हरियाणा (10 प्रतिशत), महाराष्ट्र (10 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश (1.5 प्रतिशत) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (1.5 प्रतिशत) से होकर गुजरेगा।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। इस परियोजना के प्रथम चरण (Phase-I) पर अनुमानित खर्च 90 से 100 बिलियन डॉलर है, जिसमें से 10 बिलियन डॉलर का निवेश जापानी कंपनियों द्वारा किया जाएगा।
  • इस परियोजना के साथ 9 वृहद् औद्योगिक क्षेत्र बनाने की योजना है; जिनका विस्तार 200 से 250 वर्ग किमी. के क्षेत्र में होगा।
  • साथ ही, हाईस्पीड फ्रेट कॉरिडोर, 6 हवाई अड्डे, 6 लेन वाले एक्सप्रेस-वे (दिल्ली से मुंबई के बीच) इस गलियारा परियोजना से जुड़े होंगे।
  • इस परियोजना के साथ कई औद्योगिक और निवेश क्षेत्र विकसित करने की योजना है जिससे देश में अधिक से अधिक निवेश को आकर्षित किया जा सके।
  • इस गलियारा परियोजना के बीच में 9 जंक्शन (Junction) बनाए जाएंगे जो देश के दूसरे राज्यों तक सड़क मार्ग से माल ढुलाई का काम करेंगे। साथ ही इसे रेलवे से भी जोड़ा जाएगा।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा का उद्देश्य औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर वैश्विक स्तरीय आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
  • इस परियोजना का लक्ष्य अगले 5 वर्षों के दौरान रोजगार की संभावना को दोगुना करना, औद्योगिक उत्पादन को तीन गुना करना और देश के निर्यात को चार गुना करना है।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना 4,36,486 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को प्रभावित करेगी जो पूरे भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 13.8 प्रतिशत है।
  • इस परियोजना से देश की 178 मिलियन जनसंख्या प्रभावित होगी जो कुल जनसंख्या का लगभग 17 प्रतिशत है।
  • इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए ‘दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन’(DMICDC) का गठन सरकार द्वारा किया गया है, जो 6 राज्यों में भूमि के अधिग्रहण का काम कर रही है।
  • उल्लेखनीय है कि इस गलियारा परियोजना में शामिल 6 राज्यों का देश के कुल कृषि उत्पादन में 50 प्रतिशत तथा निर्यात में 60 प्रतिशत का योगदान है।
  • इन राज्यों ने जनवरी 2000 से दिसंबर, 2006 तक देश में हुए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 50 प्रतिशत तक प्राप्त किया था।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के साथ भारत के 6 राज्यों में 11 निवेश क्षेत्र (Investment Region) और 13 औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Area) स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • उत्तर-प्रदेश के ‘दादरी-नोएडा-गाजियाबाद’को निवेश क्षेत्र तथा ‘मेरठ-मुजफ्फरनगर’ को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
  • दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा परियोजना के साथ ही वर्ष 2019 तक 7 नये औद्योगिक शहरों को विकसित करने का प्रस्ताव है, जो आकार व मापदंड में सिंगापुर जैसे होंगे।
  • इस गलियारा परियोजना के साथ 6 गैस आधारित विद्युत परियोजनाओं को स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिसके अंतर्गत 2-2 विद्युत गृह महाराष्ट्र और गुजरात में तथा 1-1 विद्युत गृह मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थापित किए जाएंगे।