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काले धन पर एसआईटी का गठन

16वें आम चुनाव में काला धन को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने वाले एनडीए गठबंधन के सत्ता में आने के बाद विदेशों में पड़े कथित तौर पर भारतीयों के काले धन को स्वदेश लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली मंत्रिमंडलीय बैठक में ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का अनुपालन करते हुए एक विशेष जांच दल(SIT-Special Investigating Team) का गठन करने का निर्णय किया है जिससे कर की चोरी और गैर-कानूनी गतिविधियों के जरिए विदेशों में जमा की गई भारी धनराशि की जांच की जा सके। पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने विदेशों में जमा काले धन पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि विदेशों में जमा काला धन केवल टैक्स की चोरी मात्र नहीं है, यह गंभीर अपराध, चोरी और देश की लूट का मामला है।

  •   27 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन की जांच के लिए एसआईटी के गठन की घोषणा की।
  •   सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एम.बी. शाह एसआईटी के अध्यक्ष हैं।
  •  साथ ही सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरिजित पसायत को एसआईटी का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
  •  इस उच्च स्तरीय समिति के सदस्य के रूप में 11 विभिन्न विभागों व एजेंसियों के प्रमुखों को सम्मिलित किया गया है-
  •  सचिव, राजस्व विभाग।
  •  डिप्टी गवर्नर, भारतीय रिजर्व बैंक।
  •  निदेशक, खुफिया ब्यूरो।
  •  निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय।
  •  निदेशक, सीबीआई।
  •  अध्यक्ष, सीबीडीटी।
  •  महानिदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो।
  •  महानिदेशक, राजस्व गुप्तचर।
  •  निदेशक, वित्तीय गुप्तचर इकाई।
  •  निदेशक, अनुसंधान एवं विश्लेषण शाखा।
  •  संयुक्त सचिव (FT&IR-1 ), सीबीडीटी।
  •   एसआईटी को हसन अली के मामले में और काले धन के अन्य मसलों में जांच, कार्रवाई करने और मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  •  एसआईटी के अधिकार-क्षेत्र में वे सभी मामले आएंगे, जिनमें या तो जांच शुरू हो चुकी है या लंबित है या जांच शुरू की जानी है या फिर जांच पूरी हो गई है।
  •  एसआईटी एक व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगी जिसमें आवश्यक संस्थागत ढांचा तैयार करना शामिल है जो देश को काले धन के खिलाफ लड़ाई में मदद करेगा। इसे अपनी रिपोर्ट समय-समय पर न्यायालय को देनी होगी।
  •  एसआईटी की पहली बैठक 2 जून, 2014 को नई दिल्ली में संपन्न हुई है।
                    स्विस नेशनल बैंक द्वारा जारी काले धन पर रिपोर्ट
  •  जून, 2014 में जारी स्विट्जरलैंड नेशनल बैंक की रिपोर्ट के अनुसार स्विस बैंकों में जमा भारतीय धन वर्ष 2013 के दौरान 43 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2.03 बिलियन स्विस फ्रैंक (14,000 करोड़ रुपये) तक पहुंच गया।
  •  स्विट्जरलैंड नेशनल बैंक के अनुसार वर्ष 2013 के अंत तक स्विस बैंकों में जमा बाहरी लोगों के धन में रिकॉर्ड कमी आई है। यह वर्ष 2012 के 1.39 ट्रिलियन स्विस फ्रैंक के स्तर से कम होकर वर्ष 2013 में 1.32 ट्रिलियन स्विस फ्रैंक हो गया।
  • वर्ष 2012 के दौरान स्विस बैंक में जमा भारतीयों के धन में अप्रत्याशित रूप से एक तिहाई की कमी आई थी, यह वर्ष 2011 के 2.03 बिलियन स्विस फ्रैंक से कम होकर वर्ष 2012 में 1.42 बिलियन स्विस फ्रैंक हो गया था।
  • स्विस बैंक में भारतीय धन (करोड़ रुपये में)

57augsept14

  • 1 स्विस फ्रैंक = 70 रुपये
  • स्विस बैंकों में जमा धन के संबंध में विभिन्न देशों की रैंकिंग
  •  स्विस बैंक में जमा धन के संबंध में जारी रैंकिंग में भारत का स्थान 58वां है।
  • स्विट्जरलैंड के बैंकों में जमा 1.6 ट्रिलियन डॉलर की कुल वैश्विक संपत्ति में भारतीयों से संबंधित जमा राशि का हिस्सा 0.15 प्रतिशत है।
  • ब्रिटेन 277 बिलियन स्विस फ्रैंक की जमा राशि के साथ इस सूची में प्रथम स्थान पर है और इसकी जमा वैश्विक संपत्ति में कुल हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है।
  • अमेरिका दूसरे (193 बिलियन स्विस फ्रैंक), वेस्टइंडीज तीसरे (100 बिलियन स्विस फ्रैंक), जर्मनी चौथे (52.4 बिलियन स्विस फ्रैंक) तथा ग्वेर्नसे (Guernsey) पांचवें (49.6 बिलियन स्विस फ्रैंक) स्थान पर है।
  • भारत के पड़ोसी देशों में चीन 30वें तथा पाकिस्तान 69वें स्थान पर है।
  •  वर्ष 2012 में स्विस बैंकों में पाकिस्तान के लोगों की जमा राशि 1.44 बिलियन स्विस फ्रैंक थी जो वर्ष 2013 में घटकर 1.23 बिलियन स्विस फ्रैंक रह गयी है।