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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही पूर्व में ब्रिटिश साम्राज्य के अंग रह चुके हैं तथा वर्तमान में दोनों राष्ट्रमंडल संगठन (Commonwealth of Nations) के सदस्य हैं। इसके अतिरिक्त दोनों देश संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य होने के साथ-साथ प्रमुख बहुपक्षीय निकायों यथा जी-20, चोगम, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, जलवायु एवं स्वच्छ विकास पर एशिया-प्रशांत भागीदारी (Asia-Pacific Partnership on Climate and Clean Development) और हिंद महासागर परिधि संघ (Indian Ocean Rim Association) के भी सदस्य हैं।

ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1941 में हुई थी जब सिडनी में भारत के व्यापारिक कार्यालय (Trade Office) की स्थापना हुई थी। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय उच्चायोग (High Commission) कैनबरा में तथा वाणिज्य दूतावास (Consulate) सिडनी, मेलबर्न तथा पर्थ में स्थापित है जबकि भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग नई दिल्ली में तथा वाणिज्य दूतावास मुंबई तथा चेन्नई में स्थित है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार 16.50 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का है जिसे वर्ष 2015 तक बढ़ाकर 40 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक संसाधनों का ऑस्ट्रेलिया एक प्रमुख स्रोत है। ऑस्ट्रेलिया प्रमुखतया भारत को कोयला, स्वर्ण, तांबा तथा जस्ता आदि का निर्यात करता है तथा भारत के लिए यूरेनियम तथा प्राकृतिक गैस का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत साबित हो सकता है। वास्तव में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया स्थित गॉरगोन गैस परियोजना (Gorgon Gas Project) से भारत को 20 वर्ष तक एलएनजी (LNG : Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति हेतु समझौते पर हस्ताक्षर वर्ष 2009 में ही किए जा चुके हैं।

विश्व में यूरेनियम के ज्ञात भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के पास है जबकि कजाख्स्तान तथा कनाडा के पश्चात ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है और यह प्रतिवर्ष लगभग 7000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है।

एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति होने के नाते भारत को अपनी नाभिकीय ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरेनियम की सख्त आवश्यकता है। वर्ष 2007 में जॉन हावर्ड के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भारत को यूरेनियम की बिक्री की सैद्धांतिक अनुमति प्रदान की थी। इसके लिए हावर्ड ने वर्षों से चली आ रही उस ऑस्ट्रेलियाई नीति को बदल दिया था जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT : Nuclear Non-Proliferation Treaty) पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों को यूरेनियम की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा था। हालांकि उसी वर्ष सत्ता में आई केविन रूड के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी की सरकार ने पुरानी नीति को पुनः बहाल करते हुए उन देशों को यूरेनियम निर्यात न करने की घोषणा की जो एनपीटी के सदस्य नहीं हैं। पुनः दिसंबर, 2011 में जूलिया गिलार्ड के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के 46वें राष्ट्रीय सम्मेलन में 185 प्रतिनिधियों के मुकाबले 206 ने भारत को यूरेनियम निर्यात किए जाने के पक्ष में मत दिया। इसके बाद वर्ष 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड की भारत यात्रा के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के मध्य असैन्य नाभिकीय ऊर्जा करार (Civil Nuclear Energy Agreement) हेतु समझौता-वार्ताओं का सिलसिला प्रारंभ हो गया। तब से अब तक समझौता-वार्ताओं के पांच चरण सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं। इसी क्रम में हाल ही में वर्तमान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबॉट की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के मध्य असैन्य नाभिकीय ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिससे ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए यूरेनियम मुहैया कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

  •   भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ‘टोनी एबॉट’ (Tony Abott) ने 4-5 सितंबर, 2014 को भारत की राजकीय यात्रा संपन्न की।
  •  टोनी एबॉट, नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद भारत यात्रा पर आने वाले दक्षेस देशों के अलावा किसी देश के पहले शासनाध्यक्ष हैं।
  •  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ 130 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत यात्रा पर आया था।
  •  5 सितंबर, 2014 को प्रधानमंत्री एबॉट का राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया।
  •  प्रधानमंत्री एबॉट ने 5 सितंबर को ही राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि और इंडिया गेट पर पुष्पांजलि अर्पित की।
  •  अपनी भारत यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भेंट की।
  •  प्रधानमंत्री एबॉट ने मुंबई का भी दौरा किया जहां उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री सी. विद्यासागर राव से भेंट की।
  •  उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय तथा मुंबई में स्थित एक क्रिकेट स्टेडियम का भी दौरा किया।
  •  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने दिल्ली और मुंबई में भारतीय उद्योगपतियों से भी मुलाकात की।
  •   नई दिल्ली में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री एबॉट ने उन्हें ऑस्ट्रेलियाई ऊन की बनी नेहरू जैकेट उपहार-स्वरूप दी, बदले में श्री मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को गीता की एक प्रति भेंट की।
  •  प्रधानमंत्री एबॉट अपने साथ हिंदू देवताओं की दो प्राचीन मूर्तियां भी लाए थे जो तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी हो गई थीं।
  •  नटराज एवं अर्द्धनारीश्वर की इन मूर्तियों को ऑस्ट्रेलिया स्थित आर्ट गैलरियों द्वारा खरीद लिया गया था।
  •  नटराज की मूर्ति 11वीं-12वीं शताब्दी के चोल राजवंश के समय की है जबकि अर्द्धनारीश्वर की प्रतिमा 10वीं शताब्दी की है।
  •  दोनों ही मूर्तियां ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रधानमंत्री को सौंप दीं।
  •   5 सितंबर, 2014 को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारतीय प्रधानमंत्री और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के मध्य बैठक संपन्न हुई जिसके बाद 36 बिंदुओं वाला संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया जिसके प्रमुख बिंदु निम्नवत हैं-
  •  प्रधानमंत्री एबॉट ने ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते भारतीय निवेश का स्वागत किया, भारतीय प्रधानमंत्री ने भी भारत में अवसंरचना, संसाधन, प्रौद्योगिकी तथा अन्य परियोजनाओं में ऑस्ट्रेलियाई निवेश का स्वागत किया।
  •  दोनों प्रधानमंत्रियों ने एक ‘व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते’ (CECA : Comprehensive Economic Co-operation Agreement) की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया जिससे द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश में महत्त्वपूर्ण विस्तार में मदद मिलेगी।
  •  दोनों प्रधानमंत्री व्यापार और कारोबारी मिशनों के नियमित आदान-प्रदान को बढ़ावा देने हेतु वर्ष 2015 के प्रारंभ में दिल्ली में भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापारिक शिखर सम्मेलन के आयोजन पर सहमत हुए।
  •  दोनों प्रधानमंत्रियों ने रक्षा, आतंकवाद से निपटने, साइबर नीति, अंतर्राष्ट्रीय अपराध, निरस्त्रीकरण और अप्रसार, मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन और शांतिरक्षण में बढ़ते सहयोग का स्वागत किया।
  •  दोनों नेताओं ने वर्ष 2015 में प्रस्तावित प्रथम द्विपक्षीय सामुद्रिक अभ्यास (Inaugural Bilateral Maritime Exercise) की तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया।
  •  ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों की ओर से श्री एबॉट ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हुए ‘गैलीपोली अभियान’ (Gallipoli Campaign) की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में वर्ष 2015 में होने वाले समारोह में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया।
  •  दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘ऑस्ट्रेलिया-भारत सामरिक अनुसंधान निधि’ (Australia-India Strategic Research Fund) की सफलता का स्वागत किया, जिसने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के माध्यम से उच्च प्रभावी ज्ञान भागीदारी उपलब्ध कराई है। साथ ही चार वर्ष की अवधि के लिए इस निधि के विस्तार की घोषणा की गई।
  •  दोनों प्रधानमंत्रियों ने जल-सहयोग पर समझौता-ज्ञापन का विस्तार करने की घोषणा की।
  •  दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ‘न्यू कोलंबो प्लान पहल’ (New Colombo Plan Initiative) का स्वागत किया, जिसके तहत युवा ऑस्ट्रेलियाई छात्रों को भारतीय संस्थानों में अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। इससे युवा और शैक्षिक आदान-प्रदानों एवं संबंधों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
  •  ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने श्री मोदी को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा का निमंत्रण दिया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।
  •  श्री मोदी नवंबर, 2014 में ब्रिसबेन में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के पश्चात ऑस्ट्रेलिया की द्विपक्षीय यात्रा करेंगे।
  •  उल्लेखनीय है कि वर्ष 1986 के बाद से भारत का कोई भी प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर नहीं गया है।
  •  वर्ष 1986 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए थे।
  •   दोनों प्रधानमंत्रियों के मध्य बैठक के पश्चात निम्नलिखित द्विपक्षीय समझौता ज्ञापनों/करारों पर हस्ताक्षर किए गए-

(i) परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोगों में सहयोग पर करार

इस करार के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को लंबी अवधि तक यूरेनियम की विश्वसनीय आपूर्ति की भूमिका निभा सकता है। इस करार में यूरेनियम की आपूर्ति, रेडियो आइसोटोपों के उत्पादन, परमाणु सुरक्षा तथा सहयोग के अन्य क्षेत्रों का प्रावधान है।

(ii) खेलों में सहयोग पर समझौता-ज्ञापन

   यह एमओयू खेल के क्षेत्र में कार्यक्रमों, अनुभव, कौशलों, तकनीकों एवं ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा।

(iii)  जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता-ज्ञापन का नवीकरण

   यह एमओयू जल संसाधन, विशेष रूप से नदी घाटी प्रबंधन में नीति एवं तकनीकी के अनुभवों की साझेदारी को बढ़ावा देगा।

(iv)  तकनीकी व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (TVET) में सहयोग पर समझौता-ज्ञापन

यह एमओयू, टीवीईटी प्रणालियों में सूचना एवं नीतिगत विचारों के आदान-प्रदान और सहयोगात्मक परियोजनाओं के संयुक्त कार्यान्वयन को बढ़ावा देगा। साथ ही सरकारों, उद्योग संगठनों, टीवीईटी निकायों के मध्य संबंध को सुकर बनाएगा।