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17वें एशियाई खेल संपन्न

एशियाई देशों की आपसी समानता और एकता का प्रतीक एशियाई खेल एक बहुराष्ट्रीय खेल आयोजन है जो हर चार वर्ष पर एशियाई खेल महासंघ के सदस्य देशों द्वारा बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।

हालांकि पहले एशियाई खेल मार्च, 1951 में भारत की राजधानी नई दिल्ली में संपन्न हुए लेकिन इसके पूर्व जापान के साम्राज्य, फिलीपींस द्वीप और चीन के मध्य वर्ष 1913 से सुदूर पूर्वी खेलों (Far Eastern Games) का आयोजन हो रहा था। पहले सुदूर पूर्वी खेल वर्ष 1913 में मनीला में आयोजित किए गए थे और वर्ष 1934 तक सुदूर पूर्वी खेलों के दस संस्करणों का आयोजन किया गया। लेकिन वर्ष 1937 में चीन-जापान युद्ध प्रारंभ होने के पश्चात वर्ष 1938 में ओसाका (जापान) में होने वाले सुदूर पूर्वी खेलों को रद्द कर दिया गया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कई एशियाई राष्ट्रों को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। नव स्वतंत्र हुए एशियाई देशों ने एक ऐसी प्रतियोगिता के आयोजन का समर्थन किया जिसके द्वारा विश्व को एशियाई प्रभुत्व दिखाया जा सके।

वर्ष 1948 के लंदन ओलंपिक के दौरान चीन और फिलीपींस के खिलाड़ियों ने सुदूर पूर्वी खेलों की बहाली का विचार उठाया परंतु भारतीय अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के तत्कालीन प्रतिनिधि गुरु दत्त सोंधी ने एशियाई एकता की भावना को प्रकट करने में सुदूर पूर्वी खेलों की बहाली को अपर्याप्त पाते हुए संपूर्ण एशियाई देशों का प्रतिनिधित्व करने में समर्थ नए तरह के खेलों की वकालत की। इसके बाद एशियाई एथलेटिक फेडरेशन की संस्थापना की मांग तेज होने लगी और आखिरकार 13 फरवरी, 1949 को एशियाई एथलेटिक फेडरेशन का नई दिल्ली में औपचारिक रूप से उद्घाटन हुआ। इसके साथ-साथ वर्ष 1950 में नई दिल्ली में प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन कराने की घोषणा की गई। मगर तैयारियों में देरी के चलते प्रथम एशियाई खेलों का आयोजन 4 से 11 मार्च, 1951 के मध्य ही संभव हो सका।

1951 के प्रथम एशियाई खेलों से लेकर 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों तक का विनियमन एशियाई खेल महासंघ (AGF : Asian Games Federation) द्वारा किया गया जबकि उसके बाद से अब तक ये खेल एशियाई ओलंपिक परिषद (OCA : Olympic Council of Asia) द्वारा आयोजित कराए जाते हैं। ओलंपिक खेलों के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता का दर्जा प्राप्त इन खेलों को ‘अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति’ (IOC : International Olympic Committee) से मान्यता प्राप्त है।

एशियाई ओलंपिक परिषद से संबद्ध सभी 45 सदस्यों को इन खेलों में भाग लेने की अर्हता प्राप्त है। इन 45 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के अतिरिक्त अतीत में इस्राइल ने भी एशियाई खेलों में प्रतिभाग किया है जिसे 1974 के एशियाई खेलों में उसकी अंतिम भागीदारी के पश्चात इन खेलों से निष्कासित कर दिया गया था। वर्तमान में इस्राइल यूरोपीय ओलंपिक समिति (EOC) का सदस्य है। अब तक केवल 9 देशों में ही एशियाई खेलों का आयोजन हुआ है। भारत, इंडोनेशिया, जापान, फिलीपींस, श्रीलंका, सिंगापुर तथा थाईलैंड केवल 7 ऐसे देश हैं जिन्होंने एशियाई खेलों के सभी संस्करणों में प्रतिभाग किया है।

एशियाई खेलों में अब तक भाग ले चुकी 46 राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों में से भूटान, मालदीव तथा तिमोर-लेस्ते 3 ऐसे देश हैं जिन्हें कभी भी कोई भी पदक प्राप्त नहीं हुआ है जबकि शेष 43 देश कम से कम एक पदक जीतने में कामयाब रहे हैं। एशियाई खेलों के अब तक के इतिहास में जापान तथा चीन अकेले ऐसे दो देश हैं जिन्हें ओवरऑल चैंपियन बनने का रुतबा हासिल हुआ है।

इंचियोन : 17वें एशियाई खेलों का मेजबान

17वें एशियाई खेलों की मेजबानी हासिल करने के लिए दो शहरों यथा-दिल्ली (भारत) और इंचियोन (दक्षिण कोरिया) ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी। अप्रैल, 2007 में कुवैत में एशियाई ओलंपिक परिषद की आम सभा के दौरान हुए मतदान में इंचियोन ने दिल्ली को 13 के मुकाबले 32 मतों से पीछे छोड़कर वर्ष 2014 के एशियाई खेलों की मेजबानी हासिल कर ली।

शुभंकर

कोरियाई प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित बेइंगयोंग द्वीप (Baengnyeong Island) में पाई जाने वाली सील मछलियों की तीन प्रतिकृतियों (Prototypes) को इंचियोन एशियाई खेलों का शुभंकर चुना गया था। इनको बरामे (Barame), चुमुरो (Chumuro) तथा विचुओन (Vichuon) नाम दिया गया था। कोरियाई भाषा में इनका अर्थ क्रमशः हवा, नृत्य एवं प्रकाश है।

उल्लेखनीय है कि मतदान से ठीक पहले इंचियोन की तरफ से एक नया प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था जिसमें अब तक एशियाई खेलों में कोई भी पदक न जीत पाने वाले देशों की सहायता हेतु 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाने का प्रावधान था। साथ ही इंचियोन की तरफ से सभी प्रतिभागियों को हवाई किराया तथा ठहरने का खर्च भी देने की घोषणा की गई थी जबकि भारत ने अपने मूल प्रस्ताव में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया था। बड़ी संख्या में लोगों का मत था कि भारत इन खेलों को आयोजित करने के प्रति अधिक उत्साहित नहीं था और यही उसकी बोली खारिज किए जाने का प्रमुख कारण था। इंचियोन, एशियाई खेलों का आयोजन करने वाला दक्षिण कोरिया का तीसरा शहर हो गया है। इसके पूर्व दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल (1986) और बुसान (2002) में इन खेलों का आयोजन किया जा चुका है।

मशाल रिले

17वें एशियाई खेलों की मशाल यात्रा पहले एशियाई खेलों के उद्घाटन स्थल नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम से 9 अगस्त, 2014 को प्रारंभ हुई। यह प्रथम अवसर था जब मशाल मेजबान देश के बाहर प्रज्वलित की गई। इसके बाद मशाल चीन के शानडोंग प्रांत स्थित ‘वेईहाई’ (Weihai) शहर से होती हुई 13 अगस्त, 2014 को इंचियोन पहुंची। साथ ही साथ 12 अगस्त, 2014 को इंचियोन के गंघवा द्वीप (Ganghwa Island) स्थित मणिसान पर्वत (Mountain Manisan) पर एक अन्य मशाल का प्रज्वलन किया गया। भारत में प्रज्वलित और इंचियोन में प्रज्वलित की गई मशाल 14 अगस्त, 2014 को मिला दी गई। इसके बाद मशाल दक्षिण कोरिया के 70 शहरों से होती हुई, 19 सितंबर, 2014 को उद्घाटन समारोह हेतु पुनः इंचियोन लाई गई।

17वें एशियाई खेलों का भव्य शुभारंभ

17वें एशियाई खेलों का उद्घाटन समारोह 19 सितंबर, 2014 को नवनिर्मित ‘इंचियोन एशियाड मेन स्टेडियम’ (Incheon Asiad Main Stadium) में आयोजित किया गया। एशियाई खेलों की ज्योति कौन प्रज्वलित करेगा, इसे लेकर अंतिम समय तक रहस्य बना हुआ था। अंततः यह सौभाग्य प्राप्त हुआ दक्षिण कोरियाई अभिनेत्री ली यंग-एइ (Lee Young-ae) को। पांच प्रमुख दक्षिण कोरियाई एथलीटों ने एशियाई खेलों की मशाल के साथ रिले पूरी की और फिर अभिनेत्री ली यंग-एइ ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अग्निकुंड प्रज्वलित किया। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हाई ने औपचारिक रूप से 17वें एशियाई खेलों के आरंभ की घोषणा की जिसके बाद आकाश आतिशबाजी से नहा गया।

स्लोगन

‘डाइवर्सिटी शाइंस हियर’ (Diversity Shines Here) अर्थात ‘यहां विविधता चमकती हैं, 17वें एशियाई खेलों का आधिकारिक स्लोगन (Slogan) था। यह स्लोगन इतिहास, संस्कृति एवं धर्म में एशिया की अद्भुत विविधता के महत्त्व को दर्शाता है।

दक्षिण कोरियाई तीरंदाज ओ जिन-ह्येक (Oh Jin hyek) और तलवारबाज नैम ह्यून-ही (Nam hyun-hee) ने खिलाड़ियों की तरफ से शपथ ग्रहण की। इसके बाद एशियाई ओलंपिक परिषद का ध्वज फहराया गया। विभिन्न देशों की मार्चपास्ट में नेपाल का दल सबसे पहले स्टेडियम में पहुंचा क्योंकि कोरियाई वर्णमाला के आधार पर सबसे पहले नेपाल का नाम ही आता है। भारत की ओर से मार्चपास्ट में पुरुष हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह ने ध्वजवाहक की भूमिका निभाई। भारत ने 17वें एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए 516 एथलीटों तथा 163 कोचों एवं सहयोगी स्टाफ सहित कुल 679 सदस्यीय दल भेजा था। इन खेलों में भारतीय दल के मिशन प्रमुख (Chef-de-Mission) भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के अध्यक्ष अदिली सुमारिवाला थे।

खेल प्रतिस्पर्धाएं एवं पदक तालिका

19 सितंबर से 4 अक्टूबर, 2014 तक चले इस विशाल खेल आयोजन में 36 खेलों की कुल 439 प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गईं। इन 36 खेलों में 28 खेल तो वे ही थे जिनका आयोजन वर्ष 2016 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भी होना है। इसके अतिरिक्त 8 गैर-ओलंपिक खेल यथा- बेसबॉल, टेन-पिन बाउलिंग, क्रिकेट, कबड्डी, कराटे, सेपक टकरा, स्क्वैश तथा वुशु की प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की गईं। पिछले एशियाई खेलों (वर्ष 2010 के) में शामिल रोलर स्पोर्ट, बोर्ड गेम्स (शतरंज, गो, जियांगकी), क्यू स्पोर्ट्स, सॉफ्टबॉल, डांसस्पोर्ट तथा ड्रैगन बोट जैसे खेलों का आयोजन इस बार नहीं किया गया।

प्रतीक चिह्न

17वें एशियाई खेलों के प्रतीक चिह्न (Emblem) की डिजाइन एक विशाल पंख की तरह है तथा इस पंख को चित्रित करने के लिए अंग्रेजी शब्द ‘एशिया’ (Asia) के प्रथम अक्षर ‘ए’ (A) की शृंखलाओं का प्रयोग किया गया है। इस प्रतीक चिह्न में पंख के ऊपर बाईं तरफ चमकते हुए सूर्य को दर्शाया गया है। इस प्रतीक चिह्न के द्वारा यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि एशियाई लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चमकीले सूर्य अर्थात एक उज्ज्वल भविष्य की ओर उड़ान भर रहे हैं।

एशियाई ओलंपिक परिषद के सदस्य सभी 45 देशों के 9501 एथलीटों ने 17वें एशियाई खेलों में प्रतिभाग किया। सऊदी अरब एकमात्र ऐसा देश रहा जिसकी तरफ से किसी महिला एथलीट ने इन खेलों में शिरकत नहीं की।

चीन एक बार फिर सर्वाधिक पदकों के साथ एशियाई खेलों में अपना दबदबा कायम रखने में कामयाब रहा जबकि दक्षिण कोरिया ने दूसरे और जापान ने तीसरे स्थान पर रहते हुए अपना अभियान समाप्त किया। उल्लेखनीय है कि चीन ने लगातार 9वीं बार पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया है। कुल प्रतिभागी 45 देशों में से 37 देश पदक तालिका में स्थान बनाने में सफल रहे।

17वें एशियाई खेलों की पदक तालिका में भारत आठवें स्थान पर रहा। भारत ने इस बार कुल 57 पदक जीते जिसमें 11 स्वर्ण, 10 रजत और 36 कांस्य पदक शामिल हैं। तुलना अगर पिछले एशियाई खेलों से की जाए, तो निश्चित तौर पर भारत को इस बार कम पदक प्राप्त हुए। ज्ञातव्य है कि 4 वर्ष पहले वर्ष 2010 के ग्वांगझू (चीन) एशियाई खेलों में भारत ने 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य सहित कुल 65 पदक जीते थे जो स्वर्ण पदकों के लिहाज से उसका दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तथा कुल पदकों के लिहाज से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। पिछले एशियाई खेलों के मुकाबले भारत इंचियोन एशियाड में पदक तालिका में नीचे खिसक गया लेकिन कुछ पल ऐसे भी आए जिसने पूरे देश को जश्न में डूबने का मौका दिया। बात चाहे पुरुष हॉकी के फाइनल में पाकिस्तान को रौंद कर सोना हासिल करने की हो या फिर एम.सी. मैरीकॉम के स्वर्ण पदक जीतने की, भारत को जश्न के कई मौके मिले। सरदार सिंह के नेतृत्व में भारत की पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में 16 वर्ष बाद ऐतिहासिक स्वर्ण पदक प्राप्त किया। दोहरी खुशी की बात यह रही कि भारत ने फाइनल में चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर ये कारनामा किया। इस स्वर्णिम सफलता से भारतीय हॉकी टीम को वर्ष 2016 में रियो डि जेनेरो (ब्राजील) में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए सीधे प्रवेश भी मिल गया। यह तीसरा अवसर है जब भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। इसके पहले भारतीय टीम वर्ष 1966 एवं वर्ष 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता रही थी। 1966 में जहां भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को ही मात दी थी वहीं 1998 में उसने दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया था। पांच बार की महिला बॉक्सिंग विश्व चैंपियन एवं लंदन ओलंपिक खेलों की कांस्य पदक विजेता भारतीय बॉक्सर एम.सी. मैरीकॉम ने 17वें एशियाई खेलों में महिला फ्लाईवेट श्रेणी (48-51 किग्रा.) में स्वर्ण पदक जीता। यह एशियाई खेलों में उनका पहला स्वर्ण पदक था। एक अन्य भारतीय महिला मुक्केबाज लैशराम सरिता देवी को लाइटवेट श्रेणी (60 किग्रा.) में कांस्य पदक प्राप्त हुआ। हालांकि विवादित सेमीफाइनल में हारा हुआ घोषित करने से क्षुब्ध सरिता ने पदक वितरण समारोह के दौरान प्रतिरोधस्वरूप कांस्य पदक स्वीकार करने से इंकार किया, जिसके चलते ‘अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ’ (AIBA) ने उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।

कुश्ती में इस बार भारत के हिस्से में 1 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक आए। कुश्ती के अखाड़े में इस बार सुशील कुमार की अनुपस्थिति खली लेकिन योगेश्वर दत्त ने फ्री स्टाइल स्पर्धा के 65 किग्रा. भार वर्ग में स्वर्ण जीतकर कुछ हद तक इसकी भरपाई कर दी।

सबसे मूल्यवान खिलाड़ी

जापान के तैराक कोसुके हागिनो (Kosuke Hagino) को 17वें एशियाई खेलों का ‘सर्वाधिक मूल्यवान खिलाड़ी’ (MVP : Most Valuable Player) घोषित किया गया। इन्होंने इंचियोन एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण, 1 रजत एवं 2 कांस्य पदकों सहित कुल 7 पदक जीते। 20 वर्षीय हागिनो ने तैराकी की 7 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया और सभी में पदक प्राप्त किए।

उल्लेखनीय है कि योगेश्वर एशियाई खेलों में पिछले 28 वर्षों में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए हैं। ज्ञातव्य है कि योगेश्वर से पूर्व करतार सिंह ने वर्ष 1986 में सियोल (द. कोरिया) में आयोजित 10वें एशियाई खेलों में हेवीवेट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।

इंचियोन एशियाई खेलों में इस बार भारत ने 28 खेलों में हिस्सा लिया जिसमें से उसे 14 खेलों में पदक प्राप्त हुए। भारत ने सर्वाधिक 13 पदक एथलेटिक्स में जीते।

भारत के स्वर्ण पदक विजेता

क्रम    नाम                      खेल         प्रतिस्पर्धा

  1. जीतू राय निशानेबाजी    पुरुष 50 मीटर पिस्टल
  2. रजत चौहान, संदीप कुमार एवं तीरंदाजी पुरुष टीम कंपाउंड

       अभिषेक वर्मा

  1. सौरव घोषाल, महेश मनगांवकर, स्क्वैश     पुरुष टीम

       हरिंदर पाल संधु एवं कुश कुमार

  1. योगेश्वर दत्त कुश्ती        पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किग्रा. भार वर्ग
  2. सीमा पूनिया एथलेटिक्स    महिला चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो)
  3. सानिया मिर्जा एवं साकेत माइनेनी टेनिस      मिश्रित युगल
  4. एम.सी. मैरीकॉमबॉक्सिंग      महिला 51 किग्रा. भार वर्ग
  5. पुरुष हॉकी टीम हॉकी         पुरुष हॉकी
  6. प्रियंका पवार, टिंटू लुका, मंदीप एथलेटिक्स महिला 4×400 मीटर रिले

       कौर, एम.आर. पूवम्मा

  1. महिला कबड्डी टीम कबड्डी       महिला कबड्डी

  2. पुरुष कबड्डी टीम कबड्डी   पुरुष कबड्डी

 

पदक तालिका

रैंक  देश       स्वर्ण रजत कांस्य   कुल

1     चीन        151    108     83    342

2     दक्षिण कोरिया 79      71     84    234

3     जापान        47      76     77    200

4     कजाख्स्तान   28      23     33      84

5     ईरान         21      18     18      57

6     थाईलैंड       12        7     28      47

7     उत्तर कोरिया  11      11     14      36

8     भारत        11      10     36      57

9     चीनी ताइपे    10      18     23      51

10   कतर         10        0       4      14

11   उज्बेकिस्तान   9      14     21      44

12   बहरीन        9        6       4      19

13   हांगकांग       6      12     24      42

14   मलेशिया       5      14     14      33

15   सिंगापुर       5        6     13      24

16   मंगोलिया      5        4     12      21

17   इंडोनेशिया     4        5     11      20

18   कुवैत          3        5       4      12

19   सऊदी अरब    3        3       1        7

20   म्यांमार        2        1       1        4

21   वियतनाम      1      10     25      36

22   फिलीपींस      1        3     11      15

23   पाकिस्तान     1        1       3        5

24   ताजिकिस्तान   1        1       3        5

25   इराक         1        0       3        4

25   सं. अरब अमीरात 1       0       3        4

27   श्रीलंका        1        0       1        2

28   कंबोडिया       1        0       0        1

29   मकाउ         0        3       4        7

30   किर्गिजस्तान    0        2       4        6

31   जॉर्डन         0        2       2        4

32   तुर्कमेनिस्तान   0        1       5        6

33   बांग्लादेश      0        1       2        3

33   लाओस        0        1       2        3

35   अफगानिस्तान  0        1       1        2

35   लेबनान        0        1       1        2

37   नेपाल         0        0       1        1

कुल योग 439          439          576          1454

अगला एशियाड जकार्ता में

इंचियोन में 16 दिन तक चले 17वें एशियाई खेल 4 अक्टूबर, 2014 को समाप्त हो गए। खेलों के समापन की घोषणा एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष शेख अहमद अल-फहद अल-सबाह ने की। समापन समारोह ‘इंचियोन की मधुर स्मृतियां’ (Our Cherished Memories of Incheon) के केंद्रीय विषय (Theme) पर आधारित था। इन खेलों के अगले संस्करण का आयोजन वर्ष 2018 में जकार्ता (इंडोनेशिया) में किया जाएगा। वैसे इंडोनेशिया इन खेलों का मूल मेजबान नहीं था। 18वें एशियाई खेलों की मेजबानी प्रारंभ में वियतनाम की राजधानी हनोई को प्रदान की गई थी। लेकिन बाद में वित्तीय परेशानियों के चलते वियतनाम की सरकार ने इन खेलों को आयोजित करने में अपनी असमर्थता जताई थी, जिसके बाद एशियाई खेलों की आयोजन समिति को एक नए आयोजक देश का चयन करना पड़ा। सितंबर, 2014 में एशियाई ओलंपिक परिषद की आम सभा में जकार्ता को 18वें एशियाई खेलों के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई। उल्लेखनीय है कि जकार्ता में एशियाई खेलों के चौथे संस्करण का आयोजन वर्ष 1962 में हो चुका है।