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हिंसक उग्रवाद के विरुद्ध एकता

(स्रोत : द हिंदू : 20 जनवरी, 2016)

मूल लेखक- बान की-मून

हिंसक उग्रवाद संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र पर सीधा आघात है और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
आतंकवादी समूहों दऐश (ISIS), बोको हराम और अन्य ने फूहड़ता से जवान लड़कियों का अपहरण किया, क्रमवार रूप से महिला अधिकारों का हनन किया, सांस्कृतिक संस्थाओं को नष्ट किया, धर्मों के शांतिपूर्ण मूल्यों को बिगाड़ा और संसार भर में बर्बरता पूर्वक हजारों लोगों को मार डाला। ये समूह विदेशी लड़ाकों के लिए आकर्षण बन गए हैं जो लुभावने नारों और सरल अनुरोधों के आसान शिकार बन जाते हैं।
हिंसक उग्रवाद की चुनौती किसी एक ही धर्म राष्ट्रीयता तथा जाति समूह तक सीमित नहीं है। आज विश्व भर में बड़ी संख्या में पीड़ितों में मुसलमान हैं। इस चुनौती को संबोधित करने के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया की आवश्यकता है और हमें इस प्रकार कार्य करने के लिए प्रेरित करती है ताकि समस्या बढ़ने के बजाय हल हो सके।
अनेक वर्षों के अनुभव से सिद्ध हो गया है कि अदूरदर्शी नीतियों, असफल नेतृत्व, तानाशाहीपूर्ण दृष्टिकोणों, सुरक्षा प्रबंधों पर एकांगी केंद्रण और मानवाधिकारों के प्रति बेपरवाही ने स्थिति को और अधिक बिगाड़ दिया है।
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवादी समूह केवल हिंसक गतिविधियां ही नहीं करते बल्कि ये तीव्र प्रतिक्रिया किए जाने के लिए भी उकसाते हैं। हमें ठंडे दिमाग से व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए। हमें डर द्वारा नियंत्रित नहीं होना चाहिए और न ही ऐसी प्रतिक्रिया करनी चाहिए जिसका ये दोहन करना चाहते हैं। हिंसक उग्रवाद से मुकाबला असफल नहीं होना चाहिए।
पिछले सप्ताह, 15 जनवरी को मैंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंसक उग्रवाद की रोकथाम के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत की है जो इस समस्या के उत्प्रेरकों को संबोधित करने के लिए एक व्यापक और व्यावहारिक दृष्टिकोण पर आधारित है।
यह हिंसक उग्रवाद पर केंद्रित है जो आतंकवाद के अनुकूल होता है।
योजना में वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर ठोस कदम उठाए जाने हेतु 70 से अधिक संस्तुतियों को रखा गया है जो पांच परस्पर संबंधित बिंदुओं पर आधारित हैं :-
प्रथम
हमें सर्वप्रथम निदान प्रस्तुत करना चाहिए-अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को कानून सम्मत तरीकों से रक्षा का पूर्ण अधिकार है लेकिन यदि इस समस्या को लंबी अवधि में हल करने के लिए हिंसक उग्रवाद के कारणों को संबोधित करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
हिंसक उग्रवाद का कोई एक ही रास्ता नहीं है। लेकिन हम जानते हैं कि जब बहुत से लोगों विशेषकर युवा लोगों को अपने लिए अवसरों में कमी और जीवन अर्थहीन लगता है तथा मुख्य धारा में इनके जुड़ाव की आकांक्षाएं टूटने के साथ-साथ राजनैतिक दायरे में कमी एवं मानवाधिकारों के हनन होने से उग्रवाद पनपता है।
जैसा कि हम सीरिया और लीबिया और अन्यत्र देखते हैं कि हिंसक उग्रवादी अनिर्णीत और लंबी लड़ाइयां करते हैं यहां तक कि बहुत ही प्रचंड। हम सफलता के आवश्यक अवयवों को भी जानते हैं : अच्छा प्रशासन, कानून सम्मत नियम, राजनैतिक भागीदारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छी नौकरियां। मानवाधिकारों के प्रति पूर्ण सम्मान।
हमें युवा लोगों तक पहुंचने और शांति निर्माता के रूप में उनकी शक्ति को पहचानने हेतु विशेष कदम उठाने की आवश्यकता है। महिलाओं का संरक्षण तथा सशक्तीकरण भी हमारी प्रतिक्रिया का केंद्र बिंदु होना चाहिए।
द्वितीय
चरित्रवान नेतृत्व तथा प्रभावी संस्थाएं :-विषाक्त विचार धाराएं सामान्य वातावरण से उत्पन्न नहीं होती हैं, भ्रष्टाचार और अन्याय रोष या विद्वेष के उत्पाद स्रोत हैं। उग्रवादी अलगाववाद भड़काने में निपुण होते हैं।
यही कारण है कि मैं नेताओ से, संयुक्त संस्थाओं का निर्माण करने हेतु कठिन परिश्रम करने का आग्रह कर रहा हूं, जो लोगों के प्रति जवाब देय हों। मैं नेताओं से लगातार कहता रहूंगा कि वे लोगों की समस्याओं को ध्यान से सुने और उन्हें संबोधित करने के लिए कार्य करें।
तृतीय
उग्रवाद की रोकथाम और मानवाधिकारों का प्रोत्साहन साथ-साथ चलना चाहिए-अनेक अवसरों पर राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक रणनीतियों में उचित प्रक्रिया के आधारभूत तत्त्वों एवं कानूनी नियमों के प्रति सम्मान की कमी होती है। आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की व्यापक परिभाषाएं बहुधा विरोधी समूहों आम जनता एवं मानवाधिकार संरक्षणों के कानून सम्मत क्रियाकलापों को आपराधिक गतिविधि घोषित करने में प्रयुक्त की जाती हैं। सरकारों को इन व्यापक परिभाषाओं को अपने आलोचकों को शांत करने हेतु प्रयुक्त नहीं करना चाहिए।
एक बार फिर हिंसक उग्रवादियों ने सोच समझकर इस प्रकार की अति-प्रतिक्रिया भड़काने की कोशिश की है। हमें इस जाल में नहीं फंसना चाहिए।
चतुर्थ
एक समग्र दृष्टिकोण :- योजना एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण का प्रस्ताव करती है। हमें संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ शांति और सुरक्षा, स्थिर विकास और क्षेत्रीय, राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तरों पर मानवाधिकार एवं मानवीय आधारों के प्रणेताओं के बीच की खाई को समाप्त कर देना चाहिए।
योजना में यह भी स्पष्ट है कि कोई एक ही मापदंड सभी समाधानों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। हमें मीडिया और निजी क्षेत्र के साथ-साथ कला, संगीत एवं खेल के प्रमुखों, युवा समूहों, महिला नेताओं एवं धार्मिक नेताओं समेत समाज से सभी को संलग्न करना चाहिए।
पंचम : यू.एन. की संलग्नता
मैं सदस्य राष्ट्रों द्वारा हिंसक उग्रवाद के विरुद्ध प्रयासों में सहायता के लिए यू.एन. तंत्र के माध्यम से मजबूत दृष्टिकोण अपनाए जाने की इच्छा रखता हूं।
सर्वोपरि रूप से योजना बहुत आवश्यक क्रिया और एकता की मांग करती है जो इस विपत्ति को इसकी सभी जटिलताओं के साथ संबोधित कर सके। आइए हिंसक उग्रवाद की रोकथाम के लिए साथ मिलकर प्रतिज्ञा करें।

अनुवादक
राजेश त्रिपाठी