हिंदी भाषण पर राष्ट्रपति की स्वीकृति

President's acceptance on Hindi speech

इकतालीस प्रतिशत हिंदी भाषी भारत में समय-समय पर हिंदी के आधिकारिक प्रयोग को बढ़ाने के लिए सिविल सोसायटी से लेकर संसद तक विचार-विमर्श होते रहे हैं। राजभाषा अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत राजभाषा पर संसदीय समिति का गठन सर्वप्रथम वर्ष 1976 में किया गया था। इसका समय-समय पर पुनर्गठन किया जाता है। राजभाषा पर गठित संसदीय समिति ने अपनी नौवीं रिपोर्ट वर्ष 2011 में राष्ट्रपति को सौंपी जिसे दोनों सदनों में प्रस्तुत करने तथा विभिन्न सिफारिशों पर विस्तृत विचार-विमर्श के उपरांत राजभाषा विभाग द्वारा अप्रैल, 2017 में प्रकाशित किया गया। जिसके महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित हैं।

  • उच्च पदों पर प्रतिष्ठित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री तथा सरकारी अधिकारी जो हिंदी पढ़ते एवं बोलते हैं, वे अपने भाषण में हिंदी को प्रमुखता देगें।
  • केंद्रीय एवं सीबीएससी बोर्ड में कक्षा 1 से 10 तक हिंदी को अनिवार्य रूप से शिक्षण विषय के रूप में सम्मिलित किया जाएगा।
  • गैर-हिंदी भाषी राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों में हिंदी भाषा में उत्तर लिखने एवं साक्षात्कार देने का विकल्प प्रदान किया जाएगा।
  • रेलवे के लिए भाषा की आवश्यकता वाले सिर्फ वही उपकरण खरीदे जाएंगे जिनमें लिपि के रूप में ‘देवनागरी’ का विकल्प हो।
  • संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को हिंदी माध्यम से लेखन का विकल्प प्रदान किया जाएगा।
  • ‘हिंदी’ को संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की भाषा बनाने के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय एक समयबद्ध कार्यान्वयन का प्रयास करेगा, जिसे संशोधित कर भारतीय विदेश मंत्रालय बजट सुनिश्चित कर कार्यक्रम बनाने पर विचार करेगा।
  • पूर्व में सभी कंपनियों को अपने उत्पादों पर हिंदी में विवरण देना अनिवार्य था जिसे संशोधित कर सरकारी, अर्द्धसरकारी कंपनियों तथा संगठनों तक निश्चित कर दिया गया है।
  • यात्री सुविधा के लिए रेलवे तथा एअर इंडिया की सभी सूचनाएं टिकटों पर हिंदी में लिखी जाएगी।
  • हिंदी अनुवादकों को विदेशी भाषाओं के अनुवादकों के समतुल्य वेतन प्रदान किया जाएगा।
  • इस प्रकार समय-समय पर राजभाषा पर गठित संसदीय समिति की सिफारिशों द्वारा हिंदी भाषा के आधिकारिक प्रयोग में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है जिससे हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पटल माना जा सकता है।

लेखक-दीपक चतु्र्वेदी