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स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार का उड़ान परीक्षण

Smart Anti-flight test airfield weapon

युद्ध के समय दुश्मन देश की हवाई-पट्टियों (Runways), बंकरों आदि को क्षतिग्रस्त कर उन्हें अनुपयोगी (Unusable) बनाने वाले बमों को ही ‘एंटी-एयरफील्ड हथियार’ (Anti-Airfield Weapon) की संज्ञा दी गई है। हवाई-पट्टियों के ध्वस्त हो जाने के कारण दुश्मन देश के लड़ाकू विमान हवाई हमलों को अंजाम देने हेतु इन पट्टियों से उड़ान ही नहीं भर पाते। वर्ष 1967 के अरब-इस्राइल युद्ध में इस्राइली वायु सेना ने मिस्र की वायु सेना द्वारा प्रयोग में लाई जा रही हवाई-पट्टियों को ध्वस्त करने में ऐसे ही हथियारों का प्रयोग किया था। भारत का ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) भी नवीनतम तकनीक से लैस ऐसे ही हथियारों का विकास करने हेतु प्रयासरत है।

  • 23 दिसंबर, 2016 को डीआरडीओ द्वारा भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30MKI से ‘स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार’ (Smart Anti-Airfield Weapon : SAAW) का उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।
  • यह परीक्षण ओडिशा तट के निकट चांदीपुर स्थित ‘एकीकृत परीक्षण रेंज’ (ITR) से किया गया।
  • इस स्मार्ट बम का वजन 120 किग्रा. तथा मारक दूरी (Range) 100 किमी. है।
  • इसका अर्थ यह है कि यह अत्याधुनिक बम हवा में किसी लड़ाकू विमान द्वारा दागे जाने के बाद जमीन पर 100 किमी. के दायरे में स्थित अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में सक्षम है।
  • स्वदेश में ही डिजाइन एवं विकसित इस स्मार्ट बम को जगुआर, सुखोई-30 MKI एवं राफेल जैसे विमानों से दागा जा सकता है।
  • उल्लेखनीय है कि मई, 2016 में बंगलुरू में जगुआर विमान से ही इसका पहला परीक्षण संपन्न किया गया था।
  • ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार ने सितंबर, 2013 में 56.58 करोड़ रुपये की लागत वाली SAAW परियोजना को मंजूरी प्रदान की थी।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा