स्पेस-एक्स : पुनर्चक्रीय रॉकेट का प्रथम प्रक्षेपण

Space X First launch of the recycled rocket

अंतरिक्ष पर विजय प्राप्त करने के सपने को रॉकेटों ने ही साकार किया है। अब तक अनेक प्रकार के रॉकेटों का विकास किया जा चुका है,जिनमें शामिल हैं-अमेरिकी डेल्टा एवं एटलस रॉकेट, यूरोपीय एरियन एवं रूसी प्रोटॉन रॉकेट, जापान का H-IIA रॉकेट, चीन का लांग मार्च रॉकेट और भारत के पीएसएलवी एवं जीएसएलवी इत्यादि। ये सभी रॉकेट ‘एक्सपेंडेबल प्रक्षेपण प्रणाली’ (Expendable Launch System) की श्रेणी में आते हैं अर्थात ये ऐसे रॉकेट हैं जिनका मात्र एक बार ही इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रमोचन के बाद अंतरिक्षयान/उपग्रह को अंतरिक्ष में पहुंचा कर ये रॉकेट जलकर नष्ट हो जाते हैं और अगले प्रमोचन के लिए एक नए रॉकेट की जरूरत पड़ती है। इस दृष्टि से अमेरिकी स्पेस शटल उपयोगी प्रणाली साबित हुई। स्पेस शटल ‘आंशिक रूप से पुनर्प्रयोज्य’ (Partially Reusable) अंतरिक्षयान प्रणाली थी, जिसमें ठोस रॉकेट बूस्टर एवं ऑर्बिटर तो पुनर्प्रयोज्य था जबकि बाह्य ईंधन टैंक ईंधन के खत्म हो जाने के बाद ऑर्बिटर से अलग होकर पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाता था और इस कारण इसका दोबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता था।

  • 30 मार्च, 2017 को कैलिफोर्निया स्थित निजी एयरोस्पेस कंपनी ‘स्पेस एक्स’ (Space-X) ने फाल्कन-9 रॉकेट की सहायता से संचार उपग्रह SES-10 को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया।
  • इस मिशन की खास बात यह है कि इसमें स्पेस-एक्स ने एक ऐसे रॉकेट का प्रयोग किया जिसका पहले भी एक बार प्रक्षेपण किया जा चुका है।
  • इसका अर्थ यह हुआ कि अमेरिकी स्पेस शटलों की सेवा-मुक्ति के बाद से यह पहला पुनर्प्रयोज्य कक्षीय मिशन था।
  • साथ ही यह पहला अवसर था जब किसी तरल ईंधन युक्त रॉकेट बूस्टर का द्वितीय कक्षीय मिशन के लिए पुनः प्रयोग किया गया।
  • उल्लेखनीय है कि नासा के स्पेस शटल में ठोस रॉकेट बूस्टर्स का प्रयोग किया गया था।
  • ज्ञातव्य है कि फाल्कन-9 एक द्विचरणीय रॉकेट है, जिसके पहले चरण में 9 मर्लिन (Merlin) इंजन एवं एल्युमीनियम-लीथियम मिश्रधातु के टैंक लगे हैं, जिसमें तरल ऑक्सीजन एवं केरोसीन (RP-1) प्रणोदक भरे गए हैं।
  • जबकि एक मर्लिन इंजन से युक्त द्वितीय चरण, प्रथम चरण के पृथक होने के बाद फाल्कन-9 के पेलोड को निर्धारित कक्षा में पहुंचा देता है।
  • फाल्कन-9 के प्रथम चरण को प्रक्षेपण के पश्चात अंतरिक्ष से लौटा कर समुद्र में खड़े किसी पोत पर लंबवत लैंड कराया जा सकता है या जमीन पर भी उतारा जा सकता है, जिससे भविष्य में उसका पुनः प्रयोग किया जा सके।
  • ज्ञातव्य है कि किसी रॉकेट का प्रथम चरण ही उसे ‘आंरभिक ठेल’ (Initial Thrust) प्रदान करता है।
  • आरंभ में स्पेस-एक्स ने फाल्कन-9 के द्वितीय चरण को भी अंतरिक्ष से वापस ला कर उसका पुनः प्रयोग करने की योजना बनाई थी, लेकिन यह चरण प्रथम चरण की तुलना में अधिक ऊंचाई तक जाता है, इसलिए इसकी पृथ्वी पर मूलरूप से सुरक्षित प्राप्ति संभव नहीं थी।
  • सद्यः मिशन में फाल्कन-9 रॉकेट में संलग्न प्रथम चरण का अप्रैल, 2016 में संपन्न एक मिशन में भी प्रयोग किया गया था, जबकि द्वितीय चरण नया था।
  • 8 अप्रैल, 2016 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए प्रक्षेपित CRS-8 पुनःआपूर्ति मिशन में ही इस प्रथम चरण का पहली बार प्रयोग किया गया था।
  • 30 मार्च, 2017 को आंशिक रूप से पुनर्प्रयोज्य फाल्कन-9 रॉकेट ने फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किए जाने के लगभग 32 मिनट बाद SES-10 उपग्रह को भूस्थिर अंतरण कक्षा (GTO) में स्थापित कर दिया।
  • SES-10 लक्जमबर्ग की कंपनी SES का उपग्रह है।
    प्रक्षेपण के कुछ मिनट बाद रॉकेट बूस्टर द्वितीय चरण से अलग होकर नियंत्रित रूप से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हुए अटलांटिक महासागर में तैनात एक पोत पर लंबवत रूप से लैंड कर गया।
  • उल्लेखनीय है कि अमेजन डॉट कॉम के संस्थापक जेफ बेजोस की कंपनी ‘ब्ल्यू ओरिजिन’ (Blue Origin) ने भी पूर्व में अपने ‘न्यू शेपर्ड रॉकेट’ (New Shepard Rocket) का सफलतापूर्वक पुनर्प्रयोग किया है।
  • लेकिन फाल्कन-9 जहां कक्षीय रॉकेट (Oribital Rocket) है वहीं न्यू शेपर्ड एक उप-कक्षीय रॉकेट (Suborbital Rocket) है।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा