सिनलाइट : विश्व का सबसे बड़ा कृत्रिम सूर्य

Sinlight is the world's largest artificial sun

हाइड्रोजन एक रंगहीन व गंधहीन गैस है जिसे पर्यावरणीय प्रदूषण से मुक्त भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। ज्ञात ईंधनों में प्रति इकाई द्रव्यमान ऊर्जा हाइड्रोजन में सबसे ज्यादा है और यह जलने के बाद उप-उत्पाद के रूप में जल का उत्सर्जन करती है, इसलिए यह न केवल ऊर्जा क्षमता से युक्त है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है।
जहां अंतरिक्ष में हाइड्रोजन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, वहीं पृथ्वी के वायुमंडल में शुद्ध हाइड्रोजन आसानी से उपलब्ध नहीं है। अत्यधिक हल्की होने के कारण हाइड्रोजन गैस की अधिकांश मात्रा का पृथ्वी के वायुमंडल से पलायन हो जाता है। हालांकि पृथ्वी पर हाइड्रोजन मिश्रित अवस्था (Compound form) में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है और इसका उत्पादन इसके यौगिकों के अपघटन द्वारा किया जाता है। उदाहरणस्वरूप, जल के विद्युत-अपघटन (Electrolysis) द्वारा हाइड्रोजन का उत्पादन संभव है। लेकिन, हाल ही में जर्मनी के अनुसंधानकर्ताओं ने एक ऐसा प्रयोग (Experiment) आरंभ किया जिसमें विद्युत की बजाए प्रयोग द्वारा उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा से प्रेरित अभिक्रिया के फलस्वरूप हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन संभव है।

  • 23 मार्च, 2017 को जर्मनी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्रणाली का परिचालन आरंभ किया जो हाइड्रोजन के उत्पादन द्वारा जलवायु परिवर्तन समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
  • ‘सिनलाइट’ (Synlight) नामक इस प्रणाली को ‘विश्व के सबसे बड़े कृत्रिम सूर्य’ (World’s Largest Artificial Sun) की संज्ञा दी गई है।
  • इस प्रणाली में 149 अत्यंत शक्तिशाली जीनॉन (Xenon) शॉर्ट-आर्क लैंपों के प्रयोग द्वारा कृत्रिम प्रकाश उत्पन्न किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है कि सिनेमाघर में स्क्रीन को प्रकाशित करने के लिए एक जीनॉन शॉर्ट-आर्क लैंप का प्रयोग किया जाता है।
  • उच्च ऊर्जा के 149 लैंपों से युक्त सिनलाइट प्रणाली पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले सूर्य के प्राकृतिक प्रकाश की तुलना में लगभग 10,000 गुना अधिक तीव्रता का प्रकाश उत्पन्न करने में सक्षम है।
  • सभी लैंपों को एक साथ एक ही बिंदु पर केंद्रित करने पर ये 3000oC से अधिक का तापमान उत्पन्न करने में सक्षम है।
  • इतनी अधिक ऊष्मा के प्रयोग द्वारा भविष्य में हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन संभव हो सकेगा जिसका प्रयोग वाहनों एवं विमानों में कार्बन-मुक्त ईंधन के रूप में किया जा सकेगा।
  • हालांकि अनुसंधानकर्ताओं का मुख्य लक्ष्य सूर्य के प्राकृतिक प्रकाश के प्रयोग द्वारा ही हाइड्रोजन ईंधन का उत्पादन करना है।
  • यह प्रणाली जर्मनी के ज्यूलिख (Julich) स्थित जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर रिसर्च में स्थापित है।

लेखक-सौरभ मेहरोत्रा