‘साथ’ कार्यक्रम

sustainable action for transforming human capital
  • क्या है?
    10 जून, 2017 को नीति आयोग द्वारा सहकारी संघवाद की कार्यसूची पर अमल के लिए ‘साथ’ (SATH : Sustainable Action for Transforming Human Capital) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम मानव पूंजी के रूपांतरण के लिए सतत क्रिया के रूप में है।
  • उद्देश्य
    इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों का कायाकल्प करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विभिन्न राज्यों को नीति आयोग से अपेक्षित तकनीकी सहायता प्राप्त होगी। इसके द्वारा स्वास्थ्य प्रणाली के लिए भविष्य के तीन रोल मॉडल राज्यों की पहचान और उनका निर्माण करना है।
  • कार्यक्रम का कार्यान्वयन
    नीति आयोग द्वारा इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन ढांचा विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही इसकी निगरानी एवं अन्वेषण व्यवस्था सुनिश्चित की जानी है। नीति आयोग अंतिम लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राज्यों के व्यवस्था तंत्र के साथ सहयोग करते हुए सुदृढ़ रोडमैप तैयार करेगा। इसके अंतर्गत संस्थागत उपायों के जरिए राज्यों की विभिन्न प्रकार की सहायता की जाएगी।
    ‘साथ’ कार्यक्रम का कार्यान्वयन नीति आयोग द्वारा ग्लोबल कंसल्टेंसी मैकिन्से एंड कंपनी और आईपीई ग्लोबल कंसोर्टियम के साथ किया जाएगा। इसके लिए इन कंपनियों के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया जाएगा।
  • राज्यों का चयन
    नीति आयोग द्वारा राज्यों के चयन हेतु त्रि-स्तरीय प्रक्रिया को परिभाषित किया गया है-
    1. रुचि की अभिव्यक्ति (Expression of Interest)
    2. राज्यों द्वारा प्रस्तुतियां (Presentations of the States)
    3. स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का आकलन (Assessment of Commitment to Health Sector Reforms)
    नीति आयोग द्वारा ‘साथ’ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को आमंत्रित किया गया था। 16 राज्यों ने इसमें अपनी रुचि दिखाई थी, जिनमें से 14 राज्यों ने अपनी प्रस्तुतियों को बिबेक देबराय की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष पेश किया था। इनमें से 5 राज्यों का चयन किया गया है। सफलता की संभाव्यता और प्रभाव के लिए शक्यता को प्रभावित करने वाले मानदंड के वास्तविक मूल्यांकन और अग्रिम मूल्यांकन के आधार पर तीन राज्यों का चयन किया जाएगा, जिनमें अंतिम रूप से इस कार्यक्रम को लागू किया जाएगा। राज्यों का अंतिम रूप से चयन विभिन्न मानदंडों जैसे-मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, मलेरिया के मामले आदि के आधार पर किया जाना है।
    जिन 14 राज्यों ने प्रस्तुतियों को दिया था उनमें, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, चंडीगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
  • क्या है नीति आयोग?
    1 जनवरी, 2015 को नीति आयोग (NITI : National Institution for Transforming India) अस्तित्व में आया। इसे योजना आयोग के स्थान पर स्थापित किया गया है। योजना आयोग की तरह इसकी स्थापना भी मंत्रिमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव द्वारा की गई है। अतः यह भी एक संविधानेतर तथा परामर्शदात्री संस्था है। इसका उद्देश्य राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना है।
नीति आयोग का गठन
अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री।
उपाध्यक्ष प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त।
गवर्निंग काउंसिल राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
सदस्य (i) पूर्णकालिक (ii) अंशकालिक
पदेन सदस्य केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य, प्रधानमंत्री द्वारा नामित।
विशेष आमंत्रित सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नामित।
मुख्य संचालन अधिकारी भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी, प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त।
क्षेत्रीय परिषद विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले जिनका संबंध एक से अधिक राज्य क्षेत्र से हो, के लिए।
  • निष्कर्ष
    एक वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित होने के लिए भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि उसके नागरिक स्वस्थ एवं जागरूक हों। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 जीने का अधिकार ही नहीं देता, बल्कि सम्मानपूर्वक पूर्ण स्वस्थता के साथ जीने का अधिकार देता है। लेकिन भारत में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थिति अत्यंत सोचनीय है। वैश्विक जनसंख्या में 17.5 प्रतिशत की भागीदारी वाले भारत की विश्व की बीमारियों में हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास हेतु नीति आयोग द्वारा ‘साथ’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों का कायाकल्प करना है। इसके लिए राज्यों को पर्याप्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।

लेखक-काली शंकर ‘शारदेय’