विश्व का सबसे बड़ा वायुयान

World's largest aircraft

विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में नए आविष्कारों ने लोगों की दैनिक जीवन शैली को आधुनिक और उन्नत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्तमान में विज्ञान के बढ़ते चहुंओर विकास के कारण मानव दुनिया के प्रत्येक क्षेत्र में अग्रसर दिखाई दे रहा है। मानव, विज्ञान की सहायता से प्रत्येक वस्तु को अपने काबू में करता चला जा रहा है। आधुनिक वैज्ञानिक आविष्कारों की सहायता से हम ऊंचे आसमान में उड़ सकते हैं और गहरे पानी में सांस भी ले सकते हैं। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए, नवीनतम ज्ञान, प्रौद्योगिकी अभियंता, विज्ञान और अभियांत्रिकी (Engineering) आवश्यक मौलिक वस्तुएं हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science and Technology) के अभाव में एक देश पिछड़ जाता है और उसके विकसित होने की संभावनाएं कम-से-कम हो सकती हैं। यदि हम तकनीकियों की मदद नहीं लेते; जैसे कंप्यूटर, इंटरनेट, विद्युत आदि तथा व्यापक रूप में वायुयान, अंतरिक्षयान, संचार उपग्रह, सैटेलाइट आदि, तो हम भविष्य में कभी भी आर्थिक रूप से मजबूत नहीं होंगे और सदैव पिछड़े हुए ही रहेंगे यहां तक कि हम इस प्रतियोगी और तकनीकी संसार में जीवित भी नहीं रह सकते हैं।
आविष्कारों के इसी क्रम में ब्रिटिश कंपनी ‘हाइब्रिड एयर ह्वीकल’ (Hybrid Air Vechicle : HAV) द्वारा निर्मित ‘एयरलैंडर 10’ वायुयान को 180 मिनट की उड़ान द्वारा संभालने और उसके उतरने की उन्नत तकनीक का तीसरा सफल परीक्षण किया गया। इसमें विमानों, हेलीकॉप्टरों तथा वायुयानों की सम्मिलित तकनीक शामिल है। हीलियम से भरा यह वायुयान व्यावसायिक अनुप्रयोग से केवल एक कदम की दूरी पर है।

  • ‘एयरलैंडर 10’ नामक हाइब्रिड वायुयान में विमानों, हेलीकॉप्टरों तथा वायुयानों की सम्मिलित तकनीक शामिल है, इसे 5 दिन तक 6100 मीटर (20000 फीट) की ऊंचाई पर उड़ान भरने के लिहाज से उन्नत किया गया है।
  • कंपनी का दावा है कि सभी परीक्षणों के सफल हो जाने के पश्चात इसका प्रयोग विभिन्न उद्देश्यों जैसे-निगरानी, संचार, सहायता पहुंचाने तथा यात्री विमान हेतु भी किया जा सकता है।
  • 10 मई, 2017 को 180 मिनट की उड़ान द्वारा वायुयान के संभालने और उसके उतरने की उन्नत तकनीक का तृतीय सफल परीक्षण किया गया।
  • 92 मीटर लंबा ‘एयरलैंडर 10’ अंशकालिक विमान है, यह 17 अगस्त, 2016 को अपने दूसरे परीक्षण उड़ान में पूर्वी इंग्लैंड में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
  • ध्यातव्य है कि ‘एयरलैंडर 10’ प्रथम बार एचवी-304 के रूप में यू.एस. आर्मी द्वारा मल्टी इंटेलिजेंस वाहन कार्यक्रम के तहत परीक्षण किया गया था।
  • इस परियोजना को मूल रूप से अमेरिकी सेना द्वारा वित्त-पोषित किया गया, परंतु अमेरिका के हटने के पश्चात ब्रिटेन इसका मुख्य निवेशक बन गया।
  • ‘एयरलैंडर 10’ को बनाने वाली कंपनी का नाम ‘हाइब्रिड एयर ह्वीकल’ (Hybrid Air vehicle : HAV) है।
  • विंग विमान, हेलीकॉप्टर और वायुयान प्रौद्योगिकी घटकों को समाहित करने की वजह से इसे संकर (Hybrid) भी कहा जाता है।
  • 92 मीटर (302 फीट) लंबाई के साथ ‘एयरलैंडर 10’ विश्व का सबसे बड़ा वायुयान है।
    कंपनी का दावा है कि शीघ्र ही एयरलैंडर 50 विकसित कर लिया जाएगा, जो 50 टन का भार वहन करने में सक्षम होगा।

लेखक-सुरेश पटेल