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रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा

द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में भारत-रूस संबंध अद्वितीय रहे हैं जो मैत्रीपूर्ण रिश्तों में भौगोलिक दूरी के बावजूद पड़ोसी की भांति प्रस्तुत होते रहे हैं। आजादी के आंदोलन में समर्थन से लेकर नियोजित अर्थव्यवस्था के विकास तक, आधारभूत उद्योगों की स्थापना से लेकर रणनीतिक रक्षा सामग्री तक भारत को विभिन्न स्तरों पर सोवियत संघ/रूस का अपेक्षित सहयोग प्राप्त हुआ है। यद्यपि द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत संघ का एक महाशक्ति के रूप में उभार और भारत द्वारा गुट-निरपेक्षता नीति का अनुसरण दोनों के संबंधों में सामंजस्य का द्वंद्व पैदा करते रहे हैं फिर भी तमाम वैश्विक मुद्दों यथा-उपनिवेशवाद की समाप्ति, रंगभेद नीति का विरोध, वैश्विक पूंजीवादी प्रभुत्व का अंत आदि के संबंध में दोनों के दृष्टिकोण में समानता के तत्व विद्यमान रहे हैं और शीतयुद्ध काल में दोनों के मध्य स्वाभाविक मैत्री व घनिष्ठ संबंधों का माहौल बना रहा है। सामरिक या सामयिक चाहे जैसी भी परिस्थितियां रही हों दोनों विश्वसनीय सहयोगी सिद्ध हुए हैं और रूस सहयोग के तमाम क्षेत्रों में मदद मुहैया कराने के साथ ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ में अपना ‘वीटो पावर’ उपयोग कर भारत को अनेक कूटनीतिक अंतर्राष्ट्रीय दबावों से बचाता रहा है।
शीतयुद्ध की समाप्ति के पश्चात परिवर्तित अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों ने भारतीय विदेश नीति को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। उदारीकरण के वैश्विक परिदृश्य में ज्यों-ज्यों आर्थिक संबंधों को वरीयता मिलती गई, त्यों-त्यों भारते अपने संबंधों को बहुआयामी स्तर पर शेष दुनिया के साथ जोड़ता गया और शीतयुद्ध काल में गुट निरपेक्षता आंदोलन के अग्रणी राष्ट्र रह चुके भारत ने यूरोपीय संघ और अमेरिका सहित अनेक पश्चिमी राष्ट्रों के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित कर लिए हैं। इस दौरान एक तरफ जहां व्यापक कूटनीतिक संबंधों के तहत भारत ने आसियान, जी-8, शंघाई सहयोग संगठन जैसे क्षेत्रीय मंचों के साथ संबंध स्थापित किए और पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने के पुरजोर प्रयासों के साथ अन्य प्रमुख एशियाई राष्ट्रों से मधुर संबंध कायम करने की कोशिशें प्रबल हुईं। वहीं सोवियत संघ के विघटन के बाद उसके उत्तराधिकारी रूस और भारत के संबंधों में काफी शिथिलता आ गई, दोनों के संबंधों में राजनयिक ठहराव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन अपने लगभग आठ वर्ष के कार्यकाल (1991-1999) के दौरान केवल एक बार जनवरी, 1993 में भारत की यात्रा पर आए और यह यात्रा भी महज औपचारिकता ही रही क्योंकि इस दौरान कोई बड़ी संधि होने के बजाय केवल वर्ष 1971 की मित्रता संधि का नाम बदलकर ‘मित्रता एवं सहयोग संधि’ कर दिया गया, इसके अलावा ‘रुपया-रुबल’ की पुरानी व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया यद्यपि इस दौरान तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने जुलाई, 1994 और एच.डी. देवगौड़ा ने मार्च, 1997 में रूस की यात्रा की और तत्कालीन रूसी प्रधानमंत्री विक्टर चेरनोमेर्दीन दिसंबर, 1994 में जबकि येवगेनी प्रिमाकोव दिसंबर, 1998 में भारत की यात्रा पर आए लेकिन संबंधों में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई, फिर 21वीं सदी की शुरुआत के साथ दोनों देशों के संबंधों में पुनः ताजगी और घनिष्ठता बढ़ने लगी और आज रूस, भारत का प्रमुख रक्षा सहयोगी व आधुनिक रक्षा उपकरणों की आपूर्ति का भरोसेमंद स्रोत है। वर्तमान में भारत की 70 प्रतिशत रक्षा आवश्यकताओं की पूर्ति रूस से हो रही है। आणविक ऊर्जा के उत्पादन में भी वह भारत का सतत सहयोग कर रहा है। विभिन्न क्षेत्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देश एक जैसा दृष्टिकोण धारित कर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों यथा-रिक (RIC- रूस, भारत, चीन), ब्रिक्स (BRICS-ब्राजील, रूस, भारत, चीन, द. अफ्रीका), जी-20 तथा एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) पर पारस्परिक भागीदारी को मजबूत बना रहे हैं।

  • भारत-रूस शिखर वार्ताएं
    भारत और रूस के बीच वर्षों से चली आ रही ‘आपसी भरोसे वाली दोस्ती’का एक महत्त्वाकांक्षी अध्याय तब शुरू हुआ जब नई सदी में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा प्रदान करने हेतु रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अक्टूबर, 2000 में भारत की चार दिवसीय यात्रा की जिसमें चार महत्त्वपूर्ण समझौतों के साथ दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए वार्षिक शिखर बैठक आयोजित करने का समझौता किया गया जिसकी वार्षिक बैठकें बारी-बारी से एक-दूसरे के यहां आयोजित की जाती हैं।
    दूसरी शिखर वार्ता के तहत नवंबर, 2001 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रूस यात्रा के दौरान अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के संबंध में संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए और इसी वर्ष सैन्य तकनीकी सहयोग पर भारत-रूस संयुक्त आयोग की प्रथम बैठक आयोजित की गई। 3 दिसंबर, 2002 को रूसी राष्ट्रपति पुतिन तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आए और इस दौरान रणनीतिक साझेदारी के दिल्ली घोषणा-पत्र, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक सहयोग विषयक संयुक्त घोषणा-पत्र के साथ छह अन्य द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
    नवंबर, 2003 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की रूस यात्रा के दौरान आपसी सहयोग के दस विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। उच्चस्तरीय शिष्टमंडल के साथ रूसी राष्ट्रपति पुतिन 3-5 दिसंबर, 2004 को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आए और रक्षा, ऊर्जा, आर्थिक एवं अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को सशक्त करने वाले 4 समझौतों एवं 5 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। 5-7 दिसंबर, 2005 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रूस यात्रा के दौरान बौद्धिक संपदा, सैन्य तकनीक, अंतरिक्ष शोध एवं सौर भौतिकी के क्षेत्र में चार समझौते हस्ताक्षरित किए गए।
    दो दिवसीय यात्रा पर 25 जनवरी, 2007 को रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत आए और इस दौरान विभिन्न विषयों पर संयुक्त बयान सहित 9 समझौतों हस्ताक्षर किए गए, अगली शिखर वार्ता दिसंबर, 2008 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव की भारत यात्रा के दौरान संपन्न हुई, दसवीं वार्षिक शिखर वार्ता हेतु तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 6-8 दिसंबर, 2009 को रूस की यात्रा की। जिसके तहत एक साझा घोषणा पत्र के साथ छह द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
    20 दिसंबर, 2010 को तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव भारत की यात्रा पर आए और रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु एवं ऊर्जा सहयोग सहित 30 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इस क्रम में हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 15 दिसंबर, 2011 को मास्को गए और पांच समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 23-24 दिसंबर, 2012 को राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा पर आए और इस दौरान दोनों देशों के बीच दस समझौतों पर हस्ताक्षर हुए जिसमें 18 साल तक चलने वाला वह समझौता भी शामिल रहा जिसके तहत रूस हर साल एक हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन करने वाला परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाएगा, इस क्रम में 20-22 अक्टूबर, 2013 को डॉ. मनमोहन सिंह रूस गए और दोनों देशों के बीच 64 बिंदुओं के एक संयुक्त वक्तव्य ‘विश्व शांति व स्थिरता के लिए सामरिक साझेदारी को मजबूत बनाना’ पर हस्ताक्षर किए गए।
  • 15वीं शिखर बैठक
    15वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता के लिए 10 दिसंबर, 2014 को दो दिवसीय यात्रा पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने 15 सदस्यीय उच्चस्तरीय राजनीतिक एवं वाणिज्यिक शिष्टमंडल के साथ भारत आए। यह उनकी राष्ट्रपति के रूप में पांचवीं और कुल छठवीं भारत की आधिकारिक यात्रा है।
    भारतीय प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति के बीच शिखर वार्ता 11 दिसंबर, 2014 को नई दिल्ली में हैदराबाद हाउस में हुई। इस शिखर बैठक के दौरान अगले दशक में भारत-रूस साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए ‘द्रुझबा-दोस्ती’ शीर्षक से संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया, जिसके मुख्य बिंदु निम्नवत हैं :-
  • ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों पक्ष तेल एवं गैस, इलेक्ट्रिक विद्युत उत्पादन, परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत और ऊर्जा कुशलता में आपसी सहयोग का विस्तार करेंगे।
  • दोनों देश कैंसर के इलाज, बायोइंफारमेटिक्स, बायोइमेजिंग और एचआईवी एड्स के टीकों का संयुक्त रूप से विकास करेंगे।
  • तकनीक और नवप्रवर्तन के क्षेत्र में दोनों पक्ष तकनीकी मदद से बने उत्पादों का संयुक्त रूप से डिजाइन, विकास, विनिर्माण, विपणन तथा वैज्ञानिक अंतःक्रिया में सहयेाग में वृद्धि करेंगे। ऐसे सहयोग को अंतरिक्ष अनुप्रयोग, रक्षा तकनीक, विमानन, नई प्रौद्योगिकी, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी तक आगे ले जाया जाएगा।
  • दोनों पक्ष अपनी अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक ज्ञान के आदान-प्रदान हेतु क्षमता-निर्माण के उद्देश्य से वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति का आदान-प्रदान कर दुर्लभ पृथ्वी सामग्रियों के प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के संयुक्त विकास की संभावना तलाशेंगे।
  • दोनों देश ईरान के रास्ते व्यापारिक गलियारे के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर’ को प्रभावी बनाने के साथ समय और लागत घटाने पर विचार करेंगे।
  • दोनों देश विश्व अर्थव्यवस्था में उभरते बाजारों की बढ़ती भूमिका में योगदान हेतु द्विपक्षीय आर्थिक व्यापार और निवेश को बढ़ावा देंगे। इस संबंध में रूसी कंपनियां भारत के व्यापक उद्योगों में अवसरों का प्रयोग कर ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को गति देंगी। भारत में डीएमआईसी (Delhi-Mumbai Industrial Corridor), स्मार्ट सिटीज, दूरसंचार, बिजली और सड़क जैसे व्यापक क्षेत्रों में रूसी निवेश को प्रोत्साहित करने पर बल दिया जाएगा तथा ‘ग्रीन कॉरिडोर परियोजना’ समझौता को अंतिम रूप प्रदान कर द्विपक्षीय व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के भुगतान को प्रोत्साहन देकर आगामी वर्षों में वस्तुओं और सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2025 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाया जाएगा। तब तक आपसी निवेश भी दोनों तरफ बढ़कर 15 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा।
  • रूस ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की पूर्ण सदस्यता प्राप्त करने की भारत की मंशा के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की।
  • रूस से भारत तक हाइड्रोकार्बन पाइपलाइन व्यवस्था के लिए निहित संभावनाओं का संयुक्त अध्ययन करेंगे।
  • भारत और रूस द्वारा उन आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध किया जाएगा जिनके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अनुमति नहीं है।
  • सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए रूस समर्थन देगा, इसके अलावा दोनों देश जी-20, ईएएस, ब्रिक्स और आरआईसी में एक-दूसरे से परामर्श और समन्वय करेंगे।
  • दोनों देश, आतंकियों के छिपने के सुरक्षित स्थानों को बिना किसी देरी के नष्ट करने और एक दशक के भीतर साझा क्षेत्र से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया किए जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • जनसंपर्क के क्षेत्र में सांस्कृतिक वार्षिक महोत्सवों, सांस्कृतिक संस्थानों के आदान-प्रदान, विचारकों, पर्यटन संवर्द्धन आयोजनों और अन्य पहलों से दोनों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र और अंतर्राष्ट्रीय खेल के मुद्दे पर दोनों आपसी संपर्क और विचार-विमर्श जारी-रखने के साथ-साथ भारत के पारंपरिक योग और आयुर्वेद के जरिए स्वास्थ्य और सक्रियता को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को प्रोत्साहन देंगे।
  • द्विपक्षीय समझौते
    शिखर बैठक के दौरान सहयोग के व्यापक भागीदारी वाले क्षेत्रों को इंगित करने के साथ दोनों नेताओं की मौजूदगी में अनेक महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के 20 दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए जो निम्न प्रकार हैं-
    1. रूस की शीर्ष कच्चा तेल उत्पादक कंपनी रोसनेफ्ट ने भारत के एस्सार ग्रुप को अगले दस वर्षों में दस अरब डॉलर मूल्य के एक करोड़ टन कच्चे तेल के निर्यात का समझौता किया है। इस समझौते को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
    2. रूसी बैंक वीटीबी, भारत के एस्सार ग्रुप को सामान्य कारपोरेट प्रयोजन के लिए एक अरब डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान करेगा।
    3. टाटा पावर और रूसी डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के बीच रूसी संघ के भीतर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की नई संभावनाओं की तलाश पर समझौता किया गया।
    4. उर्वरक सहयोग के क्षेत्र में एनएमडीसी की अगुआई में चार भारतीय कंपनियों का एक समूह रूसी खाद कंपनी एक्रॉन में दो अरब डॉलर की हिस्सेदारी खरीदेगा जिसमें एनएमडीसी (National Mineral Development Corporation) की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, इसके साथ एक्रॉन के साथ रूस में पोटॉश खनन का समझौता भी किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत अपनी आवश्यकता का संपूर्ण पोटॉश रूस और यूक्रेन से आयात करता है।
    5. न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) और रूसी कंपनी एएसई के बीच कुडनकुलम संयंत्र की तीसरी और चौथी इकाई की स्थापना को लेकर समझौता किया गया, इसके अलावा परमाणु समझौते के तहत रूस भारत को अगले 20 वर्षों में 12 परमाणु रिएक्टरों की आपूर्ति करेगा।
    6. नेविगेशन क्षेत्र में एरिने सिस्टम और रूस की ग्लोनास कंपनी के बीच नेविगेशन प्लेटफार्म के विकास का समझौता किया गया।
    7. प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया (PTI) और रूसी समाचार एजेंसी तास ने समाचारों के आदान-प्रदान में सहयोग से संबद्ध समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जिसके तहत दोनों देशों की समाचार एजेंसियां इंटरनेट के माध्यम से उनके क्षेत्रों के क्रियाकलापों से संबंधित समाचारों का आदान-प्रदान करेंगी।
    8. दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका सहित 17 मुद्दों पर व्यापक संवाद कायम करने का समझौता हुआ है।
    9. सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक एंड सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और रूसी संस्था स्कोलकोवो फाउंडेशन के बीच समझौता हुआ है।
    10. सैन्य सहयोग के क्षेत्र में रूस के रक्षा संस्थानों में भारतीय सशस्त्र बलों के कार्मिकों के प्रशिक्षण का समझौता किया गया है।
    11. स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और रसियन फाउंडेशन फॉर बेसिक रिसर्च के बीच समझौता हुआ है।
    12. ऑयल इंडिया लिमिटेड और रूस की जारूबेजेनेफ्ट के बीच आर्कटिक में हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों की संयुक्त खोज, उत्पादन और परिवहन में सहयोग का समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय कंपनियां रूस में तेल एवं गैस उत्खनन की नई परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी करेंगी।
    13. भारत की फिक्की और रूसी व्यापारिक संघ देलोवाया रोस्सिया के बीच व्यापारिक सहयोग का समझौता हुआ है।
    14. परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोग के क्षेत्र में तकनीकी डाटा और सूचनाओं की गोपनीयता को लेकर समझौता हुआ है।
    15. प्रत्यायन के क्षेत्र में तकनीकी सहयोग पर भारतीय गुणवत्ता परिषद तथा रूसी परिसंघ की संघीय प्रत्यायन सेवा के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
    16. एक बिलियन अमेरिकी डॉलर तक के सहनिवेश के अवसर पर ‘संरचना विकास वित्त निगम लि. (आईडीएफसी) और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया जिसके तहत दोनों देशों में निवेश के लिए एक फंड का निर्माण करने के संबंध में शर्तों एवं निबंधनों का वर्णन किया गया है।
    17. भारत के गमेसा विंड टरबाइन प्रा.लि. और रूस के रोटेक के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया, यह समझौता पवन विद्युत के उपकरण में दोनों कंपनियों के बीच सहयोग को संभव बनाएगा।
    18. न्यूक्लिर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लि. (NPCIL) और एटमस्ट्राय एक्सपोर्ट (ASE) के बीच कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना की तीसरी एवं चौथी इकाई के लिए सामान्य रूपरेखा करार का संपूरक समझौता किया गया यह कुडनकुलम परमाणु विद्युत परियोजना की 3 एवं 4 इकाई के कार्यान्वयन के लिए अप्रैल, 2014 में हस्ताक्षरित सामान्य रूपरेखा करार और तकनीकी वाणिज्यिक प्रस्ताव को साकार करेगा।
    19. भारत और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोगों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सामरिक विजन।
    20. वर्ष 2015-16 में तेल एवं गैस के क्षेत्र में सहयोग में वृद्धि के लिए अंतर-सरकारी करार की रूपरेखा के तहत सहयोग कार्यक्रम।
    निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि वैश्विक मंच पर रूस एक ऐसा देश हैं जिसके साथ भारत के संबंध शीतयुद्ध की समाप्ति और उसके बाद दोनों ही काल में अच्छे रहे हैं। प्रतिरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों का सहयोग अभूतपूर्व रहा है और आज भी रूस आधुनिक रक्षा उपकरणों व तकनीक का अहम स्रोत है। ऊर्जा सुरक्षा भारत की विदेश नीति का एक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है और रूस के साथ सहयोग का एक नया अवसर भी है। दोनों देश इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों के घनिष्ठ सांस्कृतिक संबंधों की पृष्ठभूमि इसमें सहायक हैं। अतः दोनों के बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मामलों में सहयोग की कई संभावनाएं मौजूद हैं फिर भी दोनों के मध्य व्यापार का स्तर बहुत कम है, जिसका विस्तार किए जाने की आवश्यकता है।
  • विश्व हीरा सम्मेलन
    नई दिल्ली में विज्ञान भवन में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित ‘विश्व हीरा सम्मेलन’ का उद्घाटन भारतीय प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त रूप से 11 दिसंबर, 2014 को किया गया। इस अवसर पर भारतीय प्रधानमंत्री ने मेजबान राष्ट्रपति के समक्ष तीन प्रस्ताव रखें जिनमें-
  • एक तो यह कि हीरा आपूर्तिकर्त्ता कंपनी अलरोसा ज्यादा से ज्यादा भारतीय कंपनियों के साथ सीधे दीर्घकालिक अनुबंध करें। दूसरा, अलरोसा और अन्य रूसी कंपनियां भारतीय एक्सचेंज पर सीधे व्यापार करें। तीसरा, रूस अपने व्यापारिक नियमों में सुधार करे ताकि रूस के जेवरात निर्माता अपने अपरिष्कृत हीरे भारत भेज सकें और बिना शुल्क का भुगतान किए पालिश्ड हीरों का पुनः आयात कर सकें।
  • इस मौके पर रूस की सबसे बड़ी अपरिष्कृत हीरा आपूर्तिकर्ता कंपनी ‘अलरोसा’ ने अपरिष्कृत हीरों की सीधी बिक्री के लिए 12 भारतीय कंपनियों के साथ समझौता किया।
  • इस समझौते के तहत अगले तीन वर्षों में 2.1 अरब डॉलर मूल्य के अपरिष्कृत हीरों की आपूर्ति भारत को की जाएगी।
  • इस अवसर पर भारत ने हीरा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ‘एक विशेष अधिसूचित क्षेत्र’बनाने का फैसला किया जिसमें प्रमुख खनन कंपनियां खेप के आधार पर अपरिष्कृत हीरों का आयात कर और न बिकने वाले हीरों का पुनर्निर्यात कर सकती हैं।