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रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 अधिसूचित

Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016, notified

31 अक्टूबर, 2016 को ’आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय’ द्वारा रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास अधिनियम), 2016 अधिसूचित किया गया। यह अधिनियम 15 मार्च, 2016 को ही लोक सभा द्वारा पारित किया जा चुका है।
इस अधिनियम का उद्देश्य रियल एस्टेट कारोबार को विनियमित करना तथा प्रवर्तकों (Pramoters) के घोटालों से संपत्ति खरीददारों के हितों की रक्षा करना है।
इसके लिए अधिनियम में ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ के गठन का प्रावधान किया गया है। जिनकी अधिकारिता राज्य स्तर की होगी।

  • यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत में प्रभावी है।
  • अधिनियम से संबंधित मुख्य प्रावधान
  • प्रत्येक प्रॉपर्टी एजेंट का ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ में पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • 500 वर्ग मीटर या 8 अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का 60 दिन के भीतर निपटान का प्रावधान किया गया है।
  • प्रवर्तक द्वारा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के समक्ष परियोजना के पंजीकरण के लिए आवेदन करने के तीन माह के भीतर (वर्तमान में जारी परियोजना के लिए संचित किए गए धन का इस्तेमाल न हो पाने की स्थिति में) अप्रयुक्त धन का 70 प्रतिशत एक अलग खाते में जमा किया जाएगा।
  • प्रवर्तक, खरीददारों को उनके हितों को पूर्ण सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक स्वीकृत योजना की पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
  • इस प्रकार प्रवर्तक उपभोक्ता की सहमति के बिना योजना और डिजाइन में बदलाव नहीं कर सकेंगे।
  • इन प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन एक चूक के रूप में माना जाएगा और उस मामले में प्रवर्तक और खरीददार अनुबंध को समाप्त कर सकते हैं।
  • बिल्डर द्वारा खरीददारों को निर्धारित समय- सीमा के भीतर तैयार अपार्टमेंट उपलब्ध कराना होगा अन्यथा समय-सीमा समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर खरीददार प्रवर्तक/बिल्डर से अपनी धनराशि ब्याज सहित वसूलने का हकदार होगा।

लेखक-विक्रम प्रताप सिंह