मासिक पत्रिका जुलाई,2017 पी.डी.एफ. डाउनलोड

magazine july 2017

इसरो की उपलब्धियों के आकाश में महानवत्र सदृश एक अभिनव तारा तब प्रकाशमान हो उठा जब 5 जून, 2017 को देश का सबसे भारी और शक्तिशाली स्वदेशी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-III अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया गया। इसरो के चेयरमैन ए.एस. किरण कुमार ने कहा है कि यह हमारे लिए ऐतिहासिक है। यह रॉकेट 4 टन वजनी संचार उपग्रहों को ऊपरी कक्षा में पहुंचाने की क्षमता रखता है। यह रॉकेट मानव मिशन के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में 10 टन वजनी कैप्सूल को भी ले जा सकता है। जीएसएलवी मार्क-III (उपनाम-फैट ब्वॉय) अपने साथ 3136 किग्रा. का संचार उपग्रह जीसैट-19 लेकर गया था। यह उपग्रह मिनिएचराइज्ड हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो इलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम्स एक्सेलरोमीटर, कू-बैंड टीटीसी ट्रांसपोंडर और स्वदेशी लिथियम आयन बैटरी जैसी तकनीकों का परीक्षण करेगा। यद्यपि कि यह जीएसएलवी मार्क-III की पहली विकासात्मक उड़ान है, किंतु इसकी शानदार कामयाबी इसरो की भावी महान उपलब्धियों की आधारशिला बनेगी। इस अंक के आवरण आलेख में ‘‘जीएसएलवी मार्क-III : पहली विकासात्मक उड़ान’’ पर ही सामग्री का प्रस्तुतीकरण किया गया है।
किसी राष्ट्र प्रमुख की विदेश यात्रा निःसंदेह राष्ट्रहित से प्रेरित होती है, किंतु देश विशेष की यात्रा में निश्चित ही कुछ निहित उद्देश्य होते हैं। प्रधानमंत्री की सद्यः यूरोप यात्रा व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में पारस्परिक भागीदारी के उन्नयन के मूल विचार से प्रेरित थी। सभी 4 देशों की यात्राओं को सामयिक आलेख में प्रस्तुत किया गया है। 21 जून, 2017 को ‘द हिंदू’ समाचार-पत्र में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने अपने साक्षात्कार में उद्धृत किया है कि-कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर पुनर्विचार किया जा सकता है। श्री बासित ने यह भी कहा है कि ,जब तक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का फैसला नहीं आ जाता, तब तक उन्हें फांसी नहीं दी जाएगी, भले ही फैसला आने में दो-तीन वर्ष लग जाएं। ऐसे बयानों से स्पष्ट है कि कुलभूषण जाधव प्रकरण में भारतीय प्रयास एकदम सही दिशा में है। इस विषय पर सामयिक आलेख भी इस अंक में प्रस्तुत है।
विश्व के सात सर्वाधिक विकसित एवं औद्योगिक देशों के अनौपचारिक संगठन G-7 का 43वां शिखर सम्मेलन इटली के नगर ताओरमिना में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन का संपूर्ण लेखा-जोखा इस हेतु प्रस्तुत सामयिक आलेख में वर्णित है।
इस अंक से आपकी पत्रिका अब नए आकार एवं साज-सज्जा के साथ प्रस्तुत है। अक्षरों के फांट साइज में भी परिवर्तन किया गया है। लेकिन इन परिवर्तनों के बावजूद पत्रिका के मूलाधार यानी यथार्थता (Accuracy), वस्तुपरकता (Objectivity), निष्पक्षता (Fairness), संतुलन (Balance) एवं स्रोत (Source) पर ध्यान देने की नीति से रंचमात्र भी विचलन पाठक नहीं महसूस करेंगे।
पाठकों की रुचियों को ध्यान में रखते हुए और भी सकारात्मक परिवर्तन समय-समय पर किए जाएंगे। किसी परिवर्तन से यदि आप सहमत न हों, तो हमें लिख भेजें।

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