मासिक पत्रिका अगस्त,2017 पी.डी.एफ. डाउनलोड

देश के 15वें राष्ट्रपति चुनाव में क्या खास है? यह महज एक संख्या है या कुछ और। बकौल महामहिम, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ‘‘कितने ऐसे रामनाथ होंगे, जो खेती कर रहे होंगे, बारिश में भीग रहे होंगे, जीवन के लिए संघर्ष कर रहे होंगे। आज परौंख गांव का कोविंद उन्हीं का प्रतिनिधि बनकर राष्ट्रपति भवन जा रहा है।’’ मिट्टी के घर, कच्ची दीवारों और फूस की छत के नीचे पला-बढ़ा कोई शख्स अपनी योग्यता और ईमानदारी के बल पर देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है, यह प्रत्यक्ष होना ही इस चुनाव की विशेष बात है। यही हमारे लोकतंत्र की खासियत और खूबसूरती है। राष्ट्रपति का पद दलीय राजनीति से ऊपर है, सभी राष्ट्रपति महोदय इस बात को साबित करने में सफल रहे हैं। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने भी शपथ के बाद अपने प्रथम भाषण में इसी बात को दोहराते हुए कहा है- ‘‘देश की सफलता का मंत्र उसकी विविधता है। विविधता ही हमारा वह आधार है, जो हमें अद्वितीय बनाता है। इस देश में हमें राज्यों और क्षेत्रों, पंथों, भाषाओं, संस्कृतियों, जीवन शैलियों जैसी कई बातों का सम्मिश्रण देखने को मिलता है। हम बहुत अलग हैं, लेकिन फिर भी एक हैं और एकजुट हैं।’’ न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का मूल मंत्र हमें आपस में जोड़ता है। 15वें राष्ट्रपति चुनाव का समग्र विश्लेषण इस अंक के आवरण आलेख में किया गया है।

वस्तु एवं सेवा कर का शुभारंभ भारत के आर्थिक क्षेत्र की ऐतिहासिक परिघटना है। दृढ़ निश्चय के साथ 1 जुलाई, 2017 को यह कर प्रणाली लागू कर दी गई। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कर प्रणाली में प्रारंभ में भले ही कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़े, लेकिन यह सरल, तीव्र एवं दक्ष कर प्रणाली साबित होगी। इस अंक में हम ‘वस्तु एवं सेवा कर का शुभारंभ’ सामयिक आलेख प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसमें इस कर प्रणाली का समग्र विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
डोकलाम जैसे सीमा-विवाद में भारत-चीन भले ही एक-दूसरे के विपरीत उपस्थित हों, किंतु तमाम वैश्विक मंचों पर भारत-चीन एक पांत में खड़े नजर आते हैं। ऐसा ही अवसर जी-20 देशों के 12वें शिखर सम्मेलन के दौरान भी आया। जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में संपन्न जी-20 शिखर सम्मेलन पर सामयिक आलेख पत्रिका के इस अंक में प्रस्तुत किया जा रहा है। आलेख का अध्ययन कर पाठक इस सम्मेलन के संपूर्ण पक्ष से परिचित हो सकते हैं।
पीएसएलवी-सी38 द्वारा कार्टोसैट-2 शृंखला के उपग्रह का सफल प्रक्षेपण पीएसएलवी अभियान की एक और विजय है। अब तक के कुल 40 अभियानों में यह 39वां सफल अभियान था। सद्यः प्रक्षेपित उपग्रह लगभग 5 वर्षों तक सुदूर संवेदी सेवाएं प्रदान करेगा। प्रस्तुत सामयिक आलेख में पीएसएलवी एवं कार्टोसैट का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत किया गया है।
4 जुलाई, 2017 को 3 दिवसीय यात्रा पर इस्राइल पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इस्राइल यात्रा है, साथ ही यह पहला अवसर है, जब भारत से गए कोई राजनेता इस्राइल की यात्रा के साथ फिलिस्तीन न गए हों। यह दर्शाता है कि भारत राजनय में इस्राइल-फिलिस्तीन संतुलन के बजाय इस्राइल को ज्यादा महत्व देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा पर संपूर्ण विमर्श इस हेतु प्रस्तुत आलेख में देखा जा सकता है।

इस अंक से पाठकों के लाभार्थ 2 नई पहलों का शुभारंभ हम कर रहे हैं-
(1) महत्वपूर्ण टॉपिक्स पर प्रस्तुत आरेखों के माध्यम से तथ्यों को स्मरण योग्य बनाने की पहल।
(2) G.S. प्वाइंटर की नई शृंखला की शुरुआत
G.S. प्वाइंटर शृंखला के प्रथम अंक में हम प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास के परीक्षोपयोगी बिंदुओं को प्रस्तुत कर रहे हैं।
पाठकों से अनुरोध है कि इस अंक के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवश्य अवगत कराएं।

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