मार्चांत, 2016 में भारत का विदेशी ऋण

India's foreign debt in March 2016

मानक प्रथा के अनुसार, भारत के विदेशी ऋण के आंकड़े त्रैमासिक आधार पर प्रकाशित किए जाते हैं। कैलेंडर वर्ष की प्रथम दो तिमाहियों (जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून) के आंकड़े ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) द्वारा जबकि अंतिम दो तिमाहियों (जुलाई-सितंबर और अक्टूबर-दिसंबर) के आंकड़े वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा प्रकाशित किए जाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मार्चांत, 2017 के विदेशी ऋण संबंधी आंकड़े 30 जून, 2017 को जारी किए गए।

  • मार्च, 2017 की समाप्ति पर भारत के वाह्य ऋण में मार्चांत, 2016 की तुलना में 2.7 प्रतिशत की कमी प्रदर्शित है।
  • मार्चांत, 2016 की तुलना में मार्चांत, 2017 के दौरान भारत के विदेशी ऋण में कमी मुख्य रूप से अनिवासी भारतीयों की जमा राशियों और वाणिज्यिक उधारों में कमी के कारण हुई।
  • वाह्य ऋण की मात्रा में कमी आंशिक रूप से भारतीय रुपया की तुलना में अमेरिकी डॉलर के मूल्य ह्रास के परिणामस्वरूप होने वाली मूल्यांकन हानि के कारण हुई।
  • मार्च, 2017 के अंत में वाह्य ऋण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में 20.2 प्रतिशत था जो मार्चांत, 2016 में अपने 23.5 प्रतिशत के स्तर से कम है।
  • मार्चांत, 2017 में भारत का वाह्य ऋण 471.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो मार्चांत, 2016 के स्तर से 13.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर कम है।
  • भारतीय रुपया की तुलना में अमेरिकी डॉलर के मूल्य ह्रास के कारण मूल्यांकन हानि 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्रदर्शित है।
  • यदि मूल्यन प्रभाव (Valuation Effect) को छोड़ दिया जाए, तो वाह्य ऋण में कमी मार्चांत, 2016 के स्तर की तुलना में मार्चांत, 2017 के 13.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर की जगह 14.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर होती।
  • वाह्य ऋण का सबसे बड़ा घटक वाणिज्यिक उधार (36.7%) रहा। उसके बाद क्रमशः एनआरआई जमा राशियां (24.8%) तथा अल्पावधिक व्यापार ऋण (18.3%) रहे।
  • मार्चांत, 2017 में दीर्घावधि ऋण 383.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा जिसमें मार्चांत, 2016 के स्तर से 17.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।
  • मार्चांत, 2017 में कुल वाह्य ऋण में दीर्घावधि ऋण की हिस्सेदारी 81.4 प्रतिशत रही जो मार्चांत, 2016 के स्तर (82.8%) से थोड़ी कम है।
  • कुल वाह्य ऋण में अल्पावधिक ऋण (मूल परिपक्वता) की हिस्सेदारी मार्चांत, 2016 के 17.2 प्रतिशत से बढ़कर मार्चांत, 2017 में 18.6 प्रतिशत हो गई।
  • विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पावधिक ऋण का अनुपात मार्चांत, 2017 में 23.8 प्रतिशत हो गया जबकि मार्चांत, 2016 में यह अनुपात 23.1 प्रतिशत था।
  • अवशिष्ट परिपक्वता के आधार पर अल्पावधिक ऋण मार्चांत, 2017 में कुल वाह्य ऋण का 41.5 प्रतिशत (मार्चांत, 2016 में 42.7%) और कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 52.9% (मार्चांत, 2016 में 57.4%) था।
  • भारत के वाह्य ऋण का सबसे बड़ा घटक अमेरिकी डॉलर में मूल्यवर्गित ऋण का हिस्सा (52.1%) सबसे अधिक रहा।
  • उसके बाद भारतीय रुपया (33.6%), एसडीआर (5.8%), जापानी येन (4.6%) तथा यूरो (2.9%) के रूप में मूल्यवर्गित ऋण का स्थान आता है।
  • सरकार के बकाया ऋण में वृद्धि हुई है जबकि गैर-सरकारी ऋण में मार्चांत, 2017 में कमी हुई है।
  • ऋण सेवा भुगतान मार्चांत, 2016 के 8.9 प्रतिशत की तुलना में मार्चांत, 2017 में घटकर चालू प्राप्तियों का 8.3 प्रतिशत हो गया।

भारत के विदेशी ऋण की संरचना

बिलियन अमेरिकी डॉलर

घटक मार्चांत, 2016 सं. मार्चांत, 2017 अनु. मार्च, 2016 की तुलना में वृद्धि/कमी मार्च, 2016 की तुलना में प्रतिशत वृद्धि/कमी
1 बहुपक्षीय 54 54.5 0.5 0.9
2 द्विपक्षीय 22.5 23.2 0.7 3.1
3 अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) 5.6 5.4 -0.2 -3.5
4 व्यापार ऋण (Trade Credit) 10.6 9.7 -1 -9
5 वाणिज्यिक उधार 180.7 173.1 -7.7 -4.2
6 एन.आर.आई. जमा राशियां 126.9 116.9 -10.1 -7.9
7 रुपया ऋण 1.3 1.2 -0.1 -3.9
8 दीर्घावधिक ऋण (1+7) 401.6 383.9 -17.7 -4.4
9 अल्पावधिक ऋण 83.4 88 4.6 5.5
10 कुल विदेशी ऋण (8+9) 485 471.9 -13.1 -2.7
नोट : सं. = संशोधित, अनु. = अनुमानित

लेखक शिव शंकर तिवारी