भारत-बांग्लादेश समझौते को मंजूरी

India-Bangladesh agreement cleared

भारत-बांग्लादेश का साझा इतिहास, साझी विरासत, साझी भाषा संस्कृति, स्वाधीनता संघर्ष एवं स्वतंत्रता की साझी विरासत दोनों देशों को आपस में जोड़ती है। भारत के प्रयासों द्वारा वर्ष 1971 में बांग्लादेश का एक राष्ट्र के रूप में जन्म हुआ। ये भारत के ही प्रयास थे कि बांग्लादेश को वर्ष 1974 में संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता प्राप्त हुई। हालांकि जल विवाद, सीमा विवाद, न्यू मूर द्वीप की समस्या, शरणार्थी समस्या, आतंकवाद आदि विवादित मुद्दों के कारण दोनों देशों के रिश्तों में कभी-कभी तल्खी देखी गई है। बावजूद इसके वर्तमान में इन दोनों महत्वपूर्ण देशों के बीच का रिश्ता एक नए मुकाम तक पहुंचता नज़र आ रहा है जिससे दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय संतुलन बनाने में मदद मिल रही है। हाल ही में सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच समझौते पर हस्ताक्षर को भारतीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी से इन दोनों देशों के साथ-साथ दक्षिण एशिया की राजनीति को एक नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

  • 14 जून, 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से हस्ताक्षरित समझौते को मंजूरी प्रदान की।
  • ज्ञातव्य हो कि भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और बांग्लादेश के सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रभाग के बीच अप्रैल, 2017 में एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।
    यह पांच वर्ष के लिए प्रभावी होगा।
  • इसके बाद दोनों पक्षों की आपसी लिखित सहमति द्वारा इसके प्रभावी रहने के दौरान किसी समय इस समझौते का विस्तार हो सकेगा।
  • किसी एक पक्ष द्वारा अन्य पक्ष छः माह की लिखित पूर्व-सूचना के बाद इसे निरस्त किया जा सकेगा।
  • सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र से जुड़ा यह समझौता स्वाभाविक तौर पर एक तकनीकी समझौता है और यह मुख्य रूप से ई-गवर्नेंस, एम. गवर्नेंस, ई-पब्लिक सर्विस डिलीवरी, साइबर सुरक्षा आदि पर जोर देता है।
  • इस समझौते के लक्ष्य निम्न हैं-
    (i) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा बांग्लादेश में कारोबार के अवसरों और सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार की संभावनाएं तलाशना।
    (ii) भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना।
    (iii) रोजगार के अवसरों का सृजन करना।

लेखक-राकेश कुमार मिश्रा