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भारत-जापान : प्राकृतिक सहयोगी

(स्रोत : द टाइम्स ऑफ इंडिया -11 दिसंबर, 2015)

मूल लेखक- शिंजो अबे

मैं जापान और भारत के साथ रिश्तों को विशेष महत्त्व देता हूं। प्रधानमंत्री के रूप में मैने जब वर्ष 2007 में भारत की पहली यात्रा की थी तब मुझे भारत की संसद को संबोधित करने का सम्मानजनक अवसर प्राप्त हुआ था। मैंने उस दौरान ‘दो समुद्रों का संगम’ नामक शीर्षक वाले अपने भाषण में कहा था ‘‘भारत-जापान संबंध’’ दुनिया में कहीं भी और किसी भी द्विपक्षीय संबंध की तुलना में विकास की बड़ी क्षमता से युक्त है।
मेरा विश्वास निरंतर मजबूत होता चला गया और अब यह दृढ़ निश्चय में बदल चुका है। पुनः प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद मैंने जनवरी, 2014 में पहली बार भारत की यात्रा की और भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में निमंत्रित होने का गौरव मिला।
जापान और भारत आधारभूत मूल्यों जैसे-स्वतंत्रता, प्रजातंत्र, मानवाधिकार, न्यायपूर्ण शासन तथा सामरिक हितों के साझीदार हैं। मेरा यह विश्वास है कि मजबूत भारत, जापान के विशेष हित में है और मजबूत जापान, भारत के विशेष हित में है। जबकि जापान, भारत को विकास में सहयोग प्रदान करता है जापान, भारत से भी बहुत कुछ सीखता है। भारत में अपनी तीसरी यात्रा के अवसर पर मेरी यह इच्छा है कि भारत-जापान रिश्तों की क्षमता पूर्णरूप से पुष्पित, पल्लवित हो और आश्चर्यजनक रूप से विकसित हो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ मैं ‘‘दो समुद्रों के संगम’’ हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को खुला, शांत और समृद्ध बनाने की इच्छा रखता हूं और 21वीं सदी में हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि को और अधिक अग्रसर करेंगे।
भारत में विकास और संरचनात्मक ढांचे की बड़ी आवश्यकता है। अनेक वर्षों से जापान ने भारत के विकास सहयोग के रूप में सेवा की है और हाल के वर्षों में बड़े स्तर पर ‘येन’ ऋणों को प्रदान करके भारत को सहयोग किया है। अभी भी जापान स्थिर विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहलों-‘मेक इन इंडिया’, ‘स्किल इंडिया’ जैसे तरह-तरह के कार्यक्रमों में सहयोग कर रहा है।
जापान, भारत में लंबी अवधि एवं पर्यावरण के साथ संतुलित उच्च आर्थिक क्षमता एवं गुणवत्तापूर्ण ढांचे के विकास में सहयोग दे रहा है। इसका एक बढ़िया उदाहरण दिल्ली की मेट्रो है जो एक आवश्यक जन-यातायात प्रणाली के रूप में दिल्ली की सेवा कर रही है। मैं इस बात से बहुत खुश हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कह कर अपनी इच्छा कीं कि किसी भी राष्ट्र ने भारत के आधुनिकीकरण एवं प्रगति में उतनी सहायता नहीं की जितनी की जापान ने। कारें, मेट्रो रेलें, औद्योगिक पार्क और न कोई ऐसा सहयोगी जल्द ही भारत के बदलाव हेतु कोई बड़ी भूमिका निभा सकेगा जितना कि जापान।
जापान के व्यापार की पहुंच भारत में वस्तुओं के निर्माण में तथा ऐसी गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के निर्माण में जिनकी भारत को आवश्यकता है, समय लेगी। जापान विचारों को थोपने के बजाय एक बड़ा दृष्टिकोण अपना कर स्थानीय समुदायों एवं विचारों को साथ लेकर स्थानीय लोगों के साथ आगे बढ़ता है। भारत में जापानी कंपनियों की संख्या बढ़कर अब 1200 से अधिक हो गई है। भारत अपनी प्रचुर कार्यशक्ति तथा उच्च आर्थिक प्रगति एवं जापान अपनी ‘सॉफ्ट पॉवर’, तकनीकी अनुभव, वित्त एवं अनुशासन के साथ एक-दूसरे के परस्पर पूरक और प्राकृतिक सहयोगी हैं जिससे कि एक सफल रिश्ते का विकास हो सकता है।
जापान और भारत सामुद्रिक सुरक्षा के क्षेत्र में प्राकृतिक सहयोगी हैं। जापान और भारत एशिया के दो बड़े सामुद्रिक देश हैं जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र के कोने में स्थित हैं। इस प्रकार हमारे देश हिंद महासागर एवं प्रशांत महासागर को पोषित और समृद्ध करने तथा इन्हें स्वच्छ पारदर्शिता के साथ खुला, स्वतंत्र एवं सुरक्षित बनाने की एक व्यापक भूमिका एवं जिम्मेदारी को साझा करते हैं।
इस वर्ष अक्टूबर में जापान समुद्री आत्मसुरक्षा बल के जलयान ‘फ्यूजूकी’ ने भारत-अमेरिका मालाबार अभ्यास के तहत बंगाल की खाड़ी में भाग लिया। जापान इस तरह के महत्त्वपूर्ण अभ्यासों में अब से नियमित भागीदारी जारी रखेगा।
नवंबर में ‘पूर्वी एशिया सम्मेलन’ (EAS) के दौरान दक्षिणी चीन सागर की गतिविधियों के बारे में चिंता व्यक्त की गई थी। स्वतंत्र, खुला और शांतिपूर्ण सागर बनाए रखने हेतु भारत और जापान के साथ-साथ अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का अधिकाधिक सहयोग आवश्यक है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के मामले में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में एक प्रमुख दखलकर्ता के रूप में भारत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अंतर्राष्ट्रीय सहयोग पर आधारित जापान के शांति के सहयोग के क्रिया समर्थक दृष्टिकोण से, जापान क्षेत्र में और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को शांति एवं समृद्धि के विकास हेतु सहयोग देगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान की सुरक्षा नीतियों में सहयोग देने हेतु आभार प्रकट करता हूं। मैं भारत के साथ हाल ही में स्थापित शांति एवं सुरक्षा के लिए स्थापित किए गए विधान के आधार पर घनिष्ट सहयोग की आशा करता हूं।
वास्तव में ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (UNSC) के सुधारों के माध्यम से हमारे दोनों देशों के नए स्थायी सदस्य बनने का उद्देश्य होना भी एक महत्त्वपूर्ण साझा कार्यक्रम है। संयुक्त राष्ट्र आम सभा के सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित जी-4 की सितंबर में हुई बैठक पर प्रधानमंत्री मोदी, जर्मनी की चांसलर मर्केल, ब्राजील की राष्ट्रपति रॉसेफ और मैं सुरक्षा परिषद में 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाले सुधार के उद्देश्य से ठोस परिणामों को हासिल करने के लिए नजदीकी सहयोग करने पर सहमत हुए। मैं नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर यूएनएससी सुधारों के प्रोत्साहन और सहयोग हेतु दृढ़ प्रतिज्ञ हूं।
जापान और भारत के बीच लंबे दौर के रिश्तों के लिए सांस्कृतिक और व्यक्तिगत विस्तार का आधार बहुत महत्त्वपूर्ण है।
जापान और भारत के आधारभूत मूल्यों जैसे-स्वतंत्रता, प्रजातंत्र, मानवाधिकार और न्यायपूर्ण शासन के साथ-साथ बौद्ध परंपरा के साझीदार हैं। अधिकांश जापानी भारत की गणितीय योग्यता और हजारों वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता का सम्मान करते हैं। सहनशीलता की अभिवृत्ति का, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अनेकता को स्वीकार्य मानती है, विस्तार करने से इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने में सहयोग मिलेगा।
मैं भारत और जापान के लोगों के बीच और अधिक आदान-प्रदान की आशा करता हूं। विशेष रूप से मैं यह चाहूंगा कि अधिक से अधिक भारतीय विद्यार्थी जापान आएं ताकि युवा मानव संसाधन का निर्माण हो सके।
विश्व में हमारे बीच सर्वाधिक सक्षम द्विपक्षीय संबंध हैं और मैं इस क्षमता को वास्तविकता में बदल दूंगा। मुझे भरोसा है कि प्रधानमंत्री मोदी और मैं साथ कार्य करके इसे हासिल कर सकते हैं।

अनुवादक
राजेश त्रिपाठी