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भारत का पहला एस्ट्रोबायोलॉजी सम्मेलन

India's first Stroboyoloji Conference

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति, विकास एवं उससे वितरण को लेकर कई अवधारणाएं विकसित की गई हैं, परंतु एक सर्वमान्य सिद्धांत का आना अभी बाकी है। इसी परिप्रेक्ष्य में चर्चा करने के लिए 24 अक्टूबर, 2016 को मुंबई में भारत के पहले एस्ट्रोबायोलॉजी सम्मेलन का आयोजन किया गया।

  • इस सम्मेलन का आयोजन संयुक्त राष्ट्र के मुंबई स्थित आई.ए.आर.सी. केंद्र और इंडियन एस्ट्रोबायोलॉजी रिसर्च सेंटर द्वारा नेहरू साइंस सेंटर के सहयोग से किया गया।
  • इस सम्मेलन का शीर्षक UNITES, 2016 था। इसका विषय (थीम)-लाइफ इन स्पेस (Life in Space) था।
  • सम्मेलन में पैनस्पर्मिया रिसर्च के लिए चंद्रा विक्रमसिंघे फंड (Chandra Vickrama-singhe Fund for Panspermia Research) की घोषणा की गई जो एस्ट्रोबायोलॉजी में अनुसंधान करने के लिए भारतीय छात्रों को प्रेरित करेगी।
  • पैनस्पर्मिया सिद्धांत बताती है कि जीवन की उत्पत्ति पृथ्वी पर नहीं हुई, बल्कि इसे ब्रह्मांड के किसी अन्य स्थान से पृथ्वी पर भेजा गया है।
  • इस अवसर पर डॉ. हेनरी थोर्प ने पिछले 50 वर्षों में ब्रह्मांड में जीवन की खोज के संदर्भ में नासा द्वारा किए गए प्रयासों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि भविष्य के मिशनों के लिए मंगल के स्थान पर बृहस्पति के उपग्रह यूरोपा को लक्ष्य बनाया जाना चाहिए, जिस पर उपसतही सागर होने की संभावना है।
  • सम्मेलन की शुरुआत ब्रह्मांड-विज्ञानी डॉ. जयंत नार्लिकर के व्याख्यान से हुई जिसमें उन्होंने ब्रह्मांड में सूक्ष्म जीवन की खोज के लिए चल रहे अनुसंधानों की चर्चा की।
  • उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य के प्रयोग की दिशा पृथ्वी की सतह से 40 किमी. से अधिक ऊंचाई पर पाए गए कार्बनिक पदार्थों के समस्थानिक विश्लेषण की ओर होगी।
  • यह विशेष सम्मेलन नासा द्वारा निर्धारित एस्ट्रोबायोलॉजी रोडमैप के चयनित बिंदुओं पर केंद्रित था।

लेखक-श्याम सुन्दर यादव