भारत-इस्राइल रक्षा खरीद समझौता

India - Israel Defense Purchase Agreement
  • स्वीकृति
    6 अप्रैल, 2017 को रक्षा मंत्रालय द्वारा इस्राइल से 2.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर (1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुबंध इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज से और शेष रॉफेल लि. से) की राशि के MR-SAM, वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीद समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया। यह 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुबंध ‘इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज’ (IAI) के लिए अब तक का सबसे बड़ा रक्षा अनुबंध है। यद्यपि भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 22 फरवरी, 2017 को इस समझौते को स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी।
  • समझौता
    इस समझौते के तहत आईएआई (IAI) भारतीय सेना को उन्नत एमआर-एसएएम प्रणाली (Advanced Medium Range-Surface to Air System) के अलावा पहली बार भारत में ही बने भारतीय विमानवाहक पोतों पर तैनाती हेतु LR-SAM (Long Range-Surface to Air Missile) वायु एवं मिसाइल प्रणाली की भी आपूर्ति करेगा।
  • ‘मेक इन इंडिया’ पहल
    इन प्रणालियों का निर्माण भारत में ही ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ (DRDO) और आईएआई (IAI) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। भारत एवं इस्राइल के मध्य मिसाइल प्रणाली के पोत एवं भूमि आधारित संस्करणों के संयुक्त-निर्माण एवं विकास समझौतों पर हस्ताक्षर क्रमशः वर्ष 2006 और 2007 में ही हो गए थे। इन प्रणालियों के निर्माण में इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) की पूरक एल्टा डिफेंस लि. (ELTA Defence Ltd.), रॉफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम लि. (RAFAEL Advanced Defence System Ltd.) के अतिरिक्त भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. (BEL), भारत डायनामिक्स लि. (BDL), टाटा ग्रुप एवं लार्सन एंड टुब्रो लि. (L & T Ltd.) सहयोगी भूमिका में होंगे। इस प्रणाली के 80 प्रतिशत कल-पुर्जे स्वदेशी होंगे।
    इस प्रणाली की पहली खेप (जिसमें 16 लांचर और 560 मिसाइल शामिल हैं) से भारतीय सेना के 5 MR-SAM रेजीमेंट तैयार किए जाएंगे। इन रेजीमेंटों को वर्ष 2023 तक विभिन्न क्षेत्रों में तैनात कर दिया जाएगा।
  • कार्यप्रणाली एवं तकनीकी
    यह मिसाइल प्रणाली किसी भी प्रकार के हवाई खतरों से निपटने में सक्षम है। इसके अतिरिक्त यह एडवांस्ड फेज्ड ऐरे रॉडार (Advanced Phased-Array) के साथ ही उन्नत रेडियो आवृत्तियों ढूंढने वाली युक्तियों (Advanced Radio Frequency Seekers) से सुसज्जित है। इस प्रणाली का भूमि आधारित संस्करण की मारक क्षमता 50-70 किमी. और पोत संस्करण की मारक क्षमता 90-150 किमी. है। वर्तमान में MR-SAM के जिस मौजूदा संस्करण का परिचालन इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी और इस्राइल डिफेंस फोर्स में किया जा रहा है, उसमें बराक-1 मिसाइल का प्रयोग किया जा रहा है, जबकि उन्नत एमआर-एसएएम (Advanced Medium Range-Surface to Air) मिसाइल डिफेंस प्रणाली में बराक-8 (Barak-8) मिसाइलों का प्रयोग किया जाएगा।
  • भारत-इस्राइल रक्षा संबंध
    वर्ष 2017 में भारत-इस्राइल संबंधों के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं और जुलाई, 2017 में भारतीय प्रधानमंत्री की इस्राइल यात्रा प्रस्तावित है जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इस्राइल यात्रा है। इसके अतिरिक्त पिछले वर्ष नवंबर में, इस्राइल के राष्ट्रपति रुवेन रिवलिन ने भारत की यात्रा की। इस पैमाने से भारत-इस्राइल संबंधों में प्रगाढ़ता दोनों देशों की एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण स्थिति को सूचित करता है। संबंधों के इस विकास का सबसे प्रमुख एवं मूल स्तंभ है-‘रक्षा सहयोग’।
    यद्यपि 17 सितंबर, 1950 को भारत द्वारा इस्राइल को एक पृथक राष्ट्र की मान्यता प्रदान कर दी गई, फिर दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना वर्ष 1992 में हुई। अपने जीवन के अंतिम दिनों में गांधीजी ने पृथक ‘यहूदी राज्य’ बनाने का विरोध किया था। इस विरोध एवं अरब देशों में अपने हितों की रक्षा करने हेतु भारत ने वर्ष 1992 तक इस्राइल से दूरी बनाकर रखी थी। इसका एक कारण फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात से भारत के मधुर संबंध भी थे।
    वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भारत ने अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस से इतर अन्य पश्चिमी राष्ट्रों की ओर भी देखना प्रारंभ किया। इस्राइल इन राष्ट्रों में अग्रपांक्तेय था। वैश्विक आतंकवाद के बढ़ते खतरों से निपटने में भी इस्राइली सहयोग भारत के लिए खासा मुफीद था।

लेखक-श्याम सुन्दर यादव